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H1-B: अमेरिका की पाबंदी के बाद इन देशों में होगा भारतीयों का ठिकाना

Tue, 02 May 2017 11:03 AM IST
amarujala.com-Presented by- हर्षित गौतम
amarujala.com-Presented by- हर्षित गौतम Updated Tue, 02 May 2017 11:03 AM IST
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these countries are becoming new Indian IT hubs

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने विदेशी कुशल कर्मियों के लिए वीजा नियमों में सख्ती कर दी है। ऐसे में भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए लैटिन अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका और नॉर्दिक राष्ट्र नए भारतीय आईटी उद्योग के रूप में उभर रहे हैं।

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इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक टॉप हायरिंग कंस्लटेंट्स का कहना है कि भारतीय आईटी सेक्टर के कर्मचारियों के लिए ये देश नए बाजार के रूप में आकर्षित कर रहे हैं। आने वाले समय में ये देश भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए बड़ा हब साबित होंगे।
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टीमलीज सर्विसेज की ऋतुपरना चक्रवर्ती कहती हैं कि इन देशों ने संरक्षणवादी रवैया अपनाया है, ऐसे में इन्हें स्थानीय तौर पर तत्काल कुशल कर्मचारी नहीं मिलेंगे। इन सबसे अलग हम उम्मीद कर सकते हैं कि कनाडा,  लैटिन अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और अन्य अफ्रीकी देश आईटी उद्योग के लिए बड़े बाजार बनेंगे।
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भारतीय कामगार कनाडा का रुख करेंगे

these countries are becoming new Indian IT hubs
file photo - फोटो : अमर उजाला

एक्सपरीज आईटीमैनपावर ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष मनमीत सिंह कहते हैं अमेरिका कैसे आईटी उद्योग का हब बना रहेगा जबकि हमने खुद देखा है कि कई कुशल कर्मियों ने यूरोप, ईस्ट अफ्रीका और केन्या का रुख किया है। हम भी एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं जिससे साफ हो रहा है कि कुशल भारतीय कामगार जापान का रुख कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: H1-B वीजा नियमों को मात देने के लिए भारतीय IT कंपनियों की नई रणनीति

हेड हंटर्स ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक क्रिस लक्ष्मीकांत कहते हैं कि H1-B वीजा नियमों में संरक्षणवादी रवैया अपनाने के बाद भी अचानक अमेरिकी मार्केट पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इस साल ये सिर्फ 10-12 प्रतिशत ही प्रभावित होगा।

भारतीय कामगार कनाडा का रुख करेंगे जहां उन्हें भाषाई तौर पर भी कोई समस्या नहीं होगी। लक्ष्मीकांत आगे कहते हैं कि अमेरिका के पास जरूरत के मुताबिक STEM स्टूडेंट्स भी नहीं है और उन्हें विकसित करने के लिए भी 5-10 साल लगेंगे।

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