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जाट आरक्षणः 'राजा साब' के 'हुकुम' पर बाजार बंद, सड़कें सूनीं
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:16 PM IST
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भरतपुर बंद का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
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भरतपुर जाट आंदोलन का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों पर देखने को मिल रहा है, जहां संघर्ष समिति के संरक्षक और राजा साब के नाम से विख्यात विश्ववेंद्र सिंह का प्रभुत्व है। दरअसल विश्वेंद्र सिंह भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं।
भरतपुर, डीग, कुम्हेर आदि इलाकों में जाट आंदोलन का पूरा असर देखने को मिला। बाजार, स्कूल, संस्थान सब बंद रहे। सड़कें सूनी रहीं, दुकानों के शटर शुक्रवार को खुले ही नहीं। कुल मिलाकर भरतपुर और आस पास के इलाकों में कांग्रेस विधायक और पूर्व राजपरिवार सदस्य विश्वेंद्र सिंह की बात को पूरा सम्मान दिया जा रहा है। कुछ जगहों पर आंदोलनकारियों ने उग्र रूप भी दिखाया।
जाट समाज से संबंधित ही नहीं बल्कि दूसरे समुदाय और जातियों के लोगों ने जाट आंदोलन के लिए अपने बाजार बंद रखे। संस्थान-प्रतिष्ठान सुबह से ही बंद हैं। वहीं कुम्हेर कस्बे के भरतपुर गेट पर आंदोलनकारियों ने आग लगा दी।
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डीग कुम्हेर में तो पूरा बाजार बंद रहा। सुबह से ही दुकानें नहीं खुले। इलाके के युवा आंदोलन में हैं। शहर से लेकर कस्बों तक कुछ इसी तरह का माहौल देखने को मिल रहा है। सड़क पर न तो वाहन चल रहे हैं न ही ज्यादा लोग नजर आ रहे हैं। लोग घरों पर ही हैं।
सबसे ज्यादा सर्मथन व्यापारियों का मिल रहा है। व्यापारियों ने पूरे दिन अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले। शहर के व्यापारी हों या गांवों की छोटी दुकानें सब जगह एक सा ही नजारा देखने को मिला।
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भरतपुर, डीग, कुम्हेर आदि इलाकों में जाट आंदोलन का पूरा असर देखने को मिला। बाजार, स्कूल, संस्थान सब बंद रहे। सड़कें सूनी रहीं, दुकानों के शटर शुक्रवार को खुले ही नहीं। कुल मिलाकर भरतपुर और आस पास के इलाकों में कांग्रेस विधायक और पूर्व राजपरिवार सदस्य विश्वेंद्र सिंह की बात को पूरा सम्मान दिया जा रहा है। कुछ जगहों पर आंदोलनकारियों ने उग्र रूप भी दिखाया।
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जाट समाज से संबंधित ही नहीं बल्कि दूसरे समुदाय और जातियों के लोगों ने जाट आंदोलन के लिए अपने बाजार बंद रखे। संस्थान-प्रतिष्ठान सुबह से ही बंद हैं। वहीं कुम्हेर कस्बे के भरतपुर गेट पर आंदोलनकारियों ने आग लगा दी।
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डीग कुम्हेर में तो पूरा बाजार बंद रहा। सुबह से ही दुकानें नहीं खुले। इलाके के युवा आंदोलन में हैं। शहर से लेकर कस्बों तक कुछ इसी तरह का माहौल देखने को मिल रहा है। सड़क पर न तो वाहन चल रहे हैं न ही ज्यादा लोग नजर आ रहे हैं। लोग घरों पर ही हैं।
सबसे ज्यादा सर्मथन व्यापारियों का मिल रहा है। व्यापारियों ने पूरे दिन अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले। शहर के व्यापारी हों या गांवों की छोटी दुकानें सब जगह एक सा ही नजारा देखने को मिला।