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एक साथ चुनाव कराने के लिए ठोस कानूनी प्रावधान जरूरी: पूर्व चुनाव आयुक्त 

Fri, 06 Oct 2017 02:43 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 06 Oct 2017 02:43 AM IST
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Solid legal provisions are essential for holding elections simultaneously says N. Gopalaswami
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एन गोपालस्वामी - फोटो : social media

चुनाव आयोग एक साथ लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव कराने में सक्षम है लेकिन इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार को ठोस कानूनी प्रावधान करने होंगे। ऐसा मानना है पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एन गोपालस्वामी का। एक दिन पहले ही चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा था कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए आयोग को सितंबर 2018 तक सभी संसाधनों से लैस होना पड़ेगा।

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उन्होंने बुधवार को भोपाल में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि केंद्र ने एक साथ चुनाव कराने में सक्षम होने के लिए आयोग से जरूरी संसाधनों के बारे में पूछा था। इसके जवाब में आयोग ने नई ईवीएम मशीनें तथा वीवीपीएटी (पर्ची वाली मशीनें) खरीदने के लिए धन की जरूरत बताई थी। सभी संसाधनों से लैस होने में आयोग को सितंबर 2018 तक का वक्त लग जाएगा। 

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रावत ने बृहस्पतिवार को कहा कि चुनाव आयोग को एक साथ चुनाव कराने के लिए लगभग 24 लाख ईवीएम और 16 लाख पर्ची वाली मशीनों की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मसले पर सर्वसम्मति बनाना भी एक जटिल कार्य होगा। इस बारे में जब पूर्व सीईसी एन गोपालस्वामी से राय मांगी गई तो उन्होंने कहा, ‘प्रशासनिक तौर पर एक साथ चुनाव कराना मुश्किल नहीं होगा क्योंकि आयोग के पास पर्याप्त संख्या में ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनें हैं। 
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पढ़ें- 2018 तक एक साथ करा सकेंगे लोकसभा और विधानसभा के चुनाव: EC

लेकिन इससे पहले सरकार को ठोस कानूनी प्रावधान करने होंगे। कुछ राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा के कार्यकाल के साथ ही संपन्न होता है। लेकिन ज्यादातर अन्य विधानसभाएं चलती रहती हैं। सभी विधानसभाओं का कार्यकाल एक साथ समाप्त करने के लिए कानून बनाना होगा।’ एक अन्य पूर्व सीईसी एमएस गिल ने कहा कि जब एक साथ चुनाव कराना संभव है तो मैं इस तरह के कदम उठाने की आवश्यकता पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।

हमारा संविधान संसद पर आधारित है जहां राज्यों को अपने अधिकार दिए गए हैं। उनकी अपनी-अपनी स्थिति होती है। आप कैसे केंद्र और राज्यों को एक साथ कर सकते हैं? प्रत्येक विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग है।

भाजपा की भाषा बोल रहा है आयोग: भाकपा 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया है कि एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर चुनाव आयोग भाजपा की ही भाषा बोल रहा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद डी राजा ने कहा कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है और लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव कराने के लिए सभी राज्य सरकारों को बाध्य नहीं किया जा सकता है।

वह चुनाव आयुक्त ओपी रावत के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिन्होंने कहा था कि आयोग सितंबर 2018 तक एक साथ चुनाव कराने में सक्षम हो जाएगा।      

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