दार्जिलिंगः इंटरनेट-टीवी सेवा पर रोक, आज राज्य सरकार की सर्वदलीय बैठक
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गोरखा जनमुक्ति की अपील पर जारी बेमियादी बंद की वजह से दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बुधवार को भी सामान्य जनजीवन ठप रहा। राज्य सरकार ने इलाके की परिस्थिति पर विचार-विमर्श के लिए बृहस्पतिवार को सिलीगुड़ी में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इसकी अध्यक्षता गृह सचिव करेंगे। हालांकि पर्वतीय क्षेत्र के तमाम राजनीतिक दलों ने पहले ही इस बैठक में हिस्सा नहीं लेने का एलान कर दिया है।
पर्वतीय क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को अगले सात दिनों तक बंद रखने का फैसला किया गया है। इस बीच, लोकल केबल टीवी चैनलों पर भी बुधवार से रोक लगा दी गई। मोर्चा ने अपनी मांग के समर्थन में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजने का भी फैसला किया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेगा। वहीं गोरखा मोर्चा के एक दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सिक्किम की राजधानी गंगटोक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू से मुलाकात कर अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में उनको दो सूत्री ज्ञापन सौंपा है।
दूसरी ओर, बीते तीन दिनों से पर्वतीय क्षेत्र में हिंसा की कोई वारदात नहीं होने के बावजूद गोरखालैंड के समर्थन में रैलियों का दौर जारी है। इसके साथ ही अलग राज्य की मांग में इलाके में बडे़ पैमाने पर पोस्टर लगाए गए हैं। विभिन्न इलाकों में मोटरसाइकिल रैलियां भी निकाली जा रही हैं। दार्जिलिंग में गोरखा मोर्चा की महिला शाखा ने गांधीगीरी की तर्ज पर भारतीय झंडे और पोस्टरों के साथ रैली निकाली। इसमें शामिल महिलाएं नारे लगा रही थीं, ‘वी वांट गोरखालैंड, गांधी जी के देश में गांधीगीरी जिंदाबाद’। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिलहाल नीदरलैंड के दौरे पर हैं।
खाद्यान्न संकट से पहाड़ छोड़ रहे लोग
इलाके में अब कोई भी पर्यटक नहीं हैं, लेकिन बंद लंबा खिंचने की स्थिति में खाद्यान्न का संकट पैदा होने से अब स्थानीय लोग भी पहाड़ छोड़कर मैदानी इलाकों में जाने लगे हैं। ऐसे लोगों को पुलिस की मदद से बसों के जरिये सिलीगुड़ी पहुंचाया जा रहा है। जिला शासक जयशी दासगुप्ता ने बताया कि बीते सात दिनों के दौरान रोजाना औसतन आठ सौ लोगों को इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
12 घंटे में छात्रों को निकालें बाहर
मोर्चा ने तमाम बोर्डिंग स्कूलों के छात्रों को बाहर निकालने के लिए 23 जून को सुबह 6:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक 12 घंटे का समय दिया है। मोर्चा नेता विनय तामंग ने बताया कि छात्रों को सिर्फ स्कूली बसों से ही बाहर जाने की इजाजत दी जाएगी। इस दौरान दूसरे किसी वाहन को पहाड़ियों से नीचे नहीं उतरने दिया जाएगा।
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मालूम हो कि गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों का ये नया दौर कुछ समय से बंगाली भाषा को लादे जाने के विरोध में हो रहा है। दरअसल, ममता बनर्जी की अगुवाई में पश्चिम बंगाल सरकार ने बंगाली को पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य बना दिया था। जिसके बाद बंगाली लादे जाने के विरोध में गोरखालैंड के अर्ध-स्वायत्तशाषी इलाकों में हिंसा फैल गई।