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'जरूरत पड़ी तो पहले परमाणु हमला नहीं करने की नीति बदलने में नहीं करूंगा देर'
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 11 Nov 2016 11:31 AM IST
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- फोटो : Getty Images
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रक्षामंत्री मनोहर परिकर ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर भारत की नीति बदलने की वकालत की है। उन्होंने हैरानी जताई कि हम अभी तक ‘परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं’ करने की नीति से ही बंधे हुए हैं जबकि इसके बजाय हम यह कह सकते हैं कि ‘हम एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति हैं और इसका गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल नहीं करेंगे।’
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एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए परिकर यह तक बोल गए कि 'अगर जरूरत पड़ी तो पहले हमला न करने की इस नीति को वह बदलने में देर भी नहीं लगाएंगे।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी निजी राय है।
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एक सवाल के जवाब में अनिश्चित युद्ध नीति के विश्लेषण के दौरान उन्होंने कहा कि 'मैं (भारत) खुद को क्यों बांध लूं। भारत को यह कहना चाहिए कि हम जिम्मेदार एटमी ताकत हैं और गैर-जिम्मेदार तरीके से एटमी हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगे। लेकिन यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।' उन्होंने कहा 'अगर देश पर कोई खतरा होता है तो मैं पहले किताब खोलकर नियम नहीं पढूंगा।'
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रक्षा मंत्रालय ने झाड़ा पल्ला, कहा- यह उनका निजी बयान
गौरतलब कि 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत ने पहले एटमी हमला करने न करने की अपनी नीति घोषित की थी। उन्होंने मीडिया को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘मैं ऐसा कह रहा हूं। लेकिन मीडिया लिखेगा कि परमाणु नीति बदल गई है। सच्चाई यह है कि देश की परमाणु नीति नहीं बदली है। मैंने जो कहा, वह मेरा निजी विचार है।’
वहीं उनका यह बयान सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे अभी तक का सबसे गैरजिम्मेदाराना बयान बताया है। वहीं रक्षामंत्री के इस बयान पर रक्षामंत्रालय ने इसे उनकी निजी राय बताकर पल्ला झाड़ लिया।
वहीं उनका यह बयान सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे अभी तक का सबसे गैरजिम्मेदाराना बयान बताया है। वहीं रक्षामंत्री के इस बयान पर रक्षामंत्रालय ने इसे उनकी निजी राय बताकर पल्ला झाड़ लिया।