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NaMo की स्पेस डिप्लोमेसी, अंतरिक्ष में SAARC के बीच 'सबका साथ, सबका विकास'

Sun, 30 Apr 2017 02:41 PM IST
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर Updated Sun, 30 Apr 2017 02:41 PM IST
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Modi's space diplomacy puts India into new orbit
narendra modi - फोटो : narendra modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31वीं बार 'मन की बात' प्रोग्राम के अंत में साउथ एशिया सैटेलाइट की बात की। 50 मीटर लंबी और 412 टन की इस उपग्रह की कीमत 235 करोड़ रुपये है। इससे पहले फरवरी में भी भारत ने पीएसएलवी के जरिए 100 से ज्यादा नैनो सैटालाइट लॉन्च की थी।
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यह पहली बार है कि भारत स्पेस टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमता का खुलकर प्रदर्शन कर रहा है। इस लॉन्च के साथ भारत अंतरिक्ष में अपनी जगह और मजबूत कर लेगा। इस खास मौके पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि भारत अपने पड़ोस का एक स्तर और ऊपर लेकर जा रहा है। यह पहली बार होगा, जब कोई पड़ोस अंतरिक्ष की ऊंचाईयों तक पहुंचेगा।
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इस प्रयास से लग रहा है कि पीएम मोदी इसरो को नया मंच देना चाहते हैं। इस योजना में शामिल होने वाले देशों को 12 साल के लिए 1,500 मिलियन डॉलर का खर्च करना होगा। साउथ एशिया सैटेलाइट से इस क्षेत्र के देशों में संचार और सूचना को बेहतर किया जा सकता है। साथ ही टीवी प्रसारण, टेलिकॉम, टेमिएजुकेशन, टेलिमेडिसिन और विपदा निवारण में भी इसका प्रयोग होगा। इसके अलावा इससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी लाभ होगा।
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पाकिस्तान ने गंवाया सुनहरा मौका

Modi's space diplomacy puts India into new orbit
इसरो
इसके अलावा सैटालाइट से इस देशों में आने वाली प्रकृतिक आपदाओं का सूचना भी दी जाएगी। इस सैटालाइट से पाकिस्तान ने खुद का बाहर रखा है। पाक के अलावा अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, माल्दीव्स, बांग्लादेश और श्रीलंका इसका हिस्सा बनेंगे। हालांकि, काबुल से इस प्रस्ताव पर लिखित मंजूरी नहीं मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में काठमांडू में इस विषय में अपने विचार रखे थे। उन्होंने इसे भारत की ओर से दक्षिण एशियाई साथियों को भारत की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक तोहफा बताया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगले साल की बैठक में स्पेस टेक्नोलॉजी के जरिए गवर्नेंस और आर्थिक विकास पर ध्यान दिया जाएगा।

पाकिस्तान के बाहर रहने पर कई विशेषज्ञों ने कहा है कि उसने सुनहरा मौका छोड़ दिया है। हालांकि, पाकिस्तान, श्रीलंका ने चीन के सहयोग भी अपनी सैटेलाइट लॉन्च की है। इसके अलावा अफगानिस्तान ने भी यूरोपीय देशों की मदद से भी इस तरह की सैटेलाइट लॉन्च की है।
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