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मद्रास हाईकोर्ट के जज के खिलाफ महिला ने फेसबुक पर किया कमेंट, हुई जेल
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Wed, 22 Nov 2017 08:24 AM IST
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महालक्ष्मी
- फोटो : File Photo
मद्रास हाईकोर्ट के जज के खिलाफ फेसबुक पर कमेंट करने की वजह से एक महिला को जेल की हवा खानी पड़ी है। मामला वेल्लोर का है जहां पर महालक्ष्मी (40) पर आरोप है कि उसने सितंबर में मद्रास हाईकोर्ट के जज एन किरुबकरन के फैसले को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी।
महालक्ष्मी को मंगलवार को गिरफ्तार करके वेल्लोर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। वेल्लोर के एसपी पी पाकलवन ने बताया कि महिला ने जज का नाम लिखते हुए सोशल मीडिया पर कमेंट किया था।
दरअसल सितंबर में तमिलनाडु के सरकारी टीचरों की हड़ताल की आलोचना की थी। आलोचना के कुछ देर के बाद ही किरुबकरन सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे, जिसे लेकर उन्होंने ऑनलाइन मामला दर्ज कराया था।
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ये भी पढ़ेंः हाईकोर्ट ने महिला को दी बिना आधार आयकर रिटर्न भरने की इजाजत
बता दें कि तमिलनाडु में सरकारी स्कूल टीचरों ने सातवां वेतन आयोग लागू करवाने के लिए क्लासों में पढ़ाना बंद कर दिया था और हड़ताल पर उतर आए थे। इस पर किरुबरकन ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य में बच्चों के नीट (NEET) इग्जाम में सबसे कम नंबर आते हैं। सिर्फ पांच ऐसे सरकारी स्कूल हैं जिनके बच्चे मेडिकल में दाखिला ले पाएं। जो टीचर हड़ताल कर रहे हैं उन्हें ये आंकड़े देखकर शर्म करना चाहिए।
टीचरों को अपनी जिम्मेदारियां समझनी चाहिए। जो इन जिम्मेदारियों को समझता है वो हड़ताल में शामिल नहीं होगा। उनकी यही टिप्पणी टीचरों और हड़ताल को समर्थन देने वालों को पसंद नहीं आई और उनकी फेसबुक पर आलोचना करने लगे।
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महालक्ष्मी को मंगलवार को गिरफ्तार करके वेल्लोर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। वेल्लोर के एसपी पी पाकलवन ने बताया कि महिला ने जज का नाम लिखते हुए सोशल मीडिया पर कमेंट किया था।
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दरअसल सितंबर में तमिलनाडु के सरकारी टीचरों की हड़ताल की आलोचना की थी। आलोचना के कुछ देर के बाद ही किरुबकरन सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे, जिसे लेकर उन्होंने ऑनलाइन मामला दर्ज कराया था।
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बता दें कि तमिलनाडु में सरकारी स्कूल टीचरों ने सातवां वेतन आयोग लागू करवाने के लिए क्लासों में पढ़ाना बंद कर दिया था और हड़ताल पर उतर आए थे। इस पर किरुबरकन ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य में बच्चों के नीट (NEET) इग्जाम में सबसे कम नंबर आते हैं। सिर्फ पांच ऐसे सरकारी स्कूल हैं जिनके बच्चे मेडिकल में दाखिला ले पाएं। जो टीचर हड़ताल कर रहे हैं उन्हें ये आंकड़े देखकर शर्म करना चाहिए।
टीचरों को अपनी जिम्मेदारियां समझनी चाहिए। जो इन जिम्मेदारियों को समझता है वो हड़ताल में शामिल नहीं होगा। उनकी यही टिप्पणी टीचरों और हड़ताल को समर्थन देने वालों को पसंद नहीं आई और उनकी फेसबुक पर आलोचना करने लगे।