संघ की समन्वय बैठकों में अब नहीं जाएंगे पीएम नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए संघ पीएम मोदी को अब अपनी समन्वय बैठकों में नहीं बुलाएगा। जरूरत पड़ने पर संघ के शीर्ष पदाधिकारी खुद ही पीएम से मिलकर चर्चा कर सकते हैं। संघ के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार पिछली बार दिल्ली में हुई समन्वय बैठक में पीएम मोदी को बुलाने को लेकर विरोध के स्वर उभरे थे और विवाद भी खड़ा हो गया था।
विपक्ष ने इसे लेकर पीएम पर निशाना साधा था। पिछले वर्ष की बैठक में भी कई वरिष्ठ प्रचारकों की राय पीएम को बैठक में बुलाने के पक्ष में नहीं थी। चूंकि उस वक्त फैसला हो गया था। इसलिए पीएम बैठक में शामिल हुए थे। मगर अब उन्हें संघ की समन्वय बैठकों में नहीं बुलाया जाएगा।
संघ ने यह कदम मीडिय़ा में उठने वाले विवाद को रोकने के प्रयास में उठाया है। समन्वय बैठकें मीडिय़ा की सूर्खियां न बने इसके लिए भी संघ ने व्यवस्था की है। अब बड़ी बैठकों के अलावा विषयों के आधार पर छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन कर एक-दूसरे के विचारों को समझने का प्रयास होगा। बीते माह ऐसी बैठकें की गईं।
बैठक में राजनीतिक हस्तियों से दूरी
आर्थिक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संघ के संगठनों की सरकार के साथ समन्वय बैठकें अलग-अलग हिस्सों में र्हुइं। उनका प्रचार-प्रसार भी ज्यादा नहीं रहा। यही वजह है कि इस वर्ष की समन्वय बैठक को संघ ने राजधानी से कोसों दूर राजस्थान के उदयपुर में रखा है। 8 से 9 सितंबर तक चलने वाली इस बैठक में राजनीतिक हस्तियों से दूरी बनाई गई है।
बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भी पहुंचने के आसार कम हैं। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समन्वय बैठक में संघ ने अपने संगठनों से सिर्फ संगठन महामंत्रियों को ही बुलाया है। भाजपा की ओर से इस बैठक में संगठन मंहामंत्री राम लाल, पार्टी महासचिव राम माधव, सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, वी सतीश और सौदान सिंह उपस्थित होंगे।
बताया जा रहा है कि बैठक में तय विषयों को सभी संगठन मंत्री अपने संगठन तक पहुंचाएंगे। इसके तुरंत बाद दिल्ली में 10 से 13 सितंबर के बीच देशभर के भाजपा संगठन महामंत्रियों का विशेष वर्ग आयोजित होना है।