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जन्मदिन विशेषः 'मालगुड़ी डेज़' से घर-घर में लोकप्रिय हुए आरके नारायण
दिनेश श्रीनेत
Updated Wed, 10 Oct 2012 11:34 AM IST
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भारतीय अंग्रेजी साहित्य के किसी भी लेखक ने हिन्दी भाषी लोगों को इतना नहीं लुभाया होगा, जितना आरके नारायण ने। उनके उपन्यास पर आधारित साठ के दशक में आई फिल्म 'गाइड' हिन्दी सिनेमा के क्लासिक्स में गिनी जाती है। लेकिन उन्हें असली लोकप्रियता अस्सी के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित 'मालगुड़ी डेज' से मिली, जिसने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
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आज भी आके नारायण का नाम लेते ही 'मालगुड़ी डेज' के चरित्र आँखों के आगे कौंध जाते हैं और उस टीवी सीरियल की अनूठी धुन कानों में गूंज उठती है। 10 अक्तूबर 1906 में जन्मे आरके नारायण का पूरा नाम रासीपुरम कृष्णस्वामी एय्यर नारायण स्वामी था। भारतीय अंग्रेजी साहित्य के बेहतरीन उपन्यासकारों में गिने जाने वाले नारायण ने दक्षिण भारत के एक काल्पनिक शहर मालगुड़ी को आधार बनाकर ज्यादातर रचनाएं लिखीं। आज नारायण के जन्मदिन पर आपसे शेयर करते हैं इस अनूठे उपन्यास और उसके लेखक से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।
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'स्वामी एंड फ्रैंड्स' एक ऐसा उपन्यास है जिसने भारतीय अंग्रेजी लेखन के सामर्थ्य को विश्वस्तर पर साबित किया। अंग्रेजी लेखक ग्राहम ग्रीन को मालगुड़ी के बैकड्राप में लिखा गया उपन्यास इतना पसंद आया कि आरके नारायण उनके प्रिय लेखकों में शामिल हो गए। ग्राहम ग्रीन तक यह उपन्यास कैसे पहुंचा इसकी भी बड़ी रोचक कथा है। नारायण ने उपन्यास लिखकर अपने एक दोस्त के पास इंग्लैंड भेजा। उनके दोस्त ने इस उपन्यास की पांडुलिपी कई प्रकाशकों को भेजी मगर किसी को वह पसंद नहीं आई। आखिरकार तंग आकर नारायण ने अपने दोस्त से कहा कि वह इस पांडुलिपी को टेम्स नदी में डुबो दे। ऐसा करने की बजाय उनके दोस्त ने यह पांडुलिपी ग्राहम ग्रीन तक पहुंचा दी। जब ग्राहम ग्रीन ने इस उपन्यास को पढ़ा तो इसकी शैली पर मुग्ध हो गए। इसके बाद यह उपन्यास न सिर्फ प्रकाशित हुआ बल्कि देश-विदेश में बेहद लोकप्रिय भी हुआ।
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नारायण ने इतने जतन से एक काल्पनिक शहर मालगुड़ी को बसाया था कि जिसने उसे पढ़ा वही उस निश्छलता और मासूमियत से भरे संसार में खो गया। इस उपन्यास के बहाने 1920 के बाद भारतीय समाज में आ रहे बदलावों को इसकी कथा में पिरोया गया है। रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी बसा एक कसबा भारतीय समाज में आ रहे बदलावों का आइना सा बन जाता है। सन 1986 में जब दूरदर्शन पर ‘मालगुडी डेज’ नामक धारावाहिक का प्रसारण शुरू हुआ तो धीरे-धीरे स्वामी नामक वह बच्चा घर-घर का दुलारा बन गया। 'स्वामी एंड फ्रेंड्स' की कहानी दस बरस के स्वामीनाथन- जिसे उसके दोस्त स्वामी पुकारते हैं- के इर्दगिर्द घूमती है। स्वामी के किरदार को स्कूल जाना ज़रा भी पसंद न था, पसंद था तो अपने दोस्तों के साथ मालगुडी में मारे-मारे फिरना। स्वामी के पिता, जिनका किरदार गिरीश कर्नाड ने निभाया था, सरकारी नौकर थे। स्वामी के दो करीबी दोस्त थे, मणि और चीफ पुलिस सुपरीटेंडेंट के पुत्र राजम।
स्वामी के किरदार में मंजुनाथ तो जैसे घर घर में लोकप्रिय हो गये थे। धारावाहिक में दिखाये चित्रों को लेखक के भाई और टाईम्स आफ इंडिया के जानेमाने कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण ने तैयार किया था। दूरदर्शन पर मालगुडी डेज़ के कुल 39 एपिसोड प्रसारित हुये। यह धारावाहिक मालगुडी डेज़ रिटर्न नाम से पुनर्प्रसारित भी हुआ। कुछ समय पहले एक मोबाइल कंपनी ने 'मालगुडी डेज' की लोकप्रियता को देखते हुए उसकी रिंग टोन्स, रिंवॉलपेपर, वीडियो क्लिप को मोबाइल पर उपलब्ध कराया जो काफी पॉपुलर हुआ।
आरके नारायण ने अपना पूरा जीवन मैसूर और चेन्नई में गुजारा। उनका निधन 13 मई 2001 में हुआ। उनके कुछ लोकप्रिय उपन्यास हैं- स्वामी एंड फ़्रेन्डस, वेटिंग फ़ॉर महात्मा, द गाइड, द मैन इटर ऑफ़ मालगुड़ी, द वेंडर ऑफ़ स्वीट्स और द वर्ल्ड ऑफ़ नागराज।