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कैग रिपोर्ट: इस वजह से जंग में चीन-पाक के सामने टिक नहीं पाएगी भारतीय सेना

Mon, 24 Jul 2017 02:34 PM IST
amarujala.com presented by: मोहित
amarujala.com presented by: मोहित Updated Mon, 24 Jul 2017 02:34 PM IST
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Defence shortcomings in indian army key concerns in CAG report explained
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हाल ही में आई रिपोर्ट ने भारतीय सेना के अंदर मौजूद की एक बड़ी खामी को उजागर किया। रिपोर्ट में कहा गया कि सेना के पास 10 दिन के युद्ध के लिए  गोले-बारूद का ही भंडार है। रिपोर्ट को कैग ने संसद में भी पेश किया। वहीं 2015 में भी कैग ने रिपोर्ट जारी की थी जिसमें 20 दिन के भंडारण क्षमता की बात कही थी।
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वहीं चीन के साथ जारी डोकलाम विवाद और पाकिस्तान के साथ आए दिन टकराव के बीच यह चिंता की बात है कि युद्ध की स्थिति में भारत लंबी चलने वाली लड़ाई में ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएगा। लेकिन कैग की इस रिपोर्ट के पीछे आयुध कारखाना बोर्ड, लालफीताशाही, नौकरशाही और मेक इन इंडिया को जिम्मेदार ठहराया गया है।
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वहीं मोदी सरकार का मेक इन इंडिया भी इसके आड़े आ रहा है। वहीं तीसरी सबसे बड़ी सेना होने के बावजूद स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रीसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) ने कहा कि भारत ने 2012 से 2016 के बीच दुनियाभर में हुए हथियारों के आयात का 13 प्रतिशत भारत ने किया, इसका मतलब ये है कि भारत अपनी सुरक्षा के बुनियादी ढांचे पर ज्यादा केंद्रित रहा, सिवाय गोले-बारूद की खरीदी के।
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सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोला-बारूद का उत्पादन और आपूर्ति गुणवत्ता और मात्रा में कमी है। यहीं नहीं भारी मात्रा में गोले-बारूद की भंडारण की समस्या और समय से आयात करने के लिए फंड जारी नहीं होना भी एक बड़ी वजह है।
 
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