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कश्मीर में आतंकी संगठनों ने की 245 कश्मीरी युवकों की भर्ती
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 22 Mar 2017 10:49 AM IST
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आतंकवादी
- फोटो : Demo Pic.
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कश्मीर युवकों को आतंकी संगठनों के बहकावे में नहीं आने से रोकने के लिए रियासत सरकार द्वारा शुरू की गई काउंसलिंग बेअसर साबित हो रही है।
हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए मोहम्मद और लश्कर-ए तैयबा ने शिक्षित कश्मीरी युवकों की भर्ती के लिए मुहिम तेज कर दी है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद दक्षिणी कश्मीर से सबसे अधिक 88 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं।
पाकिस्तान से घुसपैठ कर आने वाले आतंकियों के अलावा स्थानीय आतंकियों ने सुरक्षा बलों के लिए नई चुनौतियां खड़ीं की हैं। कश्मीर की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव और उसके ठीक प्रस्तावित पंचायत चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने स्थानीय आतंकियों के सफाए के लिए अभियान तेज कर दिया है।
गृह मंत्रालय के दस्तावेज भी 245 स्थानीय युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती की पुष्टि करते हैं। दस्तावेजों के अनुसार छह साल में 245 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में भर्ती हुए हैं जबकि सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की जुलाई में मौत के बाद 200 से अधिक स्थानीय युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। सरकार इस संख्या को 88 बताती है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार पिछले सात साल में यह सबसे बड़ी भर्ती है।
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हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए मोहम्मद और लश्कर-ए तैयबा ने शिक्षित कश्मीरी युवकों की भर्ती के लिए मुहिम तेज कर दी है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद दक्षिणी कश्मीर से सबसे अधिक 88 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं।
पाकिस्तान से घुसपैठ कर आने वाले आतंकियों के अलावा स्थानीय आतंकियों ने सुरक्षा बलों के लिए नई चुनौतियां खड़ीं की हैं। कश्मीर की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव और उसके ठीक प्रस्तावित पंचायत चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने स्थानीय आतंकियों के सफाए के लिए अभियान तेज कर दिया है।
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गृह मंत्रालय के दस्तावेज भी 245 स्थानीय युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती की पुष्टि करते हैं। दस्तावेजों के अनुसार छह साल में 245 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में भर्ती हुए हैं जबकि सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की जुलाई में मौत के बाद 200 से अधिक स्थानीय युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। सरकार इस संख्या को 88 बताती है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार पिछले सात साल में यह सबसे बड़ी भर्ती है।
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13 साल में सिर्फ 219 ने किया आत्मसमर्पण
आतंकी
- फोटो : Demo Pic.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भटके युवकों की घर वापसी पर नरमी बरतने और काउंसलिंग से विकास की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए अभियान शुरू किया है। इसके तहत अभिभावकों की भी मदद ली जा रही है लेकिन अभियान में सिर्फ पत्थरबाज और उपद्रव के आरोपियों के ही कुछ मामलों में सीमित सफलता मिली है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आम लोगों के साथ बैठकें शुरू की हैं। कश्मीर हिंसा के क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दस हजार कश्मीरी युवकों की एसपीओ के रूप में भर्ती का एलान किया था। अब आतंकी संगठन कश्मीर युवकों को सेना, सुरक्षा बल और पुलिस में भर्ती नहीं होने के लिए चेतावनी भरे पोस्टर चिपका रहे हैं। इस कारण सरकारी अभियान पर असर पड़ा है।
जम्मू-कश्मीर में 13 साल में सिर्फ 219 आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया है। रियासत सरकार ने 31 जनवरी 2004 को आतंकियों के आत्मसमर्पण के लिए नीति लागू की थी। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों को सुविधां और रियायतें दी जाती हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आम लोगों के साथ बैठकें शुरू की हैं। कश्मीर हिंसा के क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दस हजार कश्मीरी युवकों की एसपीओ के रूप में भर्ती का एलान किया था। अब आतंकी संगठन कश्मीर युवकों को सेना, सुरक्षा बल और पुलिस में भर्ती नहीं होने के लिए चेतावनी भरे पोस्टर चिपका रहे हैं। इस कारण सरकारी अभियान पर असर पड़ा है।
जम्मू-कश्मीर में 13 साल में सिर्फ 219 आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया है। रियासत सरकार ने 31 जनवरी 2004 को आतंकियों के आत्मसमर्पण के लिए नीति लागू की थी। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों को सुविधां और रियायतें दी जाती हैं।