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डोलम पठार पर भारत-चीन आमने सामने, आखिर क्या चाहता है ड्रैगन
amarujala.com, Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी
Updated Mon, 24 Jul 2017 04:02 PM IST
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पिछले महीने से भारतीय और चीनी सैनिक डोलम पठार पर एक दूसरे का सामना कर रहे हैं जोकि डोकला पोस्ट के पास में है। इसकी सीमा उत्तर के बतांग ला और दक्षिण में जिमोचेन के बीच स्थित है। भारत और चीन के बीच गतिरोध तब शुरू हुआ जब चीन ने भूटानी क्षेत्र में असमान ट्रैक का विस्तार करने पर काम शुरू किया। और भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोक दिया।
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भूटान और भारत का मानना है कि चीन की नजर जमफेरी रिज पर है। जो अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं चीन मामले को सुलझाने के लिए भारत के सामने अपने सैनिकों को पीछे हटाने की मांग कर सकता है। दरअसल डोलम पठार, डोकलाम क्षेत्र का भाग है, जिसे विदेश मंत्रालय ने बयान देकर और दिल्ली में भूटान दूतावास ने संदर्भित किया है। डोकलाम पठार, डोलम पठार के उत्तर पूर्व में 30 किमी दूर स्थित है। डॉकलाम को मैंडिनिन में डोंगलंग कहा जाता है।
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डॉकलाम या डोंगलांग क्षेत्र, चंबी घाटी नामक एक फ़नल के आकार की घाटी के उत्तरी छोर के करीब है। घाटी चीन के तिब्बत क्षेत्र में खुलती है इसके आधार पर (तिब्बत में), चंबी 'फ़नल' 54 किमी चौड़ी है। इसकी टिप पर, 'फ़नल' सिर्फ 11 किमी चौड़ी है। यह बटांग ला है, जो गंगटोक के पूर्व में स्थित है। चंबी 'फ़नल' दक्षिण में अपनी तरफ से 70 किमी दूर उत्तर में अपने बेस के लिए उपाय करता है।
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वहीं ट्राइजंक्शन एक बिंदु है जहां भारत (सिक्किम), भूटान और चीन (तिब्बत) की सीमाएं मिलती हैं। ट्राइजंक्शन विवादित है - भारत का दावा है कि वह बटांग ला में है, जबकि चीन का दावा है कि यह जिमोंशे में लगभग 6.5 किमी दूर दक्षिण में है। दोनों दावे ब्रिटेन और चीन के बीच 1890 कलकत्ता कन्वेंशन के प्रतिस्पर्धात्मक व्याख्याओं पर आधारित हैं। 2012 में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते के अनुसार, दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखना होगा जब तक कि उनके प्रतिस्पर्धा दावे तीसरे पक्ष, भूटान से परामर्श में हल नहीं किए जाते।