फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Geeta bali-Shammi Kapoor love story

जब शम्मी कपूर ने लिपस्टिक से भर दी थी पत्नी गीता की मांग..

Sun, 14 Aug 2016 09:53 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला,दिल्ली Updated Sun, 14 Aug 2016 09:53 AM IST
विज्ञापन
Geeta bali-Shammi Kapoor love story

शम्मी कपूर भारतीय सिनेमा के वो अभिनेता हैं, जिन्होंने बॉलीवुड अभिनेताओं के डांस करने के चलन की शुरुआत की। भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर खानदानों में एक, कपूर खानदान में पैदा हुए शम्मी ने पांच साल पहले 2011 में आज ही के दिन हमको छोड़ा था। अपने परिवार और भाईयों की तरह वो भी कम उम्र में ही फिल्मों में आ गए थे और बेहद सफल हुए। शम्मी की जिंदगी से जुड़े कई किस्से खूब मशहूर हैं। एक ऐसा ही किस्सा है उनकी और गीता बाली की शादी से जुड़ा।

विज्ञापन


 हिंदी सिनेमा में कई जोड़ियों का प्रेम किसी अमर प्रेम से कम नहीं। साथ-साथ काम करते-करते न जाने कब सात जन्मों के बंधन में बंध गए कम-से-कम इन जन्मों को निभाया भी। ऐसी ही जोड़ियों में से एक थी शम्मी कपूर और गीता बाली की जोड़ी। इस जोड़ी का मिलन जितना रोचक था इनकी शादी की कहानी उतनी ही दिलचस्प।
विज्ञापन


गीता बाली और शम्मी कपूर की मुलाकात केदार शर्मा की फिल्म "रंगीन रातें" के सेट पर हुई। गीता बाली उन दिनों हिंदी सिनेमा में अपने पैर जमा चुकी थी, जबकि कपूर खानदान से ताल्लुक रखने के बावजूद शम्मी कपूर फिल्में हासिल करने के लिए एडियां घिस रहे थे। गीता बाली की सिफारिश पर ही शम्मी कपूर को ये फिल्म मिली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए जब सेट पर दोनों की मुलाकात हुई तो शम्मी कपूर गीता बाली के स्टारडम के कारण उनसे बात करने में हिचक रहे थे। लेकिन जल्द ही दरियादिल गीता बाली ने अपने इस फिल्मी हीरो की हिचक को हवा में उड़ा दिया। गीता की दरियादिली, बड़ी-बड़ी आँखें और मोहक मुस्कान में खुद को भुला बैठे शम्मी कपूर।

गीता की उम्र थी शम्मी से ज्यादा होना बनी मुश्किल

Geeta bali-Shammi Kapoor love story
शम्मी कपूर में एक गजब का अल्हड़पन था। ये मस्तमौला गीता को भी रास आने लगा। आउटडोर शूटिंग पर रानीखेत गयी "रंगीन रातें" की टीम और निर्देशक केदार शर्मा की तीखी नजरों के बीच शुरू हुआ मुलाकातों का सिलसिला टीम की वापसी तक पूरा परवान चढ़ चुका था। मुंबई पहुँचने तक दोनों जीने-मरने की कसम खा चुके थे। मस्तमौला उन्हीं दिनों घर से भागकर माशूका को अपना कर मुंबई लौटे थे

शम्मी कपूर गीता के साथ शादी की कसम तो खा चुके थे। लेकिन उन्हें बखूबी पता था कि ये इतना आसन भी नहीं होगा। गीता बाली न केवल उनसे उम्र में बड़ी थी बल्कि वो "बावरे नैन" में बड़े भाई राजकपूर और "आनंदमठ" में पिता पृथ्वीराज कपूर की हिरोइन भी रह चुकी थी। उस पर शम्मी का हिचकोले खाता फिल्मी करियर। जाहिर था कि कपूर खानदान शम्मी को शादी की रजामंदी नहीं दे सकता था।

लेकिन शम्मी थे कि गीता के लिए हर हद्द तोड़ने को तैयार बैठे थे। परिवार की नाखुशी उन्हें और बेकरार किये जा रही थी। गीता बाली शम्मी की इस परेशानी को समझ रही थी। लेकिन वो कर भी क्या सकती थी..... शम्मी को इस परेशानी से निकला उनके परम मित्र जॉनी वॉकर ने।

