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जयपुर जेल में कविताएं लिख रहे हैं कैदी!

Sat, 19 Jul 2014 12:49 PM IST
Updated Sat, 19 Jul 2014 12:49 PM IST
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prisoners turned poet in rajasthan jails
बार-बार जो बहते हैं तेरे अश्क,
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हर बार कुछ न कुछ कहते हैं तेरे अश्क।
हर आंसू ये कहता है, तूने मेरी कदर नहीं जानी,
गिरा दिया मुझे आंखों से क्यों समझ के पानी।
आंसू शीर्षक से यह कविता लिखने वाला आमेर के लालवास निवासी कृष्ण कुमार ढाई साल से जेल में है। वह जमीनी रंजिश में हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

खुद को लायक बनाने की ललक

prisoners turned poet in rajasthan jails
यह सही है कि ये कैदी कानून की नजर में हत्यारे हैं, लेकिन यह भी सही है कि इनमें से कई में कुछ बनने और कुछ कर दिखाने की ललक भी है। इनमें से कई ने इग्नू के जरिए सर्टिफिकेट कोर्स और आईटीआई किया है।

आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को एक निश्चित समय बाद जेल से छूटने की भी उम्मीद रहती है। लम्बे समय तक अच्छा व्यवहार पाए जाने पर कैदियों को जेल से छोड़ दिया जाता है। सरकार अमूमन हर साल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ऐसे कैदियों को छोडऩे की घोषणा करती है।
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अफसर करते हैं हौसला अफजाई

prisoners turned poet in rajasthan jails
इसके लिए जेल के अफसर भी इनकी हौसला-अफजाई करते हैं। जेल अधीक्षक प्रमोद शर्मा का कहना है कि इसका असर दूसरे कैदियों पर भी पड़ेगा, जिससे जेल का माहौल और बेहतर होगा।

इस बारे में एडीजी जेल भूपेन्द्र कुमार दक का कहना है कि इन कैदियों की रचनात्मक और सृजनात्मक प्रवृत्ति का असर दूसरे कैदियों पर भी पड़ेगा उनमें भी कुछ करने की ललक जागृत होगी।
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मां पर भावुक पंक्तियां

prisoners turned poet in rajasthan jails
मां चूल्हा, धुआं, रोटी और हाथों का छाला है,
मां जिंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है।
मां पृथ्वी है, जगत है, धुरी है,
मां बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है।
मां पर ये पंक्तियां सियाराम शर्मा ने लिखी हैं। कानोता के गिला की नांगल निवासी सियाराम को दहेज हत्या में दस साल की सजा सुनाई गई। वह चार साल से जेल में है। उसने इग्नू से बीपीपी डिप्लोमा के साथ आईटीआई भी पूरी कर ली है।

हंसी के फव्वारे भी

prisoners turned poet in rajasthan jails
आया जेल में नया सजा बंदी, हुआ स्वागत खास,
गेट में सिपाही ने तलाशी में की गुदगुदी और कहा कुछ नहीं है इसके पास।
जेलर ने पूछ डाला, पूरे खानदान का नाम,
भाई-बहन, मम्मी-पापा और दादा-दादी का क्या था काम।
नया बंदी शीर्षक से यह हास्य कविता हनुमान सहाय ने लिखी है। दहेज हत्या में आजीवन कारावास की सजा पा चुका हनुमान पांच साल कैद काट चुका है। वह भी इग्नू से आईटीआई के साथ कई सर्टिफिकेट कोर्स कर रहा है।
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