भारत ने कहा- जल्द पारित हो वैश्विक समझौता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत ने सोमवार को अपने उस आह्वान को फिर दोहराया कि आतंकवाद से प्रभावी रूप से निपटने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा वैश्विक समझौते को जल्द पारित करवाया जाए। भारत ने इस समस्या को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
पाकिस्तान की ओर सीधा संकेत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने कहा कि भारत पिछले कई दशकों से ‘छद्म युद्ध’ का शिकार रहा है। आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक एशियाई रुख विकसित किए जाने की जरूरत है।
यूएन द्वारा भारत के समर्थन वाले समग्र अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौते (सीसीआईटी) को शीघ्र पारित करवाने का आह्वान करते हुए परिकर ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे व्यापक एवं गंभीर चुनौती बना हुआ है तथा इससे निपटने के लिए एकीकृत रुख अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान में आतंकवाद से निपटने के विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
आतंकी समूहों को पनाह देने वालों पर हो कार्रवाई
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकी समूहों का वित्त पोषण करने वाले, उनकी विचारधारा के प्रचार और आतंकी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत इन प्रावधानों को सीसीआईटी में शामिल करवाना चाहता है। परिकर ने कहा कि एशिया सबसे खतरनाक आतंकवादी नेटवर्कों का शिकार रहा है। एशिया की ओर से मजबूती से प्रयास करने पर आतंकवाद से निपटने वाली इस व्यापक रूपरेखा को अपनाने के बारे में शेष विश्व पर अधिक जोर पड़ेगा। उन्होंने कोई स्पष्ट विवरण दिए बिना कहा कि विश्व भर में होने वाले कुल आतंकी हमलों में करीब सात प्रतिशत भारत में होते हैं।
परिकर ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे व्यापक एवं गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकी शिविरों को बंद करने, सभी आतंकी समूहों पर प्रतिबंध लगाने, विशेष कानून के तहत सभी आतंकवादियों पर मुकदमा चलाने तथा सीमा पार आतंकवाद को सीसीआईटी के तहत प्रत्यर्पण योग्य अपराध बनाए जाने पर बल देता रहेगा।