आधी रात को शादी करने मंदिर पहुंचे

Geeta bali-Shammi Kapoor love story

खिलंदड और मस्तमौला जॉनी उन्हीं दिनों घर से भागकर अफी माशूका को अपना बनाकर मुंबई लौटे थे। माशूका मिलने की खुशी में जॉनी का जोश पुरे शबाब पर था। इसी जोश में उन्होंने शम्मी कपूर को भी अपने पद चिन्हों पर आगे बढ़ने की सलाह दे डाली।

जॉनी ने न केवल सलाह दी बल्कि शम्मी कपूर में इतना आत्मविश्वास भी भर दिया कि वो कपूर खानदान के खिलाफ खिलाफत का झंडा बुलंद करने को तैयार हो गए। शम्मी की सलाह हालांकि गीता बाली को तो जमी नहीं, लेकिन अपने प्यार को पाने का और कोई रास्ता नजर भी नहीं आ रहा था।

बहरहाल, वो तैयार हो गई। 23 अगस्त 1955 की आधी रात को शम्मी कपूर, जॉनी वॉकर, और हरिवालिया के साथ मुंबई स्थित वानगंगा मंदिर में गीता के शादी करने के लिए जा पहुंचे।

हड़बड़ी में वो ये भी भूल गए कि शादी के लिए सबसे अहम चीज सिंदूर होता है

Geeta bali-Shammi Kapoor love story

शम्मी कपूर जब मंदिर पहुंचे तो मंदिर के दरवाजे बंद हो चुके थे। इसलिए पुजारी ने उनकी शादी कराने से इंकार कर दिया। शम्मी की जिद्द और हालात को देखता हुए पुजारी ने उन्हें सुबह आने की सलाह दी और ये आश्वासन भी दिया कि मंदिर के कपाट खुलते ही शादी कि पूरी रस्म अदा कर दी जाएगी। सबेरे चार बजे शम्मी मंदिर के सामने हाजिर थे।

गीता को अपना बनाने का उतावलापन और परिवार का डर उनपर इस कदर हावी था कि हड़बड़ी में वो ये भी भूल गए कि शादी के लिए सबसे अहम चीज सिंदूर होता है। रस्मों-रिवाज निपटाने के बाद जब पुजारी ने उन्हें दुल्हन की मांग में सिंदूर भरने को कहा सक्ते में आ गए शम्मी कपूर। मौके की नजाकत को देखता हुए गीता ने अपनी लिपस्टिक शम्मी के हाथों में थमा दी।

और सिंदूर की जगह लिपस्टिक लगाकर ही एक-दुसरे के हो गए। शम्मी कपूर और गीता बालीकभी-कभी पत्नी की किस्मत भी पति की तकदीर बदल देती है। गीता बाली से शादी करने के बाद जैसे शम्मी की रूठी किस्मत जाग उठी। शादी के बाद गीता ने न केवल शम्मी की खिलनदडेपन पर लगाम कसी बल्कि उनके करियर की बागडोर भी अपने हाथों में ले ली।

बिमारी मामूली थी लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका

Geeta bali-Shammi Kapoor love story

गीता बाली के साथ ने न केवल शम्मी को अनुशासित किया बल्कि उनमे एक जिम्मेदारी भी पैदा की जिसकी वजह से वो करियर को लेकर काफी गंभीर हो गए। 1957 में आई नासिर हुसैन की फिल्म "तुमसा नहीं देखा" की धमाकेदार कामयाबी ने शम्मी के करियर का रुख ही बदल कर रख दिया। शम्मी का बदला अंदाज, लुक और ओ.पी.नय्यर का म्यूजिक दर्शकों को खूब रास आया और शम्मी रातोंरात स्टार हो गए।


गीता और शम्मी का ये साथ ज्यादा दिनों तक नहीं रह सका। 1965  में जब शम्मी फिल्म "तीसरी मंजिल" की आउटडोर शूटिंग पर थे तो गाता को चेचक की बिमारी हो गयी। बिमारी मामूली थी लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें  नहीं बचाया जा सका।

गीता की बीमारी की खबर सुनकर बदहवासी में अस्पताल पहुंचे शम्मी जब गीता के सामने पहुंचे तो 107 डिग्री फॉरेनहाईट बुखार में तपती गीता उन्हें पहचानने में भी असमर्थ थी। आखिरकार उन्हें  बचाया नहीं जा सका। गीता और शम्मी की इस प्रेम कहानी का अंत उसी मंदिर के पास हुआ जहाँ सात फेरे लेकर दोनों ने साथ जीने-मरने की कसम खायी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed