फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   himachal election 2017 for virbhadra singh anti incumbency play a major role in Himachal election

हिमाचल चुनाव: वीरभद्र के काम से जनता तो संतुष्ट, पर भारी पड़ सकती है बदलाव की परंपरा

Tue, 07 Nov 2017 02:38 PM IST
संजय मिश्र, हिमाचल से लौटकर
संजय मिश्र, हिमाचल से लौटकर Updated Tue, 07 Nov 2017 02:38 PM IST
विज्ञापन
himachal election 2017 for virbhadra singh anti incumbency play a major role in Himachal election
virbhadra singh
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की ओर से बतौर सोलो प्रचारक मैदान में डटे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए विधानसभा का यह चुनाव उनके जीवन की अंतिम परीक्षा है। भद्र छवि वाले वीरभद्र इस परीक्षा में वीर साबित हो पाएंगे या नहीं यह 9 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद पता चलेगा, लेकिन इतना तो जरूर है कि राजा साहब की छवि राज्य की जनता में अब भी बरकरार है।
विज्ञापन


राज्य के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत बेशक पतली नजर आ रही है, लेकिन वह राजा साहब की वजह से नहीं है। राजा साहब तो अपने जीवन के अंतिम चुनाव में सत्ता के परंपरागत बदलाव के भंवर में फंस गए हैं। राज्य की जनता राजा साहब के काम से तो संतुष्ट नजर आ रही है, मगर बदलाव की परंपरा उनकी मजबूरी है। 
विज्ञापन


हार का अंतर कम रखने में ही राजा की जीत

राजा साहब की छवि से संतुष्ट अधिकांश का कहना है कि यहां हर पांच वर्ष के बाद सत्ता बदलती है, इसलिए इस दफे भी सूबे की सत्ता का बदलाव होगा। जनता के बीच स्वच्छ और काम करने वाले नेता की छवि के बावजूद बदलाव की परंपरा राजा पर भारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें:  आज शाम थम जाएगा चुनाव प्रचार का शोर, सियासी महासमर का काउंटडाउन शुरू

अब राजा साहब के लिए चुनौती ये है कि बदलाव की परंपरा के बीच वे अपनी सत्ता बेशक न बरकरार रख पाएं, मगर हार के अंतर को छोटा रखने में ही उनकी जीत नजर आ जाएगी। इस वजह से वे अकेले चुनावी मैदान में दिन-रात एक किए हैं ताकि अपनी प्रतिष्ठा बचा सकें।

जनता में वीरभद्र की छवि अब भी भद्र 

himachal election 2017 for virbhadra singh anti incumbency play a major role in Himachal election
virbhadra singh
भाजपा की ओर से सूबे के मुख्यमंत्री वीरभद्र पर बेशक भ्रष्टाचार के मामले उछाले जा रहे हैं, लेकिन राज्य की जनता में राजा साहब की छवि भद्र नेता की है। राजा साहब पर लग रहे आरोपों को लोग सियासी कवायद मान रहे हैं। यही नहीं चंद लोगों को छोड़ दें तो राजा साहब की छवि जनता में काम करने वाले नेता और सहज स्वभाव की है।

ज्वालाजी निवासी प्रकाश चंद वैसे तो भाजपा को समर्थन देने की बात करते नजर आए लेकिन कहा कि राजा साहब ने भी विकास के काफी काम किए हैं। मिलने-जुलने में भी वे सहज और सरल हैं। फिर भाजपा को वोट देने के सवाल पर प्रकाश चंद ने कहा कि यहां हिमाचल में हर पांच साल पर सत्ता बदलती है, इसलिए इस दफे भी बदलाव की बात हो रही है।

ये भी पढ़ें: आर्थिक मोर्चे पर केंद्र सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही कांग्रेसः राजनाथ

देहरा के विक्रम चौहान का भी कमोबेश यही मानना है। पूर्व पंचायत प्रमुख रहे विक्रम चौहान ने बताया कि परंपरागत रूप से यहां की जनता सत्ता का बदलाव करती है, इसलिए इस दफे बारी भाजपा की है। ऊपर से भाजपा ने प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर राजा साहब के लिए बची थोड़ी-बहुत संभावनाओं को भी समाप्त कर दिया है।

1990 से कुर्सी बदलने का खेल जारी

himachal election 2017 for virbhadra singh anti incumbency play a major role in Himachal election
virbhadra singh

हिमाचल प्रदेश में सत्ता के बदलाव की परंपरा वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद शुरू हुई थी, लेकिन 1990 के बाद से सूबे का सियासी ताज भाजपा और कांग्रेस के बीच अदल-बदलकर रह गया। यही नहीं वर्ष 1993 से हिमाचल के मुख्यमंत्री की कुर्सी वीरभद्र और प्रेम कुमार धूमल के बीच ही सिमटकर रह गई है।

हर चुनाव के बाद एक दूसरे के बीच ही कुर्सी की अदला-बदली होती रही है। वर्ष 1990 के चुनाव में वीरभद्र को पटखनी देकर भाजपा ने हिमाचल में सत्ता हासिल की थी। तब शांता कुमार मुख्यमंत्री बने, लेकिन अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद अन्य भाजपाशासित राज्यों के साथ पार्टी की हिमाचल में बनी सरकार भी चली गई।

पढ़ें: GST छोटे कारोबारियों के लिए बुरे सपने की तरह, टैक्स टेररिज्म‍ जैसे पैदा हुए हालात: मनमोहन

1993 में हुए चुनाव में दोबारा से वीरभद्र ने कांग्रेस को जीत दिलाते हुए राज्य की गद्दी संभाली, मगर 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद प्रेम कुमार धूमल राज्य के सीएम बने। वे 2003 तक मुख्यमंत्री रहे। 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में वीरभद्र ने धूमल को पटखनी दी और भाजपा को पराजित कर दोबारा से राज्य के मुख्यमंत्री बने।

​2007 में हुए चुनाव में फिर धूमल के सिर ताज सजा। 2012 में कांग्रेस को जीत दिलाकर वीरभद्र एक बार फिर से हिमाचल के मुख्यमंत्री बने। अब 9 नवंबर को होने वाले मतदान में राजनीतिक दलों का भविष्य बेशक जनता के हाथ में है, मगर बारी धूमल की है। यही वजह है कि भाजपा ने उन्हें सीएम के रूप में आगे कर राजा साहब से पुराना हिसाब चुकता करने का मौका भी दे दिया है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed