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म्यांमार प्रोजेक्ट की रेस में चीन से पिछड़ा भारत
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
Updated Tue, 13 Jun 2017 07:19 PM IST
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म्यांमार में कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिनकी डेडलाइन बीत चुकी है लेकिन भारत ने अभी तक इन्हें पूरा नहीं किया है। चीन, म्यांमार में बड़ी तेजी से अपने प्रोजेक्ट पूरे करने में जुटा हुआ है। ऐसे में भारत ने म्यांमार में अपनी बुनियादी ढांचा को गति देने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। भारत ने म्यांमार को 1.75 बिलियन डॉलर से ज्यादा का अनुदान और क्रेडिट दिया है।
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म्यांमार में भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत ने सित्तवे पावर के लिए इमारत और पेलेट्टवा में इनलैंड वाटर टर्मिनल का निर्माण पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा, 'पेलेट्टवा में एक सड़क है जिसे जोरिनपूई तक बनाया जाएगा। जोरिनपूई मिजोरम की सीमा के किनारे है। हमने इसके लिए अंतिम चरण के लिए अनुबंध किया है।
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इस परिवहन गलियारे का निर्माण जब पूरा हो जाएगा तो इसमें रखिना और चेन जैसे राज्यों में आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता है, जिससे होकर यह गुजरेगा। इस प्रोजेक्ट के अक्टूबर में शुरू होने की उम्मीद है। 109 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए 1600 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया है।
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भारत त्रिपक्षीय राजमार्ग का भी निर्माण कर रहा है, जो मूल रूप से 2014 के लिए लक्षित था। लेकिन अब यह 2020 तक ही पूरा हो पाएगा। मिसरी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। हम तमु-कलय रोड पर 69 पुलों की मरम्मत कर रहे हैं।
इस मामले में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आइजोल, मिजोरम में भारत-म्यांमार सीमावर्ती राज्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्ट में विकास की गति को तेज करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
गौरतलब हो कि हाल ही में भारत-म्यांमार के संबंधों को ध्यान में रखते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर 27 मई को म्यांमार की राजधानी नैपीदा गए थे।