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किसानों को लीची की खेती आ रही रास
Saharanpur
Updated Wed, 05 Jun 2013 05:30 AM IST
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सहारनपुर। लीची की बागवानी जिले के किसानों को रास आ रही है। बढ़िया मुनाफे के चलते ही इसका क्षेत्रफल बढ़कर 2200 हेक्टेयर हो गया है। जिले में मुख्य रूप से शाही, कलकत्तिया और चायना प्रजाति की लीची को पंसद किया जा रहा है।
कम लागत और बढ़िया मुनाफे के चलते जिले के किसानों का रुझान लीची की बागवानी की ओर हो रहा है। इसके चलते ही बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद जिला लीची की बागवानी का दूसरा हब बन रहा है। लीची को 10 गुणा 10 मीटर पर लगाया जाता है। इससे एक बीघा में लीची के छह पेड़ आसानी से लग जाते हैं। शुरू में इसकी बढ़ोत्तरी धीमी होती है। 10 वर्ष के एक पेड़ से 50 से 60 किलो लीची आसानी से मिल जाती है। जिले में सबसे अधिक कलकत्तिया, शाही, चायना प्रजाति कामयाब हो रही है।
उद्यान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि लीची में आमतौर फटने की समस्या आती है। इसके लिए पूर्व और पश्चिमी दिशा में विंडब्रेक बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि लीची में पानी के व्यापक प्रबंधन की जरूरत होती है। जड़ों में पानी देने के साथ ही इसका स्प्रे फायदेमंद होता है। इसके अलावा फूल आने पर दो स्प्रे दो ग्राम प्रति लीटर पानी में फफूंदी नाशक बोरेक्स घोलकर करने चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार लीची का भाव 50 से 80 रुपये प्रति किलो है।
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उन्होंने बताया कि जिले में गांव जगहैता गुर्जर के राजपाल सिंह, आलमपुर कलां के रणवीर, संसारपुर के इसरार, चौरा खुर्द के महक सिंह, देवला के सरदार अमरजीत सिंह आदि लीची के बढ़िया बागवान हैं।
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कम लागत और बढ़िया मुनाफे के चलते जिले के किसानों का रुझान लीची की बागवानी की ओर हो रहा है। इसके चलते ही बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद जिला लीची की बागवानी का दूसरा हब बन रहा है। लीची को 10 गुणा 10 मीटर पर लगाया जाता है। इससे एक बीघा में लीची के छह पेड़ आसानी से लग जाते हैं। शुरू में इसकी बढ़ोत्तरी धीमी होती है। 10 वर्ष के एक पेड़ से 50 से 60 किलो लीची आसानी से मिल जाती है। जिले में सबसे अधिक कलकत्तिया, शाही, चायना प्रजाति कामयाब हो रही है।
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उद्यान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि लीची में आमतौर फटने की समस्या आती है। इसके लिए पूर्व और पश्चिमी दिशा में विंडब्रेक बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि लीची में पानी के व्यापक प्रबंधन की जरूरत होती है। जड़ों में पानी देने के साथ ही इसका स्प्रे फायदेमंद होता है। इसके अलावा फूल आने पर दो स्प्रे दो ग्राम प्रति लीटर पानी में फफूंदी नाशक बोरेक्स घोलकर करने चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार लीची का भाव 50 से 80 रुपये प्रति किलो है।
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उन्होंने बताया कि जिले में गांव जगहैता गुर्जर के राजपाल सिंह, आलमपुर कलां के रणवीर, संसारपुर के इसरार, चौरा खुर्द के महक सिंह, देवला के सरदार अमरजीत सिंह आदि लीची के बढ़िया बागवान हैं।