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भारतीय नौसेना के लिए बनेंगी स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस पनडुब्बियां, 6 देशों ने बढ़ाए हाथ!
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:11 AM IST
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आईएनएस चक्र
- फोटो : bluebird-electric
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भारत समंदर का भी सिकंदर बन सके, इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 6 अन्य देशों के साथ मिलकर 'प्रोजेक्ट-75' लांच किया है, जिसके तहत कम से कम 6 एडवांस स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस पनडुब्बियां भारतीय नौसेना को मिलेंगी। इसके लिए 70 हजार करोड़ रुपयों के लागत की संभावना जताई जा रही है, जिसमें फ्रांस, जर्मनी, रूस, स्वीडन, स्पेन और जापान हमारा साथ देंगे। ये पनडुब्बियां 'मेक इन इंडिया' के तहत 'मेक फार इंडिया' होंगी।
भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट-35(इंडिया) नाम दिया है, और इसे 'मदर ऑफ आल अंडरवॉटर डील्स' भी कहा जा रहा है। हालांकि ये डील तय समय से 10 साल पीछे चल रही है, जिसे मोदी सरकार के नए 'स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' पॉलिसी के तहत सबसे बड़ा काम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने 'स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' पॉलिसी को मई से शुरू किया था।
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वैसे, अभी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत मात्र हुई है, पर जबतक ये डील पूरी होगी और भारतीय नौसेना को मिलेगी। उस समय तक भारतीय नौसेना की मौजूदा पनडुब्बियां जर्जर हो चुकी होंगी। ये प्रोजेक्ट भारत के लिए इतना ज्यादा मायने रखता है कि भारत सरकार भी इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। लेकिन ये इतना आसान और जल्दी में होने वाला काम नहीं लगता। इसके लिए पानी के जहाज और पनडुब्बियां बनाने वाली 6 विदेशी कंपनियों नेवल ग्रुप-डीसीएनएस(फ्रांस), थायस्सेक्रप मरीन सिस्टम्स(जर्मनी), रोसोबोरोनएक्सपोर्ट रूबिन डिजाइन ब्यूरो(रूस), नवनसिया(स्पेन), साब(स्वीडन) और मित्सुबिशी-कावासाकी हैवी इंडस्ट्रीज कॉम्बाइन(जापान) के साथ सहयोग करना होगा। अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार इन पनडुब्बियों को बनाने में उन देशों का ही साथ लेंगी, जो टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी हमारे साथ होंगी। इसके अलावा मेंटिनेंस भी जिसकी कम हो, साथ ही बेहद कम समय में वो ऑपरेशनल मोड में आने में सक्षम हों।
भारत सरकार की योजना है नौसेना के पास हर समय कम से कम 18 डीजल चालित परंपरागत पनडुब्बियों के साथ 6 परमाणु शक्ति चालित पनडुब्बियां मौजूद रहें। इसके अलावा चीन-पाक से निपटने के लिए कम से कम 4 लैस लंबी रेंज की परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियां हों। सरकार इसी दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। यही वजह है कि इस 70 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट में तेजी लाई जा रही है। और इसके लिए भारत में काम कर चुके देशों को वरीयता दी जा रही है।
रूस, जर्मनी और फ्रांस के साथ भारत पहले भी पनडुब्बियों का सौदा कर चुकी है। प्रोजेक्ट 75(इंडिया) के तहत जापान अपनी सबसे मारक सोर्यू क्लास की 4200 टन वजनी पनडुब्बी भारत को देने के लिए तैयार है। और फ्रांस के साथ कलवरी क्लास की 4 पनडुब्बियों का काम पूरा होने वाला है।
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भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट-35(इंडिया) नाम दिया है, और इसे 'मदर ऑफ आल अंडरवॉटर डील्स' भी कहा जा रहा है। हालांकि ये डील तय समय से 10 साल पीछे चल रही है, जिसे मोदी सरकार के नए 'स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' पॉलिसी के तहत सबसे बड़ा काम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने 'स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' पॉलिसी को मई से शुरू किया था।
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वैसे, अभी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत मात्र हुई है, पर जबतक ये डील पूरी होगी और भारतीय नौसेना को मिलेगी। उस समय तक भारतीय नौसेना की मौजूदा पनडुब्बियां जर्जर हो चुकी होंगी। ये प्रोजेक्ट भारत के लिए इतना ज्यादा मायने रखता है कि भारत सरकार भी इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। लेकिन ये इतना आसान और जल्दी में होने वाला काम नहीं लगता। इसके लिए पानी के जहाज और पनडुब्बियां बनाने वाली 6 विदेशी कंपनियों नेवल ग्रुप-डीसीएनएस(फ्रांस), थायस्सेक्रप मरीन सिस्टम्स(जर्मनी), रोसोबोरोनएक्सपोर्ट रूबिन डिजाइन ब्यूरो(रूस), नवनसिया(स्पेन), साब(स्वीडन) और मित्सुबिशी-कावासाकी हैवी इंडस्ट्रीज कॉम्बाइन(जापान) के साथ सहयोग करना होगा। अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार इन पनडुब्बियों को बनाने में उन देशों का ही साथ लेंगी, जो टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी हमारे साथ होंगी। इसके अलावा मेंटिनेंस भी जिसकी कम हो, साथ ही बेहद कम समय में वो ऑपरेशनल मोड में आने में सक्षम हों।
भारत सरकार की योजना है नौसेना के पास हर समय कम से कम 18 डीजल चालित परंपरागत पनडुब्बियों के साथ 6 परमाणु शक्ति चालित पनडुब्बियां मौजूद रहें। इसके अलावा चीन-पाक से निपटने के लिए कम से कम 4 लैस लंबी रेंज की परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियां हों। सरकार इसी दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। यही वजह है कि इस 70 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट में तेजी लाई जा रही है। और इसके लिए भारत में काम कर चुके देशों को वरीयता दी जा रही है।
रूस, जर्मनी और फ्रांस के साथ भारत पहले भी पनडुब्बियों का सौदा कर चुकी है। प्रोजेक्ट 75(इंडिया) के तहत जापान अपनी सबसे मारक सोर्यू क्लास की 4200 टन वजनी पनडुब्बी भारत को देने के लिए तैयार है। और फ्रांस के साथ कलवरी क्लास की 4 पनडुब्बियों का काम पूरा होने वाला है।
अभी भारत के पास कितनी ताकत?
