नोट बैन से आतंकी मंसूबों की टूटी कमर, आतंकी संगठनों के आकाओं में खलबली
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केंद्र सरकार की नई व्यवस्था ने घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों और सीमा पार से फंडिंग कर रहे उनके आकाओं की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सरकार के नए कदम से फंडिंग रुक जाएगी। इससे आतंकी गतिविधियों में ठहराव आने के साथ ही कश्मीर हिंसा पर भी इसका असर पड़ेगा।
एनआईए भी यहां आतंकी संगठनों को फंडिंग मामले में कम से कम आधा दर्जन मुकदमे दर्ज कर जांच कर रही है। घाटी में आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान की ओर से फंडिंग किए जाने की लगातार पुख्ता जानकारी मिलती रही है।
एनआईए ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि हिजबुल कमांडर सैयद सलाहुद्दीन सहित कई भगोड़े हैं। हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में भड़की हिंसा के दौरान एनआईए ने विदेशों से फंडिंग मामले में कई अलगाववादी नेताओं से पूछताछ करने के साथ ही उनके बैंक खाते भी खंगाले थे। ऐसे 50 से अधिक बैंक खाते निशाने पर बताए जाते हैं।
पत्थरबाजी कराने के इस्तेमाल होता था धन
लश्कर, हिजबुल तथा जैश के आतंकियों के साथ ही इनके मददगारों तक फंडिंग की जाती रही है। घाटी तथा एलओसी पर सक्रिय इन आतंकी संगठनों के ओवर ग्राउंड वर्करों और गाइडों को मदद के एवज में पैसे पहुंचाए जाते रहे हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
पिछले दिनों रियासी में एक महिला ओवर ग्राउंड वर्कर को पांच लाख रुपये के साथ गिरफ्तार भी किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के पास इस बात के भी इनपुट रहे हैं कि घाटी में पत्थरबाजी के लिए युवाओं को पैसे दिए जाते हैं। हाल में कश्मीर हिंसा के दौरान भी इस बात के सबूत मिले थे।
'रियासत को मिलेगा सबसे अधिक लाभ'
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 के वर्तमान में प्रचलित नोटों को निष्प्रभावी करते हुए इन्हें बैन कर दिया है। सरकार द्वारा 500 और 1000 की जारी मुद्राओं को 11 नवंबर तक बैंकों में जमा करने का विकल्प दिया गया है। सरकार के निर्णय के बाद से ही गुरूवार को देश भर के बैंकों में इन नोटों को बदलने के लिए लाइन लगी हुई है।