{"_id":"588d1dfb4f1c1bb73bcf3b4e","slug":"protest-for-kambala-in-karnataka","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्नाटक में भैंसों की दौड़ पर प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन, अध्यादेश की मांग शुरू","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कर्नाटक में भैंसों की दौड़ पर प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन, अध्यादेश की मांग शुरू
एजेंसी/मूदाबिदरी
Updated Sun, 29 Jan 2017 04:10 AM IST
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कंबाला
राज्य में भैंसों की पारंपरिक वार्षिक दौड़ कंबाला पर लगे प्रतिबंध के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गया है। इसके वाद कर्नाटक कैबिनेट पशु क्रूरता कानून के प्रावधानों में संशोधन का फैसला किया है, ताकि कंबाला के आयोजन का रास्ता साफ हो सके। इसके लिए जल्द ही विधानसभा में बिल लाया जाएगा।
इससे पहले शनिवार को दक्षिण कन्नड़ जिले में शनिवार को हजारों लोगों ने कंबाला के समर्थन में रैली का आयोजन किया। कड़ी सुरक्षा के बीच प्रदर्शनकारियों ने 200 बैलगाड़ियों के साथ करीब चार किलोमीटर की रैली की। यह विरोध प्रदर्शन स्वराज मैदान से शुरू होकर कडलकेर निसर्गधम कंबाला ट्रैक पर खत्म हुआ। प्रदर्शनकारी जलीकट्टू की तरह कंबाला के लिए भी अध्यादेश लाने की मांग कर रहे थे।
समर्थकों का कहना था कि यह 800 साल पुराना खेल है तथा उनकी परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा, हम भैसों को अपने बच्चे की तरह पालते हैं और इस खेल में जलीकट्टू की तरह कोई हिंसा भी नहीं होती है। यह मामला अभी कर्नाटक हाई कोर्ट में है तथा 31 जनवरी को इसकी अगली सुनवाई है।
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इससे पहले शनिवार को दक्षिण कन्नड़ जिले में शनिवार को हजारों लोगों ने कंबाला के समर्थन में रैली का आयोजन किया। कड़ी सुरक्षा के बीच प्रदर्शनकारियों ने 200 बैलगाड़ियों के साथ करीब चार किलोमीटर की रैली की। यह विरोध प्रदर्शन स्वराज मैदान से शुरू होकर कडलकेर निसर्गधम कंबाला ट्रैक पर खत्म हुआ। प्रदर्शनकारी जलीकट्टू की तरह कंबाला के लिए भी अध्यादेश लाने की मांग कर रहे थे।
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समर्थकों का कहना था कि यह 800 साल पुराना खेल है तथा उनकी परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा, हम भैसों को अपने बच्चे की तरह पालते हैं और इस खेल में जलीकट्टू की तरह कोई हिंसा भी नहीं होती है। यह मामला अभी कर्नाटक हाई कोर्ट में है तथा 31 जनवरी को इसकी अगली सुनवाई है।
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