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बजट से सियासी चंदे पर चोट, 2000 से ज्यादा कैश पर रोक

Wed, 01 Feb 2017 11:07 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Feb 2017 11:07 PM IST
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union budget 2017 : political funding limit set at rs 2000 from cash
चंदे पर चोट - फोटो : amar ujala

राजनीतिक दलों के फंडिंग को लेकर बजट में बड़ा ऐलान किया गया है। बजट में सियासी दलों के चंदे को लेकर बड़ी चोट की गई है। अब राजनीतिक पार्टियां 2000 से ज्यादा कैश चंदे के रूप में नहीं ले सकती है। यानि ये कह सकते हैं ये बजट राजनीतिक पार्टियों के लिए बुरी है। क्योंकि पॉलिटिकल फंडिंग को लेकर देश भर के लोगों में गुस्सा था । हालांकि, इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार को ये सुझाव दिया था कि कैश में दो हजार से ज्यादा लेन-देन पर रोक लगाई जाए।

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बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐलान किया कि अब सभी राजनीतिक पार्टियां एक व्यक्ति से  कैश में सिर्फ 2000 रुपये तक ही ले सकती हैं। 2000 से ज्यादा के चंदे का हिसाब देना होगा, यानी राजनीतिक दल 2000 से अधिक चंदा ऑनलाइन या चेक के तौर पर ही ले सकते हैं। इससे पहले राजनीतिक दलों को अपनी आय में से 20 हजार से कम के चंदे को घोषित करने से छूट मिली हुई थी। 
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हालांकि, अभी भी राजनीतिक दल 20 हजार से कम चंदे का ब्योरा बताने के लिए बाध्य नहीं हैं। आरटीआई के दायरे में आने के बावजूद भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, सीपीएम और सीपीआई कोई सूचना नहीं देते हैं। चुनाव जीतने वाले सांसदों और विधायकों के शपथ पत्रों की स्वत: जांच करने का कोई प्रावधान नहीं है। 
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union budget 2017 : political funding limit set at rs 2000 from cash
EC

पिछले एक दशक से प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी चंदे के रूप में मिली नकदी की घोषणा करने से बचते रहे हैं। यूं कहें कि राजनीतिक दल डिजिटल लेनदेन से परहेज करते आ रहे हैं। पिछले एक दशक में इन दलों ने चुनावों के लिए 63 फीसदी चंदा नकद ही लिया है।
 
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) के हालिया खुलासे से स्पष्ट हुआ था कि इन दलों ने एक दशक में 37 फीसदी चंदा ही चेक से लिया है। चुनाव सुधार पर काम करने वाली इस संस्था ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे पर तैयार रिपोर्ट में बताया है कि 2004 से 2015 तक कुल 71 विधानसभा चुनाव हुए जिनके लिए 152 राजनीतिक दलों ने 2107 करोड़ रुपये का नकद चंदा लिया जबकि 1244 करोड़ का चंदा चेक से लिया। इनमें से उन्होंने 65 प्रतिशत चंदा ही चुनावों में खर्च किया।
    
वर्ष 2013 में सबसे ज्यादा चंदा नकद इकट्ठा किया गया। 18 राजनीतिक दलों ने करीब 493 करोड़ रुपये नकद और 199 करोड़ रुपये चेक से जुटाए। वहीं 2012 में 13 राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा 695 करोड़ का चंदा मिला। इनमें से 370 करोड़ नकद और 325 करोड़ रुपये चेक से प्राप्त हुए।

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