{"_id":"58-145983","slug":"Chandauli-145983-58","type":"story","status":"publish","title_hn":"टमाटर और मसूर की खेती साथ-साथ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टमाटर और मसूर की खेती साथ-साथ
Chandauli
Updated Sat, 29 Nov 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
चकिया। क्षेत्र में टमाटर के साथ साथ मसूर की खेती भी करने को किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस सह फसली खेती से किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी। इसलिए बीएचयू के कृषि वैज्ञानिक भी इसे प्रोत्साहित करने में जुटे हैं। आज स्थिति यह है कि क्षेत्र के करीब पांच सौ बीघे में इस तरह की खेती हो रही है।
तहसील क्षेत्र के नक्सल प्रभावित इलाके में करीब पांच साल पहले किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर सह फसली खेती आरंभ की थी। तब से उनकी आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। साथ ही टमाटर के साथ मसूर की खेती करने का क्षेत्रफल भी बढ़ा है।
क्षेत्र के भीषमपुर, पंचफेड़िया, बैरा, मुजफ्फरपुर, पीतपुर, कुंडा हिमैया खास, कौड़िहार, महुवारियां के अलावा नौगढ़ क्षेत्र के उदितपुर, सुर्रा, सोनवार, तिवारीपुर, शमशेरपुर सहित तमाम गांवों में सह फसली खेती में किसानों की रुचि काफी बढ़ी।
विज्ञापन
जिसका लाभ भी किसानों को मिला। इसकी देखा देखी अन्य क्षेत्रों में भी टमाटर के साथ मसूर की खेती ने पंख पसारना आरंभ कर दिया है। इस खेती को करने वाले बैरा गांव के नारद मौर्य व नरसिंह मौर्य, हेमैया खास गांव के राम सकल, पतिराज तथा शमशेरपुर गांव के महेंद्र, रामलखन, बृजराज आदि ने बताया कि टमाटर के साथ ही मसूर की खेती शुरू होती है तथा टमाटर की फसल तैयार होने के बाद मसूर तैयार होती है।
जिससे आय दोगुना हो जा रही है। किसान बताते हैं कि इस खेती में कोई खास तकनीक भी नहीं है, लेकिन पानी की अधिकता होने से नुकसान संभव है। दरअसल किसानों की आय बढ़ाने की परियोजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्र में टमाटर की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास केंद्र सरकार के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान तथा राज्य सरकार के उत्तरप्रदेश उद्यान निदेशालय ने किया था।
इस क्रम में किसानों को टमाटर की खेती की नई तकनीक देने के साथ ही उन्हें टमाटर की नई उन्नतशील प्रजातियों के बीज बीएचयू ने वर्ष 2001 में मुफ्त में दिए थे।
अनुकूल जलवायु के चलते इस बेल्ट में टमाटर की खेती ने किसानों को काफी फायदा पहुंचाया।
तब बीएचयू एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की निगाह इस क्षेत्र पर गई तथा सह फसली खेती की संभावनाओं को देखते हुए टमाटर की खेती के साथ ही रबी सत्र में दलहनी, तिलहनी फसलों की खेती की तकनीक से यह क्षेत्र परिचित हुआ। इस तरह पांच वर्ष पहले टमाटर के साथ मसूर की जो खेती परवान चढ़नी आरंभ हुई जो अब पूरी तरह से यहां विस्तार ले चुकी है।
विज्ञापन
तहसील क्षेत्र के नक्सल प्रभावित इलाके में करीब पांच साल पहले किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर सह फसली खेती आरंभ की थी। तब से उनकी आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। साथ ही टमाटर के साथ मसूर की खेती करने का क्षेत्रफल भी बढ़ा है।
विज्ञापन
क्षेत्र के भीषमपुर, पंचफेड़िया, बैरा, मुजफ्फरपुर, पीतपुर, कुंडा हिमैया खास, कौड़िहार, महुवारियां के अलावा नौगढ़ क्षेत्र के उदितपुर, सुर्रा, सोनवार, तिवारीपुर, शमशेरपुर सहित तमाम गांवों में सह फसली खेती में किसानों की रुचि काफी बढ़ी।
विज्ञापन
जिसका लाभ भी किसानों को मिला। इसकी देखा देखी अन्य क्षेत्रों में भी टमाटर के साथ मसूर की खेती ने पंख पसारना आरंभ कर दिया है। इस खेती को करने वाले बैरा गांव के नारद मौर्य व नरसिंह मौर्य, हेमैया खास गांव के राम सकल, पतिराज तथा शमशेरपुर गांव के महेंद्र, रामलखन, बृजराज आदि ने बताया कि टमाटर के साथ ही मसूर की खेती शुरू होती है तथा टमाटर की फसल तैयार होने के बाद मसूर तैयार होती है।
जिससे आय दोगुना हो जा रही है। किसान बताते हैं कि इस खेती में कोई खास तकनीक भी नहीं है, लेकिन पानी की अधिकता होने से नुकसान संभव है। दरअसल किसानों की आय बढ़ाने की परियोजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्र में टमाटर की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास केंद्र सरकार के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान तथा राज्य सरकार के उत्तरप्रदेश उद्यान निदेशालय ने किया था।
इस क्रम में किसानों को टमाटर की खेती की नई तकनीक देने के साथ ही उन्हें टमाटर की नई उन्नतशील प्रजातियों के बीज बीएचयू ने वर्ष 2001 में मुफ्त में दिए थे।
अनुकूल जलवायु के चलते इस बेल्ट में टमाटर की खेती ने किसानों को काफी फायदा पहुंचाया।
तब बीएचयू एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की निगाह इस क्षेत्र पर गई तथा सह फसली खेती की संभावनाओं को देखते हुए टमाटर की खेती के साथ ही रबी सत्र में दलहनी, तिलहनी फसलों की खेती की तकनीक से यह क्षेत्र परिचित हुआ। इस तरह पांच वर्ष पहले टमाटर के साथ मसूर की जो खेती परवान चढ़नी आरंभ हुई जो अब पूरी तरह से यहां विस्तार ले चुकी है।