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खादी ग्रामोद्योग की लोन प्रक्रिया सवालों के घेरे में
Moradabad
Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
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मुरादाबाद। खादी ग्रामोद्योग की लोनिंग प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप उस वक्त लगे जब कुल 81 आवेदकों में से केवल 51 की फाइलें ही कमेटी के समक्ष पेश करने के लिए चुनी गईं।
दरअसल केंद्र सरकार द्वारा पोषित खादी ग्राम उद्योग बेरोजगारों को हर साल ऋण बांटता है। आवेदन की प्रक्रिया जिला उद्योग केंद्र और लीड बैंक की मार्फत होती है। जिन आवेदनों पर बैंक या जिला उद्योग केंद्र अपनी मुहर लगा देता है। उन्हीं आवेदनों को आयोग स्वीकार करता हैै। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी के समक्ष सभी आवेदनों को रखा जाता है। इस मौके पर आवेदक भी मौजूद होते हैं। जहां आवेदकों द्वारा लोन लिए जाने के उद्देश्य पर साक्षात्कार भी होता है। इसके बाद 30 आवेदकों के आवेदन पर कमेटी मुहर लगा देती है। जिसके आधार पर खादी ग्राम उद्योग उन्हें लोन देता है। लेकिन इस बार सब कुछ उलटा पुलटा हो रहा है। इस वर्ष आयोग के समक्ष ऋण लेने वाले 81 बेरोजगारों के आवेदन पहुंचे। जिसमें से आधे आवेदनों पर बैंक की सहमति है। शेष पर जिला उद्योग केंद्र की संस्तुति है। पर आयोग ने 81 की जगह पर कमेटी के समक्ष 51 आवेदनों को रखने का मन बनाया है। आवेदक संतोष कुमार तोमर का कहना है कि उसने बैंक के माध्यम से आवेदन किया था। लेकिन आयोग ने उसे वापस कर दिया है। जबकि आवेदन साक्षात्कार के बाद वापस होते हैं। जिला उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक अनिल शर्मा का कहना है कि यह गलत है। आयोग के खिलाफ उच्च अधिकारियों को सख्त पत्र लिखे जाएंगे। साथ ही जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला लाया जाएगा।
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