मौजूदा समय में भारत के पास सिर्फ 2 परमाणु शक्ति चालित पनडुब्बियां हैं। इसमें स्वदेशी अरिहंत पिछले साल ही नौसेना की सेवा में आया है। अरिहंत एक बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन(एसएसबीएन) है, जो 6,000 टन का है। अरिहंत का साथी अरिदमन अभी बनकर तैयार नहीं है। इसके अलावा अकुला-II क्लास का अटैक सबमरीन(एसएसएन) भी भारत के पास है। करीब 12,770 टन की ये पनडुब्बी रूस से 10 साल की लीज पर लाई गई है।
भारत के पास परंपरागत डीजल पनडुब्बियों के तौर पर 13 पनडुब्बियां अभी सेवा में हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने तक इनमें से आधे से अधिक तबतक रिटायर हो चुकी होंगी। भारत के पास सिंधुघोष क्लास की 3076 टन की 9 रुसी पनडुब्बियां हैं, जो सोवियत यूनियन के जमाने की हैं। इनके नाम आईएनएस सिंधुघोष, आईएनएस सिंधुध्वज, आईएनएस सिंधुराज, आईएनएस सिंधुवीर, आईएनएस सिंधुरत्न, आईएनएस सिंधुकेसरी, आईएनएस सिंधुकीर्ति, आईएनएस सिंधुविजय और आईएनएस सिंधुराष्ट्र है। इसके अलावा जर्मनी से लाई गई शिशुमार क्लास की 4 पनडुब्बियां अभी सेवा में हैं, जिन्हें अपग्रेड किया जा रहा है। ये पनडुब्बियां 1850 टन की हैं, जिनके नाम आईएनएस शिशुमार, आईएनएस शंकुष, आईएनएस शल्कि और आईएनएस शंकुल हैं।
भारत के पास परंपरागत डीजल पनडुब्बियों के तौर पर 13 पनडुब्बियां अभी सेवा में हैं। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने तक इनमें से आधे से अधिक तबतक रिटायर हो चुकी होंगी। भारत के पास सिंधुघोष क्लास की 3076 टन की 9 रुसी पनडुब्बियां हैं, जो सोवियत यूनियन के जमाने की हैं। इनके नाम आईएनएस सिंधुघोष, आईएनएस सिंधुध्वज, आईएनएस सिंधुराज, आईएनएस सिंधुवीर, आईएनएस सिंधुरत्न, आईएनएस सिंधुकेसरी, आईएनएस सिंधुकीर्ति, आईएनएस सिंधुविजय और आईएनएस सिंधुराष्ट्र है। इसके अलावा जर्मनी से लाई गई शिशुमार क्लास की 4 पनडुब्बियां अभी सेवा में हैं, जिन्हें अपग्रेड किया जा रहा है। ये पनडुब्बियां 1850 टन की हैं, जिनके नाम आईएनएस शिशुमार, आईएनएस शंकुष, आईएनएस शल्कि और आईएनएस शंकुल हैं।
ये पनडुब्बियां जल्द ही होंगी नौसेना में शामिल
भारतीय नौसेना लंबे समय से पनडुब्बियों की कमीं से जूझ रहा है। इसके लिए सरकार ने लंबे समय से प्रोजेक्ट चलाए हुए हैं, पर अधिकतर अपने तय समय से पीछे चल रहे हैं। मौजूदा समय में भारत-फ्रांस के सहयोग से 1565 टन वजनी कलवरी क्लास की दो पनडुब्बियां ट्रायल के दौर में हैं। इनके नाम आईएनएस कलवरी और आईएनएस खांदेरी है। ये दोनों ही डीजल से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां हैं।
अंडर कंस्ट्रक्शन मोड में हैं ये पनडुब्बियां
परमाणु शक्ति से लैस आईएनएस अरिदमन भारत खुद बना रहा है। ये अरिहंत क्लास की अधुनातन पनडुब्बी है, जो परमाणु हमला करने में भी सक्षम होगी। इसके अलावा कलवरी क्लास की 4 पनडुब्बियां अभी बन रही हैं। ये चारों पनडुब्बियां हमलावर होंगी।
ये पनडुब्बियां हो चुकी हैं रिटायर
भारतीय नौसेना से 9 पनडुब्बियां अबतक अपनी सेवा पूरी कर रिटायर हो चुकी हैं। चार्ली क्लास की एक पनडुब्बी के अलावा कलवरी क्लास चार और वेला क्लास की 4 पनडुब्बियां हैं। चार्ली क्लास की पनडुब्बी का नाम आईएनएस चक्र था, जो रूस से लीज पर ली गई थी। कलवरी क्लास की रिटायर पनडुब्बियों के नाम आईएनएस कलवरी, आईएनएस खांदेरी, आईएनएस करंज और आईएनएस कुरसुना था। वेला क्लास की पनडुब्बियों का नाम आईएनएस वेला, आईएनएस वागिर, आईएनएस वागली, आईएनएस वगशीर था। ये सभी पनडुब्बियां सोवियत रूस से ली गई थीं।