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यूपी: सामने आया कैराना का 'काला सच', सही साबित हुआ 'पलायन'

Thu, 22 Sep 2016 06:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 22 Sep 2016 06:04 PM IST
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human rights commission report over kairana issue.
कैराना गांव
शामली जिले के कैराना में एक सम्प्रदाय के लोगों की अराजकता से परेशान परिवारों के पलायन करने की शिकायतें सही थीं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम की जांच में कई परिवारों ने स्वीकारा कि अपराधों की वजह से उन्हें घर छोड़ना पड़ा।
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यही नहीं दुराचार व हत्या, छेड़खानी, वसूली के लिए हत्या, पुनर्वास के बाद बहुसंख्यक समुदाय के अल्पसंख्यक हो जाने से डेमोग्राफी बदलने की शिकायतें भी सही पाईं। आयोग ने टीम की सिफारिशों को मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजकर आठ हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) भी तलब की है।
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आयोग में सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा ने शिकायत दी थी कि हिंदुओं के परिवार कैराना छोड़ रहे हैं। इसमें एक सामूहिक दुराचार व हत्याकांड का उदाहरण दिया गया था, जिसमें पुलिस ने आरोपियों पर एक्शन नहीं लिया।
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वहीं, अवैध वसूली न देने पर कारोबारियों शंकर और राजू उर्फ राजेंद्र की हत्या, पेट्रोल पंप लूट, लूट के आरोपियों का पीछा करने पर कांस्टेबल की हत्या जैसे मामले उठाए गए थे। शिकायत में मोनिका ने दावा किया था कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। ऐसे में मानवाधिकार आयोग को हस्तक्षेप करना चाहिए।

इस रिपोर्ट के मायने...फिर गरमाएगी सियासत
कैराना से पलायन का मुद्दा भाजपा ने जोर-शोर से उठाया था। तब तो सपा सरकार ने इसे झूठ बता खारिज कर दिया था। लेकिन अब मानवाधिकार आयोग की मुहर लग जाने के बाद भाजपा पश्चिम यूपी में ध्रुवीकरण के लिए इसका जमकर इस्तेमाल कर सकती है।

कानून-व्यवस्था बहाल हो ताकि पलायन न हो...

human rights commission report over kairana issue.
demo pic - फोटो : अमर उजाला

कैराना में परिवारों के पलायन की शिकायतों की जांच कर रही मानवाधिकार आयोग की टीम ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि कानून व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए काम किया जाए ताकि लोग पलायन न करें।

यही नहीं यह भी सिफारिश की कि यूपी सरकार उच्चस्तरीय कमेटी बनाए जो कैराना छोड़कर गए परिवारों से मिले और उनकी शिकायतें सुनकर उन पर एक्शन ले। संभव हो तो परिवारों को लौटाने का प्रयास किया जाए। कैराना मामले की जांच में क्या तथ्य सामने आए और क्या सिफारिशें की गईं, पेश है रिपोर्ट...

ऐसे की जांच
आयोग ने आरोपों को गंभीर मानते हुए 10 जून 2016 को मुख्य सचिव व डीजीपी को चार सप्ताह में जवाब देने को कहा था। साथ ही आयोग के डीआईजी ने डिप्टी एसपी रवि सिंह, महिला इंस्पेक्टर सुमन कुमारी, इंस्पेक्टर सरोज तिवारी और अरुण कुमार को कैराना भेज कर जांच करवाई।

टीम ने पीड़ितों, चश्मदीदों, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से बात की। कैराना के सांसद हुकुम ‌सिंह के निजी सचिव से ऐसे 346 परिवारों की लिस्‍अ ली गई जो कैराना से पलायन कर चुके थे। इस लिस्ट में छह परिवारों का वेरिफिकेशन किया गया। देहरादून व सूरत जा चुके चार परिवारों से फोन पर बात की गई।

