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अजमेर ब्लास्ट केस में भावेश पटेल और देवेंद्र गुप्ता को उम्रकैद, 38 हजार का जुर्माना
amarujala.com, presented by राजन
Updated Wed, 22 Mar 2017 06:58 PM IST
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अदालत परिसर में अजमेर ब्लास्ट का आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट मामले में बुधवार को जयपुर की विशेष एनआईए कोर्ट ने अभियुक्त देवेन्द्र गुप्ता और भावेश पटेल को विधि विरूद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम की धारा 16(1)(ए) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में आरोपी देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी करार दिया था। इनमें सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। भावेश पर 23 और देवेंद्र पर 15 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
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गौरतलब है कि इस केस में स्वामी असीमानंद का नाम आने के बाद इस केस ने काफी सुर्खियां बटोरी थी, लेकिन एनआईए कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए गत 8 मार्च को बरी कर दिया था। अदालत द्वारा बुधवार को सुनाए गए आदेश में दोनों अभियुक्तों को आतंकी कार्य में शामिल मानते हुए धार्मिक भावनाएं भडकाने का दोषी माना। इसके अलावा अदालत ने भावेश गुप्ता को बम प्लांट करने और देवेन्द्र को आपराधिक षडयंत्र का भी दोषी माना है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि देवेन्द्र गुप्ता बम ब्लास्ट में सक्रिय तौर पर लिप्त रहा और घटना सुनिश्चित करने के लिए टाइमर डिवाइस के तौर पर काम आने वाली मोबाइल सिम उपलब्ध कराई।
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घटना को लेकर एटीएस ने एक और एनआईए ने तीन आरोप पत्र अदालत में पेश किए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 149 गवाहों के बयान दर्ज कराने के साथ-साथ 451 दस्तावेज पेश किए गए थे। वहीं अभियोजन पक्ष के गवाहों में से 27 गवाह पक्षद्रोही हुए।
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दरगाह परिसर में हुआ था विस्फोट
अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में आहता—ए—नूर पेड़ के पास 11 अक्टूबर 2007 को बम विस्फोट हुआ था। 11 अक्टूबर 2007 को दरगाह परिसर में हुए बम विस्फोट में तीन जायरीन मारे गए थे और पंद्रह जायरीन घायल हो गए थे। विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान एक लावारिस बैग मिला था। जिसमे टाइमर डिवाइस लगा जिंदा बम रखा था।
पिछली सुनवाई में देवेंद्र और भावेश दोनों पर 1-1 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया जा चुका है। मामले में एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या हो चुकी है और तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर फरार चल रहा है।
एनआईए ने तेरह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इनमें से आठ आरोपी साल 2010 से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। न्यायिक हिरासत में बंद आठ आरोपी स्वामी असीमानंद,हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार,भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता हैं। एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे जमानत पर है।