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Hindi News ›   India News ›   Gujarat Election: Alpesh thakur and Naresh Patel will play the King Maker

गुजरात चुनावः अल्पेश और नरेश पटेल बने गुजरात के किंग मेकर

Fri, 06 Oct 2017 06:24 PM IST
संजय मिश्र/ नई दिल्ली
संजय मिश्र/ नई दिल्ली Updated Fri, 06 Oct 2017 06:24 PM IST
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Gujarat Election: Alpesh thakur and Naresh Patel will play the King Maker
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गुजरात विधानसभा चुनाव की जंग बेशक देश के दो प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच है। मगर खोडलधाम के चेयरमैन नरेश पटेल और पिछडों के मसीहा बनकर उभरे अल्पेश ठाकुर सूबे के दो सामाजिक चेहरे चुनाव परिणाम की धुरी बन गए हैं। दोनों ही दल इन चेहरों को अपने पाले में करने के लिए हर दांव चल रहे हैं। लेकिन दोनों ही चेहरों ने खुले तौर पर अभी किसी दल के साथ जाने के संकेत नहीं दिए हैं। इसलिए गुजरात विधानसभा का चुनाव रोचक बन गया है। 

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माना जा रहा है कि जिस किसी एक दल के पक्ष में ये दोनों चेहरे साथ खड़े हो गए तो विधानसभा चुनाव में उसकी जीत तय है। ‌बताया जा रहा है कि इन चेहरों को साधने की कवायद में परदे के पीछे से मोलभाव का सियासी खेल जारी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सियासी दल नरेश और अल्पेश पर डोरे डाल रही हैं। 
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राहुल के बाद नरेश पटेल से मिले रूपानी
गुजरात चुनाव की धुरी बन चुके नरेश पटेल को साधने की कवायद में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीते दिनों संपन्न प्रदेश की चुनावी यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात की थी। कांग्रेस का प्रयास है कि नरेश पटेल गुजरात चुनाव में उनके उम्मीदवारों के पक्ष में प्रदेश की जनता के सामने अपील जारी कर दें। 
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मगर राहुल की नरेश पटेल से मुलाकात के चंद दिन बाद ही प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने पटेल से मुलाकात कर कांग्रेस के अरमानों पर ग्रहण लगा दिया है। अब खुद नरेश पटेल असमंजस में हैं। नरेश की सौराष्ट्र के पटेल समुदाय पर अच्छी पकड़ मानी जा रही है। तो दूसरी ओर अल्पेश को साधने के लिए भाजपा आलाकमान ने सूबे के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को मोर्चे पर लगा रखा है। 

पीएम मोदी के खास अधिकारी रहे कैलाश नाथन भी अल्पेश पर जोर आजमाइश कर चुके हैं। लेकिन अभी तक उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई है। उल्टे अल्पेश ने दिल्ली आकर कांग्रेस महासचिव अहमद पटेल से मुलाकात भाजपा रणनीतिकारों को चौंका दिया है।

सूत्र बताते हैं कि तीन दिन पहले दिल्ली पहुंचकर अल्पेश ने अहमद पटेल से मुलाकात कर उनसे विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की है। बावजूद उसके अल्पेश ने कांग्रेस के साथ जाने का सार्वजनिक ऐलान अभी नहीं किया है। जबकि सूबे के विभिन्न आंदोलन से निकले हार्दिक पटेल और जिगनेश मवानी जैसे चेहरों ने भाजपा विरोध की नीति को आगे कर अपने मंसूबे पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं। 

हार्दिक पटेल गुजरात में पटेल आरक्षण की मांग को लेकर हुए आंदोलन से चमके हैं। तो जिगनेश मवानी उना में दलितों के विरुद्ध हुई घटना के बाद से दलित मसीहा बनकर उभरे हैं। मवानी और जिगनेश ने गुजरात में भाजपा को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया हुआ है। लेकिन नरेश पटेल और अल्पेश ठाकुर ने अपने पत्ते खोले बिना दोनों ही दलों के साथ अपने लिए भविष्य के अवसर खोले रखे हैं।

भाजपा-कांग्रेस के लिए क्यों जरूरी हैं नरेश और अल्पेश 

Gujarat Election: Alpesh thakur and Naresh Patel will play the King Maker
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नरेश पटेल एक ‌उद्यमी होने के साथ-साथ पटेल समुदाय के बड़े सामाजिक नेता हैं। गुजरात के राजकोट जिले में उन्होंने खोडलधाम नाम से पटेलों की कुलदेवी और देवताओं की स्‍थापना कर धाम बना रखा है। वर्ष में सालाना पूजा के अवसर पर देश-दुनिया के पटेल समुदाय के लोग यहां पहुचंते हैं। 

नरेश पटेल इस खोडलधाम के अध्यक्ष हैं। इसलिए उनकी पटेल समुदाय के लोगों के बीच अच्छी पैठ है। खासतौर से सौराष्‍ट्र के पटेलों के बीच उनकी गहरी पकड़ है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने ऐन वक्त पर भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की थी। जिसके बदौलत नाराजगी के बावजूद भी पटेलों के अधिकांश वोट भाजपा के पाले में गए थे। मगर इस बार ‌स्थिति बिलकुल उल्ट दिख रही है। 

उत्तर गुजरात के पटेल समुदाय का युवा वर्ग हार्दिक पटेल की वजह से भाजपा से नाराज है। इसलिए यहां भाजपा अल्पेश को साधकर पटेलों की नाराजगी के खामियाजे की भरपाई करना चाहती है। अल्पेश ठाकोर हैं, जिसे पिछड़े वर्ग में गिना जाता है। बीते दो वर्षों में पिछड़े समुदाय को जोड़कर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान कायम की है। 

उनके पिता बेशक कांग्रेस में जिला स्तर के नेता हैं। लेकिन सामाजिक आंदोलन के जरिए अल्पेश ने अल्प समय में प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। जिसका असर है कि देश की दोनों बड़ी पार्टियां अपने-अपने पाले में करने के लिए उनपर डोरे डाल रहीं हैं। यही आलम नरेश पटेल का भी है, उन्हें साधने के लिए दिल्ली से लेकर गुजरात तक कवायद जारी है। मगर दोनों ही नेताओं ने अपनी मंशा को सामने किए बगैर कांग्रेस-भाजपा सरीखे देश के राष्ट्रीय दलों को मोलभाव के लिए मजबूर कर रखा है।

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