दुराचार से लेकर वसूली के लिए हत्या तक सबकुछ

human rights commission report over kairana issue.
कैराना गांव

1. दुराचार व हत्या का आरोप
जांच टीम ने आयोग को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि यह मामला सही था। महिला का चार अप्रैल 2016 को कुर्बान, मोहसिन व अन्य ने अपहरण किया। पति ने पांच अप्रैल को कैराना थाने में रिपोर्ट दी लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई, न ही महिला को तलाश किया। सात अप्रैल को मोबाई गांव में यमुना घाट पर महिला का शव मिला। इसके बाद पुलिस ने पांच अप्रैल की शिकायत पर अपहरण व हत्या की एफआईआर दर्ज की।

2. लड़कियों पर फब्तियां
जांच टीम ने कहा कि विभिन्न मामलों में 24 चश्मदीदों ने बताया कि कैराना में बहुसंख्यक समुदाय के लड़के एक खास समुदाय की लड़कियों पर फब्तियां कसते हैं। इस नाते इन लड़कियों ने घर से बाहर निकलना कम कर दिया है।

3. पलायन
टीम ने दावा किया है कि पलायन कर गए कई परिवारों ने अपराधों को अपने पलायन की एक वजह बताया।

4. वसूली के लिए हत्या
टीम ने पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि मारे गए शंकर और राजेंद्र ने वसूली के लिए धमकी की शिकायत पुलिस से की थी। उन्होंने अपराधी तत्व मुकीम काला को आरोपी बताया था। चार अन्य कारोबारियों ने भी वसूली की शिकायत की थी। मुकीम काला पर विभिन्न अपराधों के 47 मामले दर्ज हैं।

ये भी लगे आरोप

human rights commission report over kairana issue.

5. पेट्रोल पंप बंद कराया
आयोग की टीम ने कैराना में 8-10 साल पहले हिंदुस्तान पेट्रोलियम व इंडियन आयल के पेट्रोल पंप बंद होने की बात कही। इसकी वजह अपराधियों के बिना पैसा दिए पेट्रोल भरवाना और कर्मचारियों को धमकाना बताया गया।

6. कैराना आ गए 25 से 30 हजार मुस्लिम
टीम ने कहा, 2013 में 25 से 30 हजार मुस्लिम नागरिक मुजफ्फरनगर से कैराना आ गए। इससे यहां की डेमोग्राफी बदल गई। मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक हो गया। टीम ने चश्मदीदों के हवाले से कहा कि 2013 के बाद कैराना की कानून व्यवस्था बिगड़ी है।

आयोग ने ये दी सिफारिशें व मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

human rights commission report over kairana issue.

आयोग ने अपनी सिफारिशें मुख्य सचिव व डीजीपी को भेजते हुए आठ सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। ये सिफारिशें हैं :

1. मारे गए कारोबारियों की विधवाओं को चार लाख रुपये देने का प्रस्ताव शामली के डीएम ने किया था, उसका स्टेटस बताएं।

2. कैराना में कम से कम एक पेट्रोल पंप खुलवाया जाए और उसे पूरी सुरक्षा दी जाए ताकि सामान्य जनजीवन सुचारु हो सके।

3. सहारनपुर के आयुक्त और शामली के डीएम धार्मिक नेताओं और राजनेताओं के साथ बैठकें  करें और तहसील से लेकर मोहल्ला स्तर पर होने वाले विवाद सुलझाएं।

4. यूपी सरकार उच्चस्तरीय कमेटी बनाए जो कैराना छोड़कर गए परिवारों से मिले और उनकी शिकायतें सुनकर उन पर एक्शन ले। संभव हो तो परिवारों को लौटाने का प्रयास करे।

5. दुराचार व हत्याकांड में एफआईआर दर्ज करने में देरी पर कैराना पुलिस स्टेशन के एसओ व एसआई एमएस गिल और जांच अधिकारी एसआई ऋषि पाल पर विभागीय जांच हो।

6. घटना की सीबीसीआईडी जांच हो।

7. अपराधी मुकीम काला पर केस चले। उसके सहयोगी फखरुद्दीन व अन्य पर कार्रवाई हो ताकि उनके डर के बिना गवाही करवाई जाए।

8. लोगों का कानून व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए काम किया जाए ताकि लोग पलायन न करें।

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