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समाज सेवा के नाम पर पहुंचेगी कॉरपोरेट की राजनीतिक फंडिंग

Wed, 12 Mar 2014 07:57 PM IST
Updated Wed, 12 Mar 2014 07:57 PM IST
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Corporate's political funding will come on the name of social work

आगामी आम चुनावों में कॉरपोरेट जगत ने समाज सेवा के नाम पर चुनावी चंदा देने की तैयारी कर रखी है। पिछले चार महीने में टाटा, बिड़ला, रिलायंस, महिंद्रा जैसे बड़े कॉरपोरेट ने अपने इलेक्टोरल ट्रस्ट का पंजीकरण रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के कार्यालयों में कराया है। अहम बात यह है कि सभी कंपनियों ने इलेक्टोरल ट्रस्ट को सामाजिक सेवाएं देने वाली कंपनी के रुप में पंजीकरण कराया है।

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कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार नवंबर से जनवरी 2014 तक सभी प्रमुख कॉरपोरेट घरानों ने अपने इलेक्ट्रोल ट्रस्ट बनाए हैं। जिसमें टाटा समूह, बिड़ला, रिलायंस, महिंद्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं। टाटा समूह ने जनवरी 2014 में ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण कराया है।
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वहीं कोलकाता स्थित बिड़ला ग्रुप ने ‘परिबर्तन इलेक्टोरल ट्रस्ट’ जनवरी में पंजीकृत कराया है। जनवरी में ही एक और कंपनी ने ‘रिफार्मेटिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण किया है।
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राशि डिस्कलोज करना है या नहीं,ये ट्रस्ट पर

Corporate's political funding will come on the name of social work

दिसंबर 2013 में ‘महिंद्रा इलेक्टोरल ट्रस्ट’ का और नवंबर के महीने में रिलायंस एडीए समूह द्वारा ‘पीपुल्स इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण कराया जा चुका है। इसी महीने में एक और कंपनी ने ‘प्रतिनिधि इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के नाम से पंजीकरण कराया है।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सभी कंपनियों ने अपना पंजीकरण सामुदायिक, व्यक्तिगत और सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में काम करने के रूप में कराया है। इसमें से महिंद्रा और गौरी ट्रस्ट को छोड़कर सभी ने अपनी चुकता पूंजी शून्य दिखाई है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कंपनियों को जो भी फंडिंग करनी है, वह इलेक्शन ट्रस्ट के जरिए कर सकती हैं। इसमें कंपनी को केवल यह बताना होगा कि उसने ट्रस्ट को कितनी राशि दी है। ट्रस्ट किसी राजनीतिक दलों को कितनी राशि देता है, उसे डिसक्लोज करने की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट पर होगी।

सीएसआर को लेकर कंपनियों को लगेगा झटका

Corporate's political funding will come on the name of social work

इसके अलावा नए नियमों के तहत ट्रस्ट के जरिए चंदा नकद में नहीं दिया जा सकेगा। साथ ही ट्रस्ट के लिए यह भी जरूरी होगा कि वह जिन व्यक्तियों से पूंजी जुटा रहे हैं, उनके पैन नंबर का विवरण जरूर लें। ट्रस्ट किसी विदेशी कंपनी या नागरिक से पूंजी नहीं जुटा सकेगा।

कॉरपोरेट ने भले ही सामाजिक सेवाएं देने के नाम पर ट्रस्ट का पंजीकरण कराया है, लेकिन कंपनी कानून के तहत सीएसआर नियम का उन्हें फायदा नहीं मिलेगा। हाल ही में जारी नियमों में स्पष्ट कर दिया गया है, कि चुनाव के लिए दिया गया चंदा सीएसआर नहीं माना जाएगा।

नए कंपनी कानून में लाभ देने वाली कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना होगा।

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