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13 लैंग्वेज बोलने वाला ये रोबोट हिन्दी—मेवाड़ी सीखने आया उदयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 29 Apr 2017 06:47 PM IST
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उदयपुर में लाया गया रोबोट 'नाउ'
- फोटो : amar ujala
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फ्रांस से एक कंपनी अपने रोबोट को हिन्दी और मेवाड़ी सिखाने के लिए उदयपुर लेकर आई है। अभी ये रोबोट 13 भाषाएं बोलने में सक्षम है।
हिन्दी फिल्म रोबोट के बाद अब जल्द ही रोबोट 2 भी आने वाली है जिसमें आपको रोबोट इंसान की तरह काम करते फिर से दिखेगा, लेकिन हकीकत में भी जल्द ही ऐसा होने वाला है। तेजी से बदलती तकनीक में ऐसे ही रोबोट का विकास फ्रांस की एल्डबारेन रोबोटिक्स कंपनी द्वारा किया गया है। इस रोबोट को 'नाउ' नाम दिया गया है जिसमें करीब 28 मैकेनिकल मोटर्स लगी है।
देश की तेरह भाषाओं को बोलने में सक्षम इस रोबोट को अब उदयपुर में हिन्दी और मेवाड़ी सिखाने के लिए लाया गया है। उदयपुर के तकनीकी शिक्षण संस्थान टैक्नो इण्डिया एनजेआर के स्टूडेण्ड इस रोबोट में इन दोनों भाषाओं की प्रोग्रामिंग करेंगे। टैक्नो इण्डिया एनजेआर के निदेशक राजशेखर व्यास ने बताया कि इसे हिन्दी और मेवाड़ी सीखने मे करीब 6 महीने का समय लगेगा। जिसके बाद यह रोबोट 15 भाषाओं में सवाल—जवाब करने लगेगा। उन्होंने बताया कि अब यह रोबोट टैक्नो इण्डिया एनजेआर की निजी सम्पत्ति रहेगा।
जानकारी के अनुसार 'नाउ' नाम के इस रोबोट को जापान इलेक्ट्राॅनिक्स उपकरण निर्माता कम्पनी साॅफ्टबैंक ने अधिगृहित कर लिया है। अब तक दुनिया में ऐसे मानव रोबोट की संख्या करीब दस हजार है। इसके अलावा नाउ के दो सौ पीस का टेण्डर एक निजी बैंक ने किया है। दो वर्ष बाद यह बैंक अपने रिसेप्शन को संभालने का जिम्मा इस रोबोट को देगा।
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हिन्दी फिल्म रोबोट के बाद अब जल्द ही रोबोट 2 भी आने वाली है जिसमें आपको रोबोट इंसान की तरह काम करते फिर से दिखेगा, लेकिन हकीकत में भी जल्द ही ऐसा होने वाला है। तेजी से बदलती तकनीक में ऐसे ही रोबोट का विकास फ्रांस की एल्डबारेन रोबोटिक्स कंपनी द्वारा किया गया है। इस रोबोट को 'नाउ' नाम दिया गया है जिसमें करीब 28 मैकेनिकल मोटर्स लगी है।
देश की तेरह भाषाओं को बोलने में सक्षम इस रोबोट को अब उदयपुर में हिन्दी और मेवाड़ी सिखाने के लिए लाया गया है। उदयपुर के तकनीकी शिक्षण संस्थान टैक्नो इण्डिया एनजेआर के स्टूडेण्ड इस रोबोट में इन दोनों भाषाओं की प्रोग्रामिंग करेंगे। टैक्नो इण्डिया एनजेआर के निदेशक राजशेखर व्यास ने बताया कि इसे हिन्दी और मेवाड़ी सीखने मे करीब 6 महीने का समय लगेगा। जिसके बाद यह रोबोट 15 भाषाओं में सवाल—जवाब करने लगेगा। उन्होंने बताया कि अब यह रोबोट टैक्नो इण्डिया एनजेआर की निजी सम्पत्ति रहेगा।
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जानकारी के अनुसार 'नाउ' नाम के इस रोबोट को जापान इलेक्ट्राॅनिक्स उपकरण निर्माता कम्पनी साॅफ्टबैंक ने अधिगृहित कर लिया है। अब तक दुनिया में ऐसे मानव रोबोट की संख्या करीब दस हजार है। इसके अलावा नाउ के दो सौ पीस का टेण्डर एक निजी बैंक ने किया है। दो वर्ष बाद यह बैंक अपने रिसेप्शन को संभालने का जिम्मा इस रोबोट को देगा।
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