देखें सुपरमून, बनें दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी
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राजधानी के लोग सोमवार को एक दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बनेंगे। 68 साल बाद एक बार फिर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होगा। इस खगोलीय घटना को लखनऊ में भी देखा जा सकेगा।
यूपी एमच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब के सुमीत का कहना है कि 2016 में छह सुपर मून हो रहे हैं। इनमें से चार मार्च, अप्रैल, मई और अक्तूबर में हो चुके हैं। अब 14 नवंबर को चांद धरती के नजदीक आ रहा है। दिसंबर में एक और सुपरमून होगा लेकिन इस दौरान भी चंद्रमा नवंबर की तुलना में थोड़ा सा दूर रहेगा।
बाल दिवस पर इस खगोलीय घटना को बच्चों को दिखाने की तैयारी इंदिरागांधी नक्षत्रशाला और यूपी एमच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब ने की है। इसके लिए साप्ताहिक बंदी में भी नक्षत्रशाला को खोला जा रहा है।
जानें, सुपरमून क्या है?
शाम को छह बजे के बाद सुपरमून को टेलीस्कोप की मदद से दिखाया जाएगा। नक्षत्रशाला के प्रभारी व संयुक्त निदेशक अनिल यादव ने बताया कि बाल दिवस पर शाम को छह बजे से नौ बजे के बीच आकाश दर्शन में अलग-अलग तारे और सुपरमून की खगोलीय घटना को दिखाया जाना है।
दिन के समय सूर्यदर्शन का कार्यक्रम भी रहेगा। इस दौरान दोपहर में एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी 12 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगी। इसके लिए कोई शुल्क नहीं रहेगा।
पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा दीर्घवृत्तकार है। इससे चंद्रमा एक माह में पृथ्वी के सबसे करीब की स्थिति में होता है। इसे पैरिगी कहते हैं। जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे दूर होता है।
उसे अपोगी कहते हैं। किसी माह में पूर्णिमा अथवा अमावस्या का चंद्रमा पैरिगी के साथ घटित हो तो उसे सुपरमून कहते हैं। सुपरमून के समय चंद्रमा हमारे सबसे करीब होता है।
खगोलविद् रिचर्ड नोले ने करीब 30 साल पहले सुपरमून की अवधारणा दी थी। खगोलीय गणना के मुताबिक सोमवार को सुपरमून के समय चंद्रमा पृथ्वी से 356508.3203 किमी दूर होगा।