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किसानों पर चर्चा छोड़ सांसदों ने की अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट
Updated Wed, 19 Jul 2017 06:06 PM IST
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किसानों की आत्महत्या सहित कृषि क्षेत्र के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा से ठीक पहले सांसदों को अपने वेतन-भत्तों की याद आ गई। बुधवार को जहां लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई, वहीं राज्यसभा का आगाज सांसदों वेतन बढ़ाने की मांग के साथ हुई। सांसदों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद उनका वेतन सरकार के सचिव से भी कम हो गया है। समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने इसकी शुरुआत की और बाद में कांग्रेस के आनंद शर्मा ने उनके सवाल को सही ठहराते हुए उनका साथ दिया।
अग्रवाल ने अपनी मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि अगर जज अपना वेतन बढ़ाने की मांग कर सकते है तो हम क्यों नहीं। जब वे ऐसा करना बंद कर देंगे तो हम भी कोई मांग नहीं करेंगे। हमने वही मांगा है जो सातवें वेतन आयोग के मुताबिक है। आनंद शर्मा ने इस बात पर अफसोस जताया कि भारतीय सांसदों को दुनिया के जनप्रतिनिधियों के मुकाबले सबसे कम वेतन मिलता है। लोगों को यह समझना चाहिए कि एक सांसद के आवास पर कितने लोग आते हैं। अगर हमारा वेतन नहीं बढ़ाया जाता है तो इसका यही अर्थ होगा कि सिर्फ धनपशुओं को ही सांसद बनना चाहिए।
पिछले साल भी सपा ने ही उठाया था मुद्दा
राज्यसभा में ही 11 अगस्त, 2016 को सपा के रामगोपाल यादव ने सांसदों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी की मांग करते हुए ठीक यही तर्क दिया था कि उनकी तनख्वाह सचिव से भी कम है। यहां तक कि दिल्ली के विधायक से भी कम है, जबकि महाराष्ट्र के विधायकों के मुकाबले आधी है। इस आधार पर उन्होंने सांसदों का वेतन कैबिनेट सचिव से ज्यादा किए जाने की मांग की थी। सातवें वेतन आयोग के बाद कैबिनेट सचिव का वेतन 2.5 लाख हो गया है। मालूम हो कि योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संसद की स्थायी समिति ने सांसदों का वेतन 2.8 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी।
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तमिलनाडु में दोगुनी हुए एमएलए की सैलरी
उधर, तमिलनाडु विधानसभा ने सदस्यों की सैलरी बढ़ाकर 1.05 लाख कर दी। पूर्व के मुकाबले इसमें 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यही नहीं, उनकी मासिक पेंशन 12 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये और विधायक निधि को 2 करोड़ से 2.6 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
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अग्रवाल ने अपनी मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि अगर जज अपना वेतन बढ़ाने की मांग कर सकते है तो हम क्यों नहीं। जब वे ऐसा करना बंद कर देंगे तो हम भी कोई मांग नहीं करेंगे। हमने वही मांगा है जो सातवें वेतन आयोग के मुताबिक है। आनंद शर्मा ने इस बात पर अफसोस जताया कि भारतीय सांसदों को दुनिया के जनप्रतिनिधियों के मुकाबले सबसे कम वेतन मिलता है। लोगों को यह समझना चाहिए कि एक सांसद के आवास पर कितने लोग आते हैं। अगर हमारा वेतन नहीं बढ़ाया जाता है तो इसका यही अर्थ होगा कि सिर्फ धनपशुओं को ही सांसद बनना चाहिए।
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पिछले साल भी सपा ने ही उठाया था मुद्दा
राज्यसभा में ही 11 अगस्त, 2016 को सपा के रामगोपाल यादव ने सांसदों के वेतन एवं भत्तों में बढ़ोतरी की मांग करते हुए ठीक यही तर्क दिया था कि उनकी तनख्वाह सचिव से भी कम है। यहां तक कि दिल्ली के विधायक से भी कम है, जबकि महाराष्ट्र के विधायकों के मुकाबले आधी है। इस आधार पर उन्होंने सांसदों का वेतन कैबिनेट सचिव से ज्यादा किए जाने की मांग की थी। सातवें वेतन आयोग के बाद कैबिनेट सचिव का वेतन 2.5 लाख हो गया है। मालूम हो कि योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संसद की स्थायी समिति ने सांसदों का वेतन 2.8 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी।
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तमिलनाडु में दोगुनी हुए एमएलए की सैलरी
उधर, तमिलनाडु विधानसभा ने सदस्यों की सैलरी बढ़ाकर 1.05 लाख कर दी। पूर्व के मुकाबले इसमें 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यही नहीं, उनकी मासिक पेंशन 12 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये और विधायक निधि को 2 करोड़ से 2.6 करोड़ रुपये कर दिया गया है।