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7 सालों में कई बार 'एंग्री मैन' हुए बिन्नी
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 16 Jan 2014 09:06 PM IST
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आम आदमी पार्टी के बागी विधायक विनोद कुमार बिन्नी शुरू से आक्रामक तेवर दिखाते रहे है। वह छोटी-छोटी बातों को लेकर भिड़ने से पीछे नहीं रहते है। नगर निगम की सदन की बैठक एवं वार्ड समितियों की बैठकों में भी विरोधी दलों के पार्षदों से भिड़े चुके है।
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इतना ही नहीं, राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होने पर वह तत्काल बगावत करने में भी माहिर है। पिछले सात सालों में कई उदाहरण मिल चुके है।
विनोद कुमार बिन्नी ने राजनीतिक जीवन की शुरूआत कांग्रेस से की थी, लेकिन वर्ष 2007 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और वह जीतने में सफल रहे।
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वर्ष 2009 लोकसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए। इस दौरान नगर निगम के सदन की बैठक में बजट पर चर्चा के दौरान वह कटाक्ष करने पर सदन के नेता सुभाष आर्य से भिड़ गए थे। विपक्ष के नेता जयकिशन शर्मा के हस्तक्षेप के चलते मामला शांत हुआ।
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बिन्नी ने कुछ दिनों बाद शाहदरा दक्षिणी क्षेत्र की वार्ड समिति की बैठक में भाजपा पार्षदों से भिड़ गए। इस दौरान उन्होंने मेज पलट दी थी। वर्ष 2012 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने बिन्नी को टिकट नहीं दिया।
वह एक बार फिर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में कूद पड़े और इस बार भी वह जीतने में सफल रहे। इस बार उन्होंने कांग्रेस या फिर भाजपा में शामिल होने के बजाए आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया।
आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद बिन्नी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। वह 20 दिन में दो बार नाराजगी दिखाकर करीब-करीब पार्टी से अलग हो गए हैं। जबकि चुनाव के दौरान पार्टी ने बिन्नी को खूब इज्जत दी।