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डोभाल फार्मूला: नापाक फंड केस में फंसे अलगाववादी और आतंकियों के अंत में जुटी सेना

Fri, 04 Aug 2017 12:10 AM IST
श्रेयांश त्रिपाठी,अमर उजाला/जम्मू
श्रेयांश त्रिपाठी,अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 04 Aug 2017 12:10 AM IST
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narendra modi followed a planned technique to solve kashmir
AJIt Doval - फोटो : file photo

कश्मीर में हाल के दिनों में जारी तमाम कार्रवाई एक बार फिर घाटी के एक नए भविष्य की दिशा के लिए उठाए गए कदमों की एक श्रृंखला से बन गए हैं। कश्मीर में सेना और केंद्रीय एजेंसियां जिस तरह से काम कर रही हैं वो सिर्फ रूटीन कार्रवाई नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पीएम मोदी के एक संयुक्त प्लान का हिस्सा है। 

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दरअसल पिछले साल हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हुई हिंसा के बाद केंद्र की तमाम सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कश्मीर में एक सधी रणनीति के अंतर्गत काम करने की योजना बनाई गई थी। इस योजना में न सिर्फ कश्मीर में आतंक का अंत शामिल था बल्कि उन तंजीमों को भी सबक सिखाने की तैयारी थी जिनकी शह पर घाटी में हिंसा एक व्यवसाय का तरीका बन गई थी।
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इस पूरी कार्ययोजना का उद्देश्य कश्मीर के हालातों को बदलना है साथ ही इसके सामूहिक और सर्वांगीण विकास का भविष्य सुनिश्चित करना भी। इस योजना के चाणक्य के तौर पर काम कर रहें है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल जिन्होंने आतंक और अलगाववाद के एक साथ अंत का खाका बना रखा है।  

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घाटी में इंटेलिजेंस विंग और काउंटर ऑपरेशन ने आतंक का अंत

narendra modi followed a planned technique to solve kashmir
Indian Army - फोटो : डेमो फोटो

कश्मीर में सरकार, सेना और केंद्रीय एजेंसियां एक संयुक्त रणनीति पर काम कर रही हैं। इस क्रम में एक तरफ कश्मीर में आतंकियों की गतिविधियों की जानकारी के लिए खुफिया तंत्र को सक्रिय किया गया है वहीं दूसरी ओर काउंटरइंसरजेंसी के ऑपरेशनों की ताबड़तोड़ शुरूआत भी की गई है। 

कश्मीर में निजाम बदलने के साथ ही एक नए तरीके की रणनीति बनाई गई है। सरकार ने कश्मीर में सेना और एसओजी को पूरी ऐच्छिक कार्रवाई करने की छूट दी है। सुरक्षाबलों को कोई नुकसान ना हो इसलिए राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट को ऑपरेशन को लांग रन ड्यूरेशन यानि कि देर तक चलाकर लेकिन प्रभावी रूप से खत्म करने के निर्देश हैं। इसके साथ ही आतंकियों के ठिकानों को रॉकेट लांचर की मदद से नष्ट करने की भी छूट दी गई है। ऑपरेशनों में पैरा कमांडो का भी इस्तेमाल इसी दिशा में एक कदम है। 

इसके साथ ही सेना ने कई साइबर एक्सपर्ट्स और हैकर्स को भी अपनी सर्विलांस टीम का हिस्सा बनाया है जिससे कि हाइटेक स्मार्ट फोन्स के जरिए आतंकियों की तमाम तंजीमों और उनके सदस्यों की लोकेशन को ट्रेस करने में आसानी मिल सके। 

केस में फंसे अलगाववादियों ने आतंकियों से सहानूभूति छोड़ी

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KASHMIR SEPARATISTS - फोटो : File Photo

इन सब के बीच कश्मीर में तमाम आतंकियों के मंसूबों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। सेना ने बकायदा एक लिस्ट बनाकर आतंकियों को ढेर करने का काम शुरू किया तो इसके परिणाम भी दिखने लगे। 

अनंतनाग के हमले से लेकर कश्मीर में सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने वाले तमाम आतंकियों को कुछ दिनों के भीतर ही घुसकर मार गिराया गया। इस सैन्य कार्रवाई के बीच उन अलगाववादियों पर भी शिकंजा कसा जाने लगा जिन्होंने कश्मीर में आतंकियों के मारे जाने पर हिंसा को प्रायोजित किया था। 

बुरहान की मौत पर हिंसा को पोषने वाले अलगाववादियों के घर छापेमारी में आतंकियों से सांठगांठ के कागज मिले तो कई देशों में खरबों की संपत्ति के सबूत भी। प्रवर्तन निदेशालय से लेकर एनआईए तक के नोटिसों के बाद अब अलगाववादियों को अदालत, कानून और सजा का खौफ सताने लगा है, लिहाजा बदलते समीकरणों में अब किसी भी अलगाववादी का आतंकियों से सहानूभूति दिखाने वाला बयान नहीं दिखता है। सरकार की योजना का असर दिखने लगा है, भले ही इसके परिणाम दूरगामी हों लेकिन ये जरूर है कि डोभाल का प्लान कश्मीर के एक नए कल का जन्मदाता बनने की राह प्रशस्त कर सकता है।  

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