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महिला को किसी भी प्रेम प्रस्ताव को ठुकराने का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भ्ाट्ट
Updated Sat, 29 Apr 2017 08:49 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी महिला को अपना प्रेमी चुनने का अधिकार है। महिला को किसी प्रस्ताव को ठुकराने का भी अधिकार है। कोई भी व्यक्ति इसे लेकर महिला पर दबाव नहीं बना सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि छेड़खानी के द्वारा सम्मान केसाथ महिलाओं के जीने के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अपना हमसफर या प्रेमी चुनना महिलाओं का कानूनी अधिकार है। सामाजिक तौर भी इसकी मान्यता है। किसी भी महिला को प्यार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
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पीठ ने ये टिप्पणी हिमाचल के एक मामले में एक शख्स को मिली सात वर्ष की सजा को सही ठहराते हुए की है। इस शख्स द्वारा लगातार एक महिला के साथ छेड़खानी करने और इससे तंग आकर महिला ने खुदकुशी कर ली थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में कहा है कि इस मामले की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि उस शख्स ने छेड़खानी की इस कदर हद कर दी जिससे परेशान होकर महिला ने अपनी जान दे दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस बात पर बेहद खेद जताया कि सभ्य समाज में शिक्षण संस्थानों व पार्क, रेलवे स्टेशन आदि सार्वजनिक स्थलों पर छेड़खानी के जरिए महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है।
अदालत ने कहा कि संविधान केतहत महिलाओं को भी वहीं अधिकार प्राप्त है जो पुरुष को है। संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत सभी नागरिकों को सम्मान से जीने का अधिकार मिला हुआ है और छेड़खानी जैसी अप्रिय कृत्य केजरिए इस अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। इससे लैंगिक संवेदनशीलता का मूल सिद्धांत प्रभावित होता है।
मामले के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश निवासी पवन कुमार पर पीड़िता केसाथ बलात्कार और अपहरण का मामला चल रहा था। इस मामले में पीड़िता ने आरोपी पवन के पक्ष में बयान दिया, जिससे पवन बरी हो गया। इसकेबाद पवन उस महिला केसाथ छेड़खानी करने लगा। इससे तंग आकर 19 जुलाई 2008 मिट्टी का तेल उड़ेल कर खुद को आग केहवाले कर दिया। पांच दिनों केबाद महिला की मौत हो गई थी। मरने से पहले महिला द्वारा दिए बयान केआधार पर पवन पर मुकदमा दर्ज किया गया।