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मोदीनामाः संघ प्रचारक से राष्ट्रीय नेतृत्व तक
पणजी (गोवा)
Updated Sun, 09 Jun 2013 06:21 PM IST
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गोवा की राजधानी में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नरेंद्र मोदी को पार्टी चुनाव प्रचार समिति का मुखिया बनाया गया है।
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पार्टी के कार्यकर्ताओ में लोकप्रिय नरेंद्र मोदी को यहां तक पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। पार्टी के कई बड़े नेता उनके नाम पर सहमत नहीं थे।
मोदी के कई विरोधी भी
माना जा रहा है कि पूर्व अध्यक्ष व पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत कई दिग्गज नेता मोदी के पक्ष में नहीं थे। लोक सभा में विपक्षी की नेता व पार्टी की एक अन्य वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज भले ही गोवा में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मौजूद रहीं लेकिन वह भी मोदी के समर्थन में नहीं दिखीं।
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चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष बने मोदी पिछले कुछ सालों में देश के राजनेता के रूप में तेजी से उभरे हैं। यह वही मोदी हैं जिनके नेतृत्व में भाजपा ने गुजरात में लगातार तीन बार विधान सभा चुनाव में जीत हासिल की लेकिन उन्हीं के दामन पर 2002 में गुजरात में हुए दंगों के छींटे भी लगे हुए हैं।
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मोदी को राष्ट्रीय राजनीति में लाने की मांग
गुजरात में मोदी एक दशक से भी ज्यादा समय से पार्टी और सरकार का चेहरा बने हुए हैं। प्रचार वक्ता और कई मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले मोदी को भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में लाए जाने की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मोदी के नेतृत्व में गुजरात में लगातार तीन बार विधान सभा चुनाव जीत हासिल करने के बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में लाने में मांग पार्टी में हर ओर से उठने लगी थी। पूर्व में कई मौकों पर पार्टी के अधिवेशनों में कार्यकर्ताओं ने खुलकर मोदी का समर्थन किया था।
प्रचारक मोदी का राजनीतिक सफरनामा
मोदी शुरुआत में कई सालों तक राष्ट्रीय सेवक संघ के प्रचारक रूप में रहे।
गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद राजनीति में आए।
1995 में गुजरात विधान सभा में भाजपा की जीत में मोदी की रणनीति कामयाब रही।
1995 में मोदी को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया।
1998 में मोदी को पार्टी का महासचिव (संगठन) बनाया गया।
अक्टूबर 2001 में केशुभाई पटेल के बाद मोदी गुजरात में पहली बार मुख्यमंत्री बने।
2002 में मोदी के काल में गोधरा से शुरू हुआ दंगा पूरे प्रदेश में फैला।
गोधरा दंगा के बाद भारी दबाव के बीच मोदी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, फिर से हुआ चुनाव।
2002 विधान सभा चुनाव में मोदी की जोरदार जीत, 182 सीटों में 127 सीट भाजपा ने जीते।
2002 में दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। मोदी ने हिंदुत्व की जगह विकास को अपना नारा बनाया।
2005 में अमेरिका ने मोदी को गुजरात दंगा को रोकने में ढीला रवैया दिखाने के कारण डिप्लोमैटिक वीजा देने से मना कर दिया जो आज भी जारी है।
जुलाई 2006 में मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आतंकवाद पर लचीले रवैये पर आलोचना की। और उसके बाद से मोदी कई मौकों पर मनमोहन पर प्रत्यक्ष रूप में निशाना साध चुके हैं।
2007 में दूसरी बार गुजरात में भाजपा को दिलाई जीत और तीसरी बार बने मुख्यमंत्री।
मोदी ने 2011 के अंत और 2012 के शुरुआत में मुसलमानों को अपनी ओर जोड़ने के वास्ते सद्भावना मिशन के नाम से प्रदेश के कई इलाकों में उपवास रखा।
25 अगस्त 2011 को लोकायुक्त की नियुक्ति पर मोदी सरकार और प्रदेश के राज्यपाल के बीच जमकर तकरारें हुई।
2012 में गुजरात में भाजपा मोदी की अगुवाई में लगातार तीसरी बार चुनावी मैदान में उतरी और मोदी ने हैट्रिक लगाई। मोदी ने गुजरात में लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
मार्च 2013 में भाजपा की संसदीय बोर्ड के सदस्य बनाए गए।