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भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे केजीएमयू के पूर्व वीसी, होगी जांच
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 26 Aug 2017 02:26 AM IST
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फाइल फोटो
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केजीएमयू के पूर्व कुलपति रविकांत के खिलाफ जांच मामले में नया मोड़ आ गया है। शासन मोहनलालगंज सांसद कौशल किशोर के जिस पत्र के आधार पर जांच के आदेश केजीएमयू प्रशासन को दिए हैं, वही फर्जी साबित हो गया है। शुक्रवार को सांसद कौशल किशोर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बताया कि तीन मई 2017 को उनके हस्ताक्षर से जो पत्र पूर्व कुलपति के नाम भेजा गया है, वह फर्जी है, उस पर कोई विचार न किया जाए।
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विशेष सचिव उप्र शासन संजय कुमार उपाध्याय ने वीसी केजीएमयू को एक पत्र लिखकर पूर्व कुलपति प्रो. रविकांत के खिलाफ अनियमितताओं की जांच कराने के निर्देश दिए थे। 21 अगस्त को लिखा गया पत्र 25 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे पूरे केजीएमयू में हड़कंप मच गया। दिन भर पूर्व कुलपति प्रो. रविकांत के कार्यकाल के किस्सों को कर्मचारी अधिकारी चटखारे लेकर चर्चा करते रहे।
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पत्र में लिखा था कि एक संस्था के 1 मई 2017 को जारी पत्र, सतर्कता विभाग-2 की ओर से 16 जून 2017 को जारी पत्र और सांसद कौशल किशोर की ओर से तीन मई 2017 को भेजे पत्र के आधार पर पूर्व कुलपति प्रो. रविकांत के कार्यकाल में की गईं अवैध नियुक्तियों, प्रोन्नतियों, वित्तीय अनियमितताओं व नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।
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इसी आधार पर कुलसचिव को शामिल करते हुए जांच समिति गठित कर कथित आरोपों की जांच कराकर 31 अगस्त तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। यही नहीं, सचिव ने ये भी लिखा कि ये प्रकरण मुख्यमंत्री से संदर्भित है।
इसलिए इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। तीन शिकायतकर्ताओं में सेएक का पत्र फर्जी होने के बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया है। हालांकि केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन और केजीएमयू कार्य परिषद के सदस्यों ने राज्यपाल को पूर्व कुलपति के खिलाफ लिखा था, उसमें भी लगभग एक ही तरह के आरोप हैं। अब इस मामले में केजीएमयू प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।