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इन पांच वजहों से भाजपा के लिए नाक का सवाल बना गुजरात का राज्यसभा चुनाव

Tue, 08 Aug 2017 03:33 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Tue, 08 Aug 2017 03:33 PM IST
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Why gujrat rajyasabha election is prestige issue for bjp?
- फोटो : Live Mint

गुजरात में कांग्रेस और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच घमासान की वजह बना राज्यसभा की तीन सीटों का चुनाव अब अंतिम दौर में है। हफ्तों तक कर्नाटक के रिजॉर्ट में 'सुरक्षित' रहने के बाद वापस अहमदाबाद पहुंचे कांग्रेस के 44 विधायकों ने विधानसभा पहुंचकर राज्य से राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मतदान कर दिया है।

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तीन सीटों के लिए हो रहे चुनाव में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और स्मृति ईरानी का जीतना तो तय है लेकिन तीसरी सीट पर कांटे की टक्कर होने से मुकाबला रोचक हो गया है। इस सीट के लिए मुकाबला सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव और कांग्रेस के ही पूर्व विधायक रहे राजपूत के बीच है जो कुछ दिन पहले ही पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
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भाजपा ने भी इस सीट को नाक का प्रश्न बना लिया है तो कांग्रेस के लिए तो ये जीवन मरण का सवाल है। अगर पटेल इस सीट पर हारते हैं तो कांग्रेस के लिए ये दोहरा झटका होगा सीट तो उनके खाते से जाएगी ही इसका असर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की छवि पर भी पड़ेगा, क्योंकि पटेल उनके सबसे करीबी नेता माने जाते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस को पटखनी देने के लिए भाजपा ने सारे घोड़े खोल दिए हैं। 

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गुजरात में कांग्रेस से भाजपा को मिल रही मजबूत टक्कर

Why gujrat rajyasabha election is prestige issue for bjp?

गुजरात को लेकर भाजपा की बेचैनी की बड़ी वजह वहां लगातार होती कांग्रेस की मजबूत स्थिति भी है। पिछले निकाय और पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने वहां अच्छा प्रदर्शन किया है जिसने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। भाजपा शासित बाकी राज्यों के मुकाबले गुजरात ही एक ऐसा प्रदेश है जहां कांग्रेस मजबूत और भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में है। अगले साल यहां विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में भाजपा यहां कांग्रेस को कोई मौका नहीं देना चाहती, जिससे राज्यों के वोटरों में कांग्रेस को लेकर कोई संदेश जाए। संघ को भी लगता है कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस यहां भाजपा को कड़ी टक्कर देगी। 

दो दशक के शासन के बाद भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का खतरा
गुजरात में दो दशक से लगातार भाजपा की ही सरकार है। ऐसे में पार्टी को इस बार सत्ता विरोधी लहर का भी खतरा सता रहा है। नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस दौरान वह अपनी अलग रणनीति से सत्ता विरोधी लहर की हवा मंद करते रहते थे। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर सत्ता विरोधी लहर की हवा निकाल दी थी। लेकिन वर्तमान में प्रदेश में उनके जैसा कुशल नेतृत्व नहीं है। यही कारण है कि पिछले तीन साल में पार्टी दो मुख्यमंत्री बदल चुकी है। हालांकि खतरा अभी भी बना हुआ है।

पटेल आंदोलन और ऊना मुद्दा बना भाजपा का सिरदर्द

Why gujrat rajyasabha election is prestige issue for bjp?

भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ गुजरात में उसके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है पटेल आंदोलन, जिसके मुखिया हार्दिक पटेल ने पार्टी की रातों की नींद उड़ा रखी है। हालांकि हाइकोर्ट के आदेशों के चलते फिलहाल हार्दिक राज्य से बाहर हैं लेकिन ये तय है कि चुनावों से पहले वह भाजपा की मुश्किल बढ़ाने के लिए कोई चाल जरूर चलेंगे। गुजरात में पटेल ही उसका मजबूत स्तंभ हुआ करते थे उन्हीं में अब आरक्षण के मुद्दे पर हार्दिक पटेल ने सेंध लगा दी है। इसके अलावा पिछले साल ऊना में दलितों की पिटाई का मुद्दा भी भाजपा के गले की हड्डी बन सकता है। पार्टी लगातार उसके डेमेज कंट्रोल का प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष का गृह राज्य है गुजरात
भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व के लिए गुजरात की सबसे बड़ी टेंशन ये है कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य है। यहां मिली किसी भी मात का खामियाजा पार्टी को पूरे देश में उठाना पड़ सकता है। अगर भाजपा यहां अगले चुनावों में पुराना प्रदर्शन दोहराने में असफल रही तो विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर पूरे देश में उसके खिलाफ माहौल खड़ा कर सकता है। 

गुजरात में कांग्रेस को मात देकर देशभर में मजबूत होगा भाजपा का किला
वहीं गुजरात में कांग्रेस के सामने भी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। जिस तरह पार्टी यहां अपने विधायकों और शीर्ष नेताओं को एक एक कर खो रही है वो उसके चुनावी अभियान पर सीधा असर डालेगा। इससे उसकी रणनीति भी कुंद होगी और संभावनाएं भी। वहीं भाजपा अगर कांग्रेस को गुजरात में भी मात देती है तो इसका असर भी पूरे देश पर पड़ेगा। इसके बाद भाजपा के सामने कांग्रेस बिल्कुल असहाय ‌स्थिति में खड़ी हो जाएगी। गुजरात में हारने पर कांग्रेस के मनोबल पर भी असर पड़ना तय है। जिसका सीधा फायदा भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनावों में मिलेगा।

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