पता नहीं ये आंखें अब कोई मंजर देख भी पाएंगीं या नहीं
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कश्मीर की हिंसा में जिन घरों के चिराग बुझ गए हैं उनके दर्द का तो कोई पारावार ही नहीं है। आतंकी बुरहान की मौत पर भड़की हिंसा में घाटी में दो हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। लेकिन सवा सौ से ज्यादा ऐसे युवा भी हैं जिनकी आंखों में इस हिंसा के दौरान पेलेट गन से गहरे ज़ख्म लगे हैं।
किसी को नहीं पता कि ये आंखें भविष्य में किसी भी तरह का कोई मंजर देख भी पाएंगी या नहीं। डाक्टरों के अनुसार इन्हें गंभीर चोटें हैं जिनके चलते यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में देख भी पाएंगे या नहीं। इनमें कुछ तो ऐसे भी जिनका हिंसक प्रदर्शनों से कोई लेना-देना ही नहीं था।
श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल (एसएमएचएस) के वार्ड नंबर 7 और 8 में इन मरीजों का इलाज चल रहा है। इनका इलाज कर रहे नेत्र विशेषज्ञ डा. सज्जाद खांडे के अनुसार उनके पास करीब 125 घायल ऐसे पहुंचे हैं जिन्हें आंखों में पेलेट इंजुरी है।
सवा सौ से ज्यादा युवाओं की आंखें पेलेट गन की फायरिंग से ज़ख्मी
इनमें से अब तक 90 का आपरेशन किया जा चुका है। अन्य घायलों का इलाज चल रहा है। जरूरत पड़ने पर उनका भी आपरेशन किया जाएगा। ऐसे ही एक मरीज पुलवामा के खालिद ने बताया कि इलाके में प्रदर्शन चल रहे थे। युवा सड़कों पर उतर आए। इसी दौरान पुलिस ने सीधा निशाना साधते हुए पेलेट गन का इस्तेमाल किया।
10 वर्षीय तमन्ना के अनुसार उसके इलाके में प्रदर्शन चल रहा था और वह अपने मकान की खिड़की से तमाशा देख रही थी कि अचानक से गोलीबारी शुरू हुई। इस बीच अचानक उसकी बाईं आंख में कुछ आकर लगा और वह गिर पड़ी।
पेलेट गन के प्रयोग पर पहले से ही एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाबंदी लगाने की वकालत की थी। राज्य पुलिस ने इसे गैर घातक बताते हुए प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए जाने को आखिरी रास्ता बताया था। 2014 के चुनाव घोषणापत्र में पीडीपी ने इसका प्रयोग बंद किए जाने पर भी वोट मांगा था।