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काम का तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे मिलेगा दिमाग को रिलेक्स

Sat, 11 Nov 2017 09:02 AM IST
amarujala.com, Presented by: आनंद
amarujala.com, Presented by: आनंद Updated Sat, 11 Nov 2017 09:02 AM IST
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Natural environment can far away stress
प्राकृतिक वातावरण में कुछ समय बिताने से दिमाग अधिक सक्रिय होकर काम करता है। सोच बेहतर होती है और तनाव दूर होता है। काम का तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी। नतीजा, आलस और थकान। लाख उपाय करने के बाद भी अगर इस समस्या से नहीं उबर पा रहे हैं, तो प्रकृति की शरण में जाइए लाभ ही लाभ होगा। 
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शोध क्या कहता है 

अमेरिका की ओरेजॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 4400 लोगों की पूर्ण खुशहाली और प्राकृतिक वातावरण में रहने का अध्ययन किया गया। शोध के मुताबिक, जो लोग हरियाली से भरपूर वातावरण में रहते हैं, घर के बाहर प्रकृति के बीच समय बिताते हैं। वह तनावग्रस्त नहीं होते। इतना ही नहीं, इससे उनकी सोचने-समझने की शक्ति भी विकसित होती है और अपने ऊपर भरोसा भी बढ़ता है।
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शोधकर्ता बीडेनवेग के अनुसार, खुशहाल जिंदगी पर वातावरण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। प्रकृति के बीच समय बिताने से तनाव, आलस और मन न लगने की समस्या दूर हो जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर आलसी और कम ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं, तो पेड़ों के बीच थोड़ी सी चहलकदमी इससे उबारने में मददगार होगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रकृति के बीच वक्त बिताने से जिंदगी खुशहाल होती है।
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गैजेट्स से दूरी जरूरी

Natural environment can far away stress
यूएस की यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह का शोध कहता है कि इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स से बढ़ती नजदीक तनाव, उदासी, अकेलेपन, आलस, काम में मन न लगने का बड़ा कारण है। अगर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूरी बनाकर प्रकृति के बीच समय बिताने से दिमाग को तरोताजा होने का मौका मिल जाता है। इससे दिमाग तेज भी होता है व रचनात्मकता में भी इजाफा होता है।

प्रकृति के बीच समय बिताएंगे, तो दिमाग अधिक सक्रिय होकर काम करेगा। शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में ज्‍यादा से ज्‍यादा समय बिताने की सलाह देते हैं। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि हरे-भरे पहाड़, जंगल और नदियां जहां आंखों को सुकून देती हैं, वहीं दिमाग को भी तरोताजा करती हैं।

दिमाग अगर किसी खास परेशानी में डूबा है या किसी सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है, तो सबसे अच्‍छा तरीका है कि अपने गैजेट्स से छुट्टी लेकर कुछ दिन के लिए प्रकृति की गोद में चले जाइए। 

बढ़ती है सक्रियता

Natural environment can far away stress
प्रकृति की यह सैर दिमाग के सोचने-समझने की क्षमता में 50 फीसदी तक का इजाफा करती है। लगातार काम करते रहने से दिमाग काफी थक जाता है और इसके बाद इस तरह का माहौल उसके काम करने की क्षमता में इजाफा करता है। 

पानी के किनारे या बरसात में नंगे पैर टहलना, कम गहरे पानी में बिना जूतों के चलना सभी को अच्छा लगता है। इससे हम अपने आप को उत्साहित महसूस करते हैं। इसका कारण यह है कि पैरों के तले में नसों का एक गहन तंत्र होता है और एक्यूप्रेशर के कई बिंदु होते हैं, जो पृथ्वी के स्वतंत्र इलेक्ट्रोनों को बटोरते हैं।

यह हमें स्वस्थ बनाते हैं । कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का शोध कहता है कि हरी घास पर कुछ देर चलने से मानसिक अवसाद में 62 फीसदी कमी देखी गई है।प्रकृति जहां सेहत को दुरुस्‍त रखती है, वहीं यह हमारे व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होती है। 
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