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अक्षय तृतीया 29 को, जानें क्या हैं खरीदारी के शुभ मुहूर्त
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 19 Apr 2017 03:41 PM IST
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तिथि संशय के बीच अक्षय तृतीया 29 अप्रैल को मनाई जाएगी, जबकि भगवान परशुराम जयंती मध्याह्न योग के चलते 28 अप्रैल को ही मनाना श्रेयस्कर है। अक्षय तृतीया की शॉपिंग के लिए शनिवार को ही सुबह से दोपहर तक तमाम उत्तम मुहूर्त हैं। आचार्य प्रदीप ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर 12:59 बजे से तृतीया का मान शुरू हो जाएगा, जो शनिवार को सुबह 10:32 बजे तक रहेगा।
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चूंकि भगवान परशुराम की जयंती मध्याह्न और तृतीया में मनाए जाने की परंपरा है, इसीलिए जयंती शुक्रवार को मनाना ही श्रेयस्कर रहेगी जबकि शनिवार को उदया से ही तृतीया का मान मिलने से इसी दिन अक्षय तृतीया भी मानी जाएगी। अक्षय तृतीया पर वैवाहिक और शॉपिंग के बम्पर मुहूर्त सुबह से मिल रहे हैं। आलमबाग में सामूहिक यज्ञापवीत के भी आयोजन होंगे।
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आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया शनिवार को होने के चलते आभूषण, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात, जमीन, खेत, प्रॉपर्टी, मकान, कार, बाइक, इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीदने के के कई शुभ मुहूर्त हैं, लेकिन लौह चालित उपकरणों, आइटम खरीदने में सावधानी बरतनी होगी।
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खरीदारी के शुभ मुहूर्त
- सुबह 6:19 बजे से 8:10 बजे तक
- दोपहर 12:49 बजे से 3:03 बजे तक उत्तम
- टीवी, फ्रिज, एसी, एलईडी, मोबाइल टीवी समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी खरीदना शुभ रहेगा।
जानें, कैसे करें पूजन
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- फोटो : demo pic
भविष्य पुराण के मुताबिक, अक्षय तृतीया को पुण्य तिथि भी कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान विशेष फल देता है। सुबह स्नान के बाद भगवान नारायण की पूजा-अर्चना के बाद जल से भरा घटदान-कुंभदान करना चाहिए। साथ में मौसमी फल, सफेद मिष्ठान्न और भी अच्छा रहेगा।
संकल्पित दान भी करना चाहिए। अक्षय तृतीया को सौभाग्य दिवस भी कहा जाता है। इस दिन परिवार की महिलाएं विशेष व्रत व पूजा से परिवार में सिद्धि लाती हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार इसे लक्ष्मी सिद्धि दिवस भी कहते हैं।
माना जाता है कि द्वापर में वैशाख शुक्ल तृतीया को जब भगवान परशुराम का अवतार हुआ तब छह ग्रह उच्च राशि में थे। भगवान परशुराम के अवतार के समय पुनर्वसु नक्षत्र था।
आचार्य ने बताया कि इसी दिन ब्राह्मण श्रेष्ठ भगवान परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी, जिनका गोत्र जमदग्नि हो, वे विशेष आराधना करें। अक्षय तृतीया को ईश्वरीय तिथि माना गया है।
मान्यता है कि इसी दिन से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। इसीलिए इसे युगाब्दि तृतीया भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, धर्म का पुण्य कभी भी नष्ट नहीं होता। किसी भी वस्तु का नाश न हो इसलिए अक्षय तृतीया मनाई जाती है।
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के परशुराम अवतार का जन्म हुआ था। अक्षय तृतीया ही वो शुभ घड़ी थी जब भगवान नर नारायण और भगवान विष्णु का हयग्रीव अवतार हुआ।
परंपराओं के अनुसार, चार धामों में से एक श्री बद्रीनारायण के पट इसी दिन ही खुलते हैं। वृंदावन में बांके बिहारी के चरणों के दर्शन भी साल में एक बार इसी दिन ही होते हैं।
संकल्पित दान भी करना चाहिए। अक्षय तृतीया को सौभाग्य दिवस भी कहा जाता है। इस दिन परिवार की महिलाएं विशेष व्रत व पूजा से परिवार में सिद्धि लाती हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार इसे लक्ष्मी सिद्धि दिवस भी कहते हैं।
माना जाता है कि द्वापर में वैशाख शुक्ल तृतीया को जब भगवान परशुराम का अवतार हुआ तब छह ग्रह उच्च राशि में थे। भगवान परशुराम के अवतार के समय पुनर्वसु नक्षत्र था।
आचार्य ने बताया कि इसी दिन ब्राह्मण श्रेष्ठ भगवान परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी, जिनका गोत्र जमदग्नि हो, वे विशेष आराधना करें। अक्षय तृतीया को ईश्वरीय तिथि माना गया है।
मान्यता है कि इसी दिन से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। इसीलिए इसे युगाब्दि तृतीया भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, धर्म का पुण्य कभी भी नष्ट नहीं होता। किसी भी वस्तु का नाश न हो इसलिए अक्षय तृतीया मनाई जाती है।
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के परशुराम अवतार का जन्म हुआ था। अक्षय तृतीया ही वो शुभ घड़ी थी जब भगवान नर नारायण और भगवान विष्णु का हयग्रीव अवतार हुआ।
परंपराओं के अनुसार, चार धामों में से एक श्री बद्रीनारायण के पट इसी दिन ही खुलते हैं। वृंदावन में बांके बिहारी के चरणों के दर्शन भी साल में एक बार इसी दिन ही होते हैं।