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BJP में नया आला कमान, आडवाणी का खेल खत्म!
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 17 Dec 2013 01:23 PM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की रविवार शाम अहम बैठक हुई, जिसमें हालिया चुनावी नतीजों में मिली जीत का जश्न मनाया गया और आगामी चुनावों से जुड़ी रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ।
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लेकिन इस बैठक में लालकृष्ण आडवाणी ने ज्यादा बड़ी खबर बनाई। भाजपा के वयोवृद्ध नेता आडवाणी ने इस बैठक में शिरकत नहीं की और इस बात के कयासों को हवा दी कि पार्टी में अब नया आला कमान उभर रहा है।
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आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व ने भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ भोज में हिस्सा लिया, लेकिन आडवाणी नहीं आए, तो संदेह होना लाजिमी है। जिन लोगों ने हिस्सा लिया, उनमें आरएसएस के वरिष्ठ नेता सुरेश भइयाजी जोशी और सुरेश सोनी शामिल थे।
सारे बड़े नेता थे मौजूद
भाजपा की ओर से पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी, पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और संगठन के प्रभारी महासचिव राम लाल मौजूद थे।
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आडवाणी की गैरमौजूदगी अब नई बात नहीं रह गई, क्योंकि हाल में संपन्न हुए दिल्ली चुनावों को लेकर अहम फैसले करने से जुड़ी बैठकों में भी वह नहीं थे।
एक नेता ने कहा, "यह चलन वाजपेयी-आडवाणी युग के बाद नए सांगठनिक ढांचे के उभरने की ओर इशारा करता है।"
केजरीवाल पर खास चर्चा
बैठक में भाजपा नेताओं ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोलने की रणनीति पर चर्चा की, जिसने दिल्ली में उन्हें बहुमत तक नहीं पहुंचने दिया, वरना विधानसभा चुनावों का नतीजा 4-0 होता।
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भगवा दल ने स्वीकार किया कि उन्होंने आम आदमी पार्टी की ताकत को आंकने में गलती की, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते उससे हाथ मिलाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया।
बटला एनकाउंटर को फर्जी बताना और बरेली के तौकीर रजा खान से मुलाकात का हवाला देकर भाजपा यह साबित कर सकती है कि आप उसकी विचारधारा से मेल नहीं खाती। साथ ही उसका यह भी मानना है कि दिल्ली की कामयाबी ने आप में गुमान ला दिया है।