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गोरखपुर हादसा: दो गुनहगार बेनकाब, IMA ने बताया, दोनों दोषी क्यों?

Fri, 18 Aug 2017 04:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 18 Aug 2017 04:43 PM IST
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Accused of death of children in Gorakhpur Medical College has been arrested
बीआरडी अस्पताल, गोरखपुर

गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के मामले में आईएमए ने दो गुनहगारों को बेनकाब कर दिया है। साथ ही, ये भी बताया, दोनों दोषी क्यों हैं?

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गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत मामले में आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) द्वारा गठित चार सदस्यीय कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन को दोषी माना है। डॉक्टरों की रिपोर्ट में लिखा है कि असिस्टेंट प्रो. व नोडल अधिकारी इन्सेफेलाइटिस वार्ड, बाल रोग विभाग) डॉ. कफील खान, अस्पताल प्रधानाचार्य डॉ. राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी से सीधा संपर्क था।
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रिपोर्ट में डॉ. राजीव मिश्रा व डॉ. कफील खान को घटना के लिए दोषी माना है। खास बात है कि कमेटी ने केंद्र सरकार को कुछ सुझाव देने के साथ एडवाइजरी भी जारी की है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक, गोरखपुर मामले के बाद दिल्ली से डॉ. आरएन टंडन, डॉ. केपी कुशवाहा, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. बीबी गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी गोरखपुर गयी थी। कमेटी ने 16 अगस्त को अस्पताल में जाकर विभिन्न डाक्टरों समेत कर्मियों से विस्तार से जांच की।
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इसी जांच के आधार पर सामने आया है कि डॉ. कफील खान,अस्पताल प्रधानाचार्य डॉ. राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी से सीधा संपर्क था। इन्हीं ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी थी, लेकिन पैसा अकाउंट में होने के बाद भी जारी नहीं किया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर अब कमेटी ने 18 अगस्त को गोरखपुर में ही अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।  

मीडिया ने मामले को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर दिखायाः कमेटी

Accused of death of children in Gorakhpur Medical College has been arrested
कमेटी की जांच के तथ्य : 
- विभाग के अधिकांश डॉक्टर डॉ0 कफील खान की भूमिका से असंतुष्ट थे। जबकि वर्तमान घटना में भी उनकी नकारात्मक भूमिका ही बता रहे हैं। कमेटी ने लिखा है कि मीडिया ने बहुत बढ़ा-चढ़ा कर    दिखाया।  
- डॉ0 कफील खान विभागाध्यक्ष की सलाह के बगैर ही इन्सेफेलाइटिस व नवजात शिशु वार्ड की संचालन में अपनी मर्जी से काम करते थे।  
. डॉ. कफील खान का प्रधानाचार्य प्रो.0 राजीव मिश्रा तथा उनकी पत्नी से सीधा सम्पर्क था। रिपोर्ट में लिखा है कि विभाग के चिकित्सकों को संदेह है कि संदर्भित घटना को मिडिया में भी जारी करने का काम भी डॉ0 कफील ने ही किया होगा। 
- उपरोक्त दुखद घटना को मीडिया में बहुत बढा चढाकर दिखाया गया है। 
- ऑक्सीजन की आपूर्ति अल्प समय तक दिनांक 10.08 2017 की रात को बाधित हुई थी। 
- लिक्विड ऑक्सीजन गैस के आपूर्तिकर्ता को विगत 5-6 महीने से भुगतान नहीं किया गया था, लेकिन गैस सिलेण्डर आपूर्तिकर्ता (इम्पीरियल गैस एजेंसी) को कुछ भुगतान किया गया। 
- अस्पताल एवं वार्ड की सफाई संतोषजनक नहीं है। 

हॉस्पिटल में क्षमता से अधिक मरीज और सुविधाओं की कमी

Accused of death of children in Gorakhpur Medical College has been arrested
gorakhpur
 नवजात शिशु व अन्य गंभीर भर्ती रोगियों की संख्या अस्पताल की क्षमता से बहुत अधिक है। गोरखपुर व आसपास के 16 जिलों में इन्सेफेलाइटिस तथा नवजात शिशुओं के उपचार की अन्य कोई सुविधा नहीं है। जिला चिकित्सालयों तथा पीएचसी/सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञों, नर्सों व अन्य कर्मचारिया की बेहद कमी है। पूर्वांचल के 10 जिलों में स्थापित आईसीयू मानव व अन्य संसाधनों की कमी से नहीं चल पा रहे हैं। 

- केंद्र सरकार को भेजे गए सुझाव : 
- यदि सरकारी अस्पताल में यदि किसी मरीज को इलाज संभव न हो तो उसे तुरंत निजी अस्पताल में भेजा जाए और उसका सारा खर्चा संबंधित सरकार उठाये।  
- सभी अस्पतालों में कम से कम एक हफ्ते तक की ऑक्सीजन, दवा व अन्य जरूरी जांच उपकरण होने जरूरी हैं। यदि उक्त सामान को इकट्ठा खरीदते हैं तो सस्ता पड़ेगा। इससे मरीज को इलाज को     खर्चा भी सस्ता होगा।  
- देशभर के सभी निजी अस्पतालों को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर से मान्यता होनी चाहिए।  
- अस्पतालों में हेल्थ केयर सर्विस  (दवा, जांच उपकरण व आक्सीजन आदि मुहैया करवानी वाली कांट्रेक्टर) को उनके सामान का पहले से (एडवांस)भुगतान होना जरूरी है।  
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