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धूमधाम से मनाई गई 'निरजंन स्मृति'
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 01 Apr 2014 01:29 PM IST
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मशहूर बांसुरीवादक पं. निरंजन प्रसाद की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित ‘निरंजन स्मृति’ में भरतनाट्यम व बांसुरी की मिलीजुली प्रस्तुतियां संगीत नाटक अकादमी में हुईं।
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पद्मभूषण यामिनी कृष्णमूर्ति ने भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति से और पं. निरंजन प्रसाद के पुत्र सौरभ बनौधा व शिष्य राजकिशोर दलबेहरा ने बांसुरी की धुनों से उनकी यादें ताजा कीं।
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कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अंबेडकर संगीत अकादमी की ओर से किया गया, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि मेयर दिनेश शर्मा ने पं. निरंजन प्रसाद की पुस्तक ‘साधना के फूल’ का विमोचन भी किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत पं. निरंजन प्रसाद के पुत्र सौरभ बनौधा के बांसुरी वादन से हुआ। इसके बाद पद्मभूषण डॉ. यामिनी कृष्णमूर्ति के शिष्यों ने राग नटा में ‘विनायक कुवुथवम व अलारिपु’ गणेश वंदना प्रस्तुत की।
शिष्यों की पेशकश के बाद डॉ. यामिनी ने कीर्तनम शृंगार लहरी विधा में देवी स्तुति भरतनाट्यम से पेश की। अंग संचालन व भाव-भंगिमाएं दर्शकों को पसंद आईं।
अगली प्रस्तुति तेज प्रकाश, आकृति, असवथी, अदिति, शायनतानी व ऐश्वर्या ने कृष्ण व गोपियों की लीला की दी। डॉ. यामिनी ने श्रोताओं को रसों के बारे में जानकारी देने के बाद राग हिण्डोलम पर शिष्यों संग अंतिम प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का समापन पं. निरंजन प्रसाद के शिष्य राजकिशोर दलबेहरा ने विलंबित एक ताल व द्रुत तीन ताल में राग देश और बनारसी धुनों की सुंदर पेशकश की। तबले पर संगत राजीव शुक्ल ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अलका निवेदन ने किया।
पं. निरंजन प्रसाद
बनारस घराने के मशहूर बांसुरीवादक पं. निरंजन प्रसाद लखनऊ के अलीगंज में रहते थे। उनका निधन गत वर्ष हुआ था।
उन्होंने प्रसिद्ध शहनाई व बांसुरीवादक भोलानाथ प्रसन्ना व ठुमरी-दादरा सम्राट महादेव प्रसाद से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की। द्रुत शैली के साथ रागों का शांत विस्तार इनकी बांसुरी वादन की विशेषता रही।
इसकी मधुर छाप उन्होंने हिंदुस्तान के अलावा ऑस्ट्रेलिया, यूरोप व मध्य-पूर्वी देशों में छोड़ी। इसके अलावा गुड्डी, शोर, धड़कन, प्रेम पर्वत फिल्मों में भी काम किया। रेडियो और टेलीविजन पर भी उन्होंने तमाम प्रस्तुतियां दीं।