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देश में चल रहा है सास-दामाद का सीरियल: मोदी

Fri, 16 Aug 2013 10:30 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 16 Aug 2013 10:30 AM IST
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narendra modi speech on independence day

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर सभी देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस पर करारा 'हमला' बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक ही परिवार के भक्त बन गए हैं।

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मोदी ने भुज के लालन कॉलेज में तिरंगा फहराया और सभी महापुरुषों को स्मरण किया। उन्होंने देशवासियों से सवाल किया कि क्या आजादी के दिवानों के सपने पूरे हुए हैं? क्या हम मानसिक गुलामी में जकडे़ नहीं हैं?
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार पर चिंता जताई है उम्मीद थी कि पीएम इस पर कुछ बोलेंगे लेकिन उनसे नाउम्मीदी ही मिली। भ्रष्टाचार से लड़ना बहुत जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि पहले भ्रष्टाचार के लिए एक शब्दावली चलती थी भाई भतीजावाद। फिर आया मामा-भांजा और अब देश में चल रहा है सास-बहू-दामाद का सीरियल।

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उन्होंने कहा कि देश को आजादी के बाद यह बात महसूस हो रही है कि हम मानसिक गुलामी से कैसे बाहर निकलें? इससे बाहर निकलने की जरूरत है। देशवासी पिछले 60 साल से रटी रटाई बातें सुनकर ऊब चुके हैं।

'पीएम एक ही परिवार के भक्त'
मोदी ने प्रधानमंत्री के भाषण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह पीएम का भाषण सुन रहे थे ताकि उससे कुछ काम करने का जज्बा मिले, कुछ सीख मिले। उनके भाषण से कुछ संदेश की उम्मीद थी। लेकिन निराशा ही हाथ लगी।

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उन्होंने कहा कि बहुत दुख की बात है कि पीएम लाल किले से सिर्फ एक ही परिवार को याद करते हैं। जब आप नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का जिक्र कर रहे थे तो क्या लाल बहादूर शास्त्री का जिक्र कर नहीं सकते थे। उन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा दिया। आपने उनको याद क्यों नहीं किया? सरदार पटेल, जिन्होंने कांग्रेस को पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनका भी आपने नाम नहीं लिया। इस बात पर दुख होता है। आपने एक ही परिवार का जिक्र क्यों किया?

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आपने तो उत्तराखंड पर सिर्फ कुछ लोगों को सराहा लेकिन आप पूरे देशवासियों की मदद की भावना को भूल गए। लेकिन आप तो एक ही परिवार के भक्त हो गए तो फिर चिंता जाहिर है।

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'गरीबों की थाली में छिड़क रहे हैं एसिड'
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा पर कुछ बातें हैं जिस पर चर्चा करनी हैं लेकिन वो तैयार नहीं हैं। दिल्ली में बैठे लोग गरीब की थाली में खाना नहीं, एसिड छिड़क रहे हैं, नमक छिड़क रहे हैं। कोई कहता है दो रुपए में भर पेट खाना मिलता है तो कोई पांच रुपए में।

मोदी ने कहा कि पीएम जी, देश के आखिरी छोर पर बैठे आदमी को योजनाओं को लाभ कैसे मिले? इस पर विचार करने की जरूरत है। कांग्रेस और उसकी सहयोगी सरकारें इंदिरा गांधी की योजनाओं को लागू करने में नाकाम रही हैं, जबकि भाजपा और सहयोगी दलों की सरकारें उनसे बेहतर हैं।

मोदी ने कहा कि वह राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति जी की पीडा़ समझते हैं। देश के शासक इस पीडा़ का जवाब दे पाएंगे या नहीं, वह नहीं जानते। राष्ट्रपति की चिंता यह है कि शासक दल ससंद को चलने नहीं दे रहा।

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तय करनी होगी सहनशक्ति की सीमा
राष्ट्रपति ने पाक की हरकतों पर चिंता जताते हुए कहा है कि सहनशक्ति की भी सीमा होती है इस पर मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पीएम राष्ट्रपति की पीड़ा को समझते और जवाब देते, लेकिन उनके भाषण से निराशा हुई।

उन्होंने कहा कि सीमा पर देश के जवान शहीद हुए हैं, सेना के मनोबल को बढा़ने की जरूरत है। लाल किला पाकिस्तान को ललकारने की जगह नहीं है लेकिन जवानों के हौसलों को बढा़ने के लिए एक सही जगह है। सहन की सीमा क्या होनी चाहिए यह तो दिल्ली में बैठे नेता को तय करना होगा।

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मोदी ने कहा कि इटली के सैनिक हमारे मछुआरों को मार देते हैं, चीन अतिक्रमण कर लेता और पाक हमारे जवानों का सिर काट लेता है तब सरकार को चिंता होती है। सहनशीलता की सीमा तो हमें ही तय करनी होगी।

'कांग्रेस की दुनिया तो मोदी तक'
उन्होंने कहा कि पीएम जी आज देश की मांग है कि हम स्पर्धा करें। जब तिरंगा लहरा रहा है तो आपकी एक ब्रिगेड कंप्यूटर पर मोदी को गाली देने में लगी है। अरे, आज तो जन गण मन का गान कर लो। कांग्रेस की दुनिया तो मोदी तक सिमट गई है।

पीएम जी, काम में कमियां हो सकती हैं इरादों में नहीं होनी चाहिए। अटल-आडवाणी के राज में लोगों में विश्वास पैदा हो गया था कि देश बुलंदियों को छू लेगा। लेकिन 2004 के बाद से देश गड्ढे में चला गया है।

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