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प्राण के फिल्मी सफर के 21 अनसुने किस्से

Sat, 13 Jul 2013 09:14 AM IST
विजय जैन
विजय जैन Updated Sat, 13 Jul 2013 09:14 AM IST
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tribute to bollywood actor pran

दादा साहब फालके अवॉर्ड विजेता अभिनेता प्राण भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपने यादगार अभिनय के कारण वे सदा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।

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वे एक ऐसे अभिनेता रहे हैं जिनके चेहरे पर हमेशा भावनाओं का तूफान और आंखों में किरदार का चरित्र नजर आता है जो अपने हर किरदार को निभाते हुए यह अहसास करा जाता है कि उनके बिना इस किरदार की कोई पहचान नहीं है।
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बात चाहे 'जिस देश में गंगा बहती है' के 'डाकू राका' की हो या फिर 'उपकार' के अपाहिज 'मलंग चाचा' का किरदार या 'जंजीर' में 'शेरखान' का पठान किरदार उनकी संवाद अदायगी आज भी भारतीय फिल्म प्रशंसकों के जेहन में है।

दिल्ली में 1920 में जन्मे

12 फ़रवरी, 1920 को पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान इलाके में बसे एक रईस परिवार में प्राण साहब का जन्म हुआ। बचपन में उनका नाम 'प्राण कृष्ण सिकंद' था।

दिल्ली में उनका परिवार बेहद समृद्ध था। वे बचपन से ही पढ़ाई में होशियार रहे, खास तौर पर गणित में। 12वीं की परीक्षा उन्होंने रामपुर के राजा हाईस्कूल से पास की।

बनना चाहते थे
फोटोग्राफर

बहुत कम लोग जानते होंगे कि एक सशक्त और सफल अभिनेता के बचपन का स्वप्न बड़े होकर एक फोटोग्राफर बनाना था और इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने , दिल्ली की एक कंपनी 'ए दास & कंपनी' में एक अप्रेंटिस के तौर पर काम भी किया। उनका इंतजार तो भारतीय सिनेमा जगत कर रहा था।

पंजाबी में थी पहली फिल्म

1940 में लेखक मोहम्मद वली ने जब पान की दुकान पर प्राण को खड़े देखा तो पहली नजर में ही सोच लिया कि ये उनकी पंजाबी फ़िल्म “यमला जट” के लिए बेहतर है।

उन्होंने प्राण को इसके लिए तैयार किया। ये फिल्म बेहद सफल रही।

1942 से हिंदी फिल्मों में

लौहार फिल्म उद्योग में एक नकारात्मक अभिनेता की छवि बनाने में कामयाब हो चुके प्राण को हिंदी फिल्मों में पहला ब्रेक 1942 में फिल्म 'खानदान' से मिला। दलसुख पंचौली की इस फिल्म में उनकी नायिका नूरजहां थीं।

बंटवारे से पहले 22 फिल्में

बंटवारे से पहले प्राण ने 22 फिल्मों में नकारात्मक भूमिका निभाई। वे उस समय के काफी चर्चित विलेन बन चुके थे। आजादी के बाद उन्होंने लाहौर छोड़ दिया और वे मुंबई आ गए। यह उनके लिये संघर्ष का समय था।

मंटो की मदद से पहला ब्रेक

लेखक शहादत हसन मंटो और अभिनेता श्याम की सहायता से प्राण को बाम्बे टाकिज की फिल्म जिद्दी में अभिनय का अवसर मिला।

फिल्म जिद्दी में मुख्य किरदार देवानंद और कामिनी कौशल थे। उसके बाद गृहस्थी, प्रभात फिल्म्स की अपराधी, वली मोहम्मद की पुतली जैसी फिल्मे काफी महत्वपूर्ण रही।

खलनायकी में डाली जान

इस दशक की सभी फिल्मों में अभिनेता प्राण नकारात्मक भूमिका में नजर आए। 1955 में दिलीप कुमार के साथ आजाद, मधुमती, देवदास, दिल दिया दर्द लिया, राम और श्याम और आदमी नामक फिल्मों के किरदार महत्वपूर्ण रहे तो देव आनंद के साथ मुनीमजी (1955), अमरदीप (1958) जैसी फिल्में पसंद की गई।

राज कपूर अभिनीत फिल्में आह, चोरी-चोरी, छलिया, जिस देश में गंगा बहती है, दिल ही तो है जैसी फिल्में हमेशा याद की जाएंगी।

देवानंद के साथ जोड़ी

फिल्म उद्योग में चालीस की उम्र में भी प्राण की डिमांड कम नहीं हुई। प्राण ने हलाकू नमक फिल्म में मुख्य अभिनेता का किरदार निभाया यह एक सशक्त डाकू का किरदार था।

