मुंबई के भिंडी बाजार इमारत हादसे में लखनऊ के एक परिवार के चार लोगों की मौत
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मुंबई के भिंडी बाजार में बिल्डिंग ढहने से लखनऊ के ठाकुरगंज मंजू टंडन ढाल के रहने वाले एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में जाफर, उनकी पत्नी रेशमा, बेटा जमा व बेटी फातिमा हुसैन शामिल हैं।
ठाकुरगंज मंजू टंडन ढाल निवासी ईरान का न्यूज चैनल सहर के संवाददाता सरवर हुसैन ने बताया कि उनका भाई जाफर हुसैन मुंबई में एसी का कॉन्ट्रैक्टर था। वे अपनी पत्नी रेशमा, बेटे जमा व बेटी फातिमा के साथ भिंडी बाजार के इमारत में ही रहते थे।
सुबह सात बजे हादसे की खबर के बाद भाई जाफर से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन संपर्क न होने से वे सीधे मुंबई आए यहां उन्हें उनके भाई व उसके परिवार की लाश मिली। उन्होंने बताया कि वे तीन भाई हैं दो भाई मुंबई और वे लखनऊ में रहते हैं। जबकि वे शाहगंज जौनपुर के रहने वाले हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों जाफर व उनका परिवार एक शादी के सिलसिले में लखनऊ आया और काफी दिन रहने के बाद यहां से गए। अक्सर वे परिवार के साथ लखनऊ आते थे। उन्होंने बताया कि अभी मोहर्रम में भी लखनऊ आने और शाहगंज जौनपुर जाने की प्लानिंग चल रही थी लेकिन यह दुखद हादसा हो गया।
पांच मंजिली इमारत गिरी, 22 की मौत
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में दो दिन से जारी भारी बारिश मौत बनकर आई। बारिश की चपेट में आने से बृहस्पतिवार को दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार इलाके में एक पांच मंजिली रिहाइशी इमारत ढह गई। इस हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मलबे में करीब 30 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है।
भिंडी बाजार में पाकमोडिया स्ट्रीट स्थित हुसैनी इमारत करीब सुबह साढे़ आठ बजे गिरी। जब तक लोग कुछ समझ पाते तब तक एक दर्जनभर परिवार मलबे में दब चुके थे। चीख-पुकार के बीच स्थानीय लोग जमा हो गए। करीब 8.40 बजे फायर ब्रिगेड के 125 सदस्यीय राहत-बचाव टीम और एनडीआरएफ के 95 जवान मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालना शुरू कर दिया।
बचाव के दौरान दो दमकलकर्मी भी घायल हो गए। इमारत तीन मंजिला थी जबकि ऊपर की दो मंजिल अवैध तरीके से बनाई गई थी। इस इमारत में करीब 12 फ्लैट थे और भूतल पर 12 कमरे और छह गोदाम बने हुए थे जिसमें 10 से 12 परिवार रह रहे थे। इमारत करीब सौ साल पुरानी बताई गई है। जो जर्जर अवस्था में थी। इसके बगल की तीन इमारतों को पहले ही गिरा दिया गया था। लेकिन, इसे छोड़ दिया गया था।
बच गए प्ले स्कूल के बच्चे
हुसैनी इमारत की पहली मंजिल पर एक प्ले स्कूल भी था जिसमें करीब 35 छोटे बच्चे पढ़ने आते थे। बच्चे नौ बजे प्ले स्कूल में पढ़ने आने वाले थे लेकिन, उससे पहले ही इमारत ढह गई।