साठ के दशक के बाद भी प्राण का अभिनेता देवानंद के साथ सफल जोड़ी बनी रही बात चाहे जॉनी मेरा नाम, वारदात या देस परदेस की करें, ज्यादातर सभी फिल्में दर्शको को बेहद पसंद आई।

हास्य अभिनेता भी बने

हास्य अभिनेता किशोर कुमार और महमूद के साथ भी उनकी फिल्में पसंद की गईं। किशोर कुमार के साथ फिल्म नया अंदाज, आशा, बेवकूफ, हाफ टिकट, मन मौजी, एक राज, जालसाज जैसी यादगार फिल्में हैं तो महमूद के साथ साधू और शैतान, लाखों में एक प्रमुख फिल्म रही।

चरित्र किरदार भी निभाए

1967 में अभिनेता मनोज कुमार की फिल्म मलंग चाचा के किरदार ने प्राण का चरित्र किरदार की तरफ झुकाव बढाया। इसके बाद शहीद, पूरब और पछिम, बे-ईमान, सन्यासी, दस नम्बरी, पत्थर के सनम में महत्वपूर्ण किरदार निभाए।

अभिनेता शशि कपूर के साथ भी उनकी कई फिल्में जैसे बिरादरी, चोरी मेरा काम, फांसी, शंकर दादा, चक्कर पे चक्कर, राहू केतु, अपना खून और मान गए उस्ताद जैसी फिल्मे बेहद सफल रही।


हमजोली, परिचय, आंखों आंखों में, झील के उस पार, जिंदादिल, ज़हरीला इंसान, हत्यारा, चोर हो तो ऐसा, धन दौलत, जानवर (1983), राज तिलक, इन्साफ कौन करेगा, बेवफाई, इमानदार, सनम बेवफा, 1942 ए लव स्टोरी, फिल्मों में चरित्र अभिनेता के तौर पर नजर आये।

अमिताभ को दिलाई जंजीर

अमिताभ बच्चन के अभिनय कैरियर को बदलने वाली फिल्म जंजीर के किरदार विजय के लिये निर्देशक प्रकाश मेहरा को प्राण ने सुझाया था।

इस किरदार को पहले देव आनंद और धर्मेन्द्र ने नकार दिया था। प्राण ने अमिताभ की दोस्ती के चलते इसमें शेरखान का किरदार भी निभाया।

इसके बाद अमिताभ बच्चन के साथ ज़ंजीर, डान, अमर अकबर अन्थोनी, मजबूर, दोस्ताना, नसीब, कालिया और शराबी जैसी फिल्में महत्वपूर्ण हैं।

90 के दशक से करियर का ढलान शुरू

नब्बे दशक के शुरुवात से उन्होंने फिल्मो में अभिनय के प्रस्ताव को बढती उम्र और स्वास्थ्य के चलते अस्वीकार करने लगे लेकिन करीबी अमिताभ बच्चन के घरेलु बैनर की फिल्म मृत्युदाता और तेरे मेरे सपने में नजर आये।

350 फिल्में और दादा साहेब फाल्के

प्राण को तीन बार फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। 1997 में उन्हें फ़िल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट खिताब से नवाजा गया।

प्राण को हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2001 में भारत सरकार के पद्म भूषण और इसी साल दादा साहेब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया था।

प्राण ने तकरीबन 350 से अधिक फिल्मों में काम किया। कापते पैरो की वजह से वह 1997 से व्हीएल चेयर पर जीवन गुजार रहे थे।

अन्य किस्से

1. एक बार उनसे पूछा गया कि आप अगले जन्म में क्या बनना पसंद करेंगे तो वे बोले कि केवल प्राण
2. उनकी बॉयोग्राफी ...and PRAN' के नाम से प्रकाशित हुई।
3. प्राण अकेले ऐसे अभिनेता है, जिन्होंने कपूर खानदान की हर पीढ़ी के साथ काम किया। चाहे वह पृथ्वीराज कपूर हो, राजकपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, रणधीर कपूर, राजीव कपूर, रन्धीर कपूर, करिशमा कपूर, करीना कपूर।
4. 1972 में उन्होंने फिल्म बे इमान के लिए बेस्ट सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर अवार्ड को लेने से मना कर दिया था।
5. प्राण ने अपने 60 साल के फिल्मी कैरियर में केवल एक फिल्म 1992 में लक्ष्मण रेखा का निर्माण किया।
6. अशोक कुमार के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी। दोनों ने 25 फिल्मों में एक साथ काम किया।
7. 18अप्रैल 1945 को प्राण ने शुक्ला आहलुवालिया से विवाह रचाया। उनके तीन बच्चे हैं। दो लड़के अरविंद और सुनील और एक लड़की पिंकी।
8. 1998 में प्राण में दिल का दौरा पड़ा था। उस समय वह 78 साल के थे।

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