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टाटा समूहः खूब भरता है भारत सरकार का खजाना
टीम डिजिटल/आगरा
Updated Sat, 29 Oct 2016 10:06 AM IST
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टाटा समूह में चल रही आंतरिक कलह के बीच सरकार इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि इससे देश का हित प्रभावित नहीं हो। ऐसा इसलिए कि टाटा समूह की कंपनियां साल में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का योगदान राजकोष में करती हैं। इसके अलावा दुनिया भर में टाटा समूह भारत का प्रतिनिधित्व भी करता है। इस समय इसके देश-विदेश में स्थित प्रतिष्ठानों में 6.6 लाख से भी अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं।
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केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि टाटा समूह की कंपनियां सिर्फ प्रत्यक्ष कर (कारपोरेट टैक्स) मद में ही साल में करीब दस हजार करोड़ रुपये का योगदान करती हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कर के केंद्रीय उत्पाद शुल्क मद में 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर देती हैं।
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सीमा शुल्क मद में भी यह कंपनी दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान करती है। टाटा समूह के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015-16 के दौरान कंपनी ने सिर्फ केंद्रीय करों में ही 22,840 करोड़ रुपये का योगदान किया था।
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सरकार के राजस्व में 40 हजार करोड़ की मदद करता है टाटा ग्रुप
आलोच्य अवधि में कारपोरेट टैक्स मद में कंपनी की हिस्सेदारी जहां 2.1 फीसदी थी, वहीं केंद्रीय उत्पाद शुल्क मद में 2.8 फीसदी। सीमा शुल्क मद में टाटा समूह का योगदान करीब एक फीसदी का था। सरकार को डर सता रहा है कि यदि समूह में चल रही इस कलह से कंपनी के कार्य-कलापों पर असर पड़ा तो इससे सरकारी राजस्व पर भी फर्क पड़ेगा।
इस आंतरिक कलह के बीच एक अन्य अधिकारी ने अंदेशा जताया कि इससे कहीं भारत की छवि प्रभावित नहीं हो। इस समय दुनिया भर के छह महाद्वीपों में टाटा समूह की कंपनियां कारोबार करती हैं। जहां भी इस समूह की कंपनियां चल रही हैं, वहां इन्होंने एक अलग कार्य संस्कृति विकसित की है।
दुनिया भर में टाटा समूह का अलग सम्मान है। यदि यह झगड़ा लंबा चलता है तो इससे कंपनी की साख पर भी असर पड़ सकता है और यह अंतत: भारत की छवि प्रभावित करेगा।
इस आंतरिक कलह के बीच एक अन्य अधिकारी ने अंदेशा जताया कि इससे कहीं भारत की छवि प्रभावित नहीं हो। इस समय दुनिया भर के छह महाद्वीपों में टाटा समूह की कंपनियां कारोबार करती हैं। जहां भी इस समूह की कंपनियां चल रही हैं, वहां इन्होंने एक अलग कार्य संस्कृति विकसित की है।
दुनिया भर में टाटा समूह का अलग सम्मान है। यदि यह झगड़ा लंबा चलता है तो इससे कंपनी की साख पर भी असर पड़ सकता है और यह अंतत: भारत की छवि प्रभावित करेगा।
पाकिस्तान बोला किसी भी मंच पर भारत से हूं बातचीत की तैयार
2015-16 में टाटा समूह की कंपनियों का कर में योगदान (करोड़ रुपये में)
कारपोरेट टैक्स 9,557
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क 11,089
सीमा शुल्क 2,194
बिक्री कर 7,854
अन्य 9,600
कुल 40,294
मिस्त्री के शेयरों के खरीदार उपलब्ध, बातचीत जारी
खबरों के मुताबिक, टाटा संस के जो 18 फीसदी शेयर सायरस मिस्त्री के पास हैं, उसकी वजह से समूह को परेशानी नहीं होगी। यदि मिस्त्री परिवार इन शेयरों को
बेचना चाहेगा तो उन्हें खरीदने के लिए उन संस्थानिक निवेशकों और सोवरन वेल्थ फंडों से बातचीत जारी है, जो इसे खरीद सकते हैं। हालांकि इस घटना पर
नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि मिस्त्री परिवार अभी टाटा संस के शेयर बेचने के मूड में नहीं है।
बैंकरों का भरोसा है टाटा पर
टाटा समूह की कंपनियों का वित्तपोषण करने वाले बैंकरों का रतन टाटा पर भरोसा बरकरार है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बड़े बैंक के अधिकारी का कहना है कि
रतन टाटा पहले भी टाटा समूह को 21 वर्षों तक चला चुके हैं। इसलिए उनकी कंपनी के प्रति निष्ठा पर कोई सवाल नहीं है। सायरस मिस्त्री द्वारा 1,800 करोड़
डॉलर के नुकसान के सवाल पर भी बैंकरों का कहना है यह बढ़ा-चढ़ा कर दिया गया बयान लगता है।
कारपोरेट टैक्स 9,557
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क 11,089
सीमा शुल्क 2,194
बिक्री कर 7,854
अन्य 9,600
कुल 40,294
मिस्त्री के शेयरों के खरीदार उपलब्ध, बातचीत जारी
खबरों के मुताबिक, टाटा संस के जो 18 फीसदी शेयर सायरस मिस्त्री के पास हैं, उसकी वजह से समूह को परेशानी नहीं होगी। यदि मिस्त्री परिवार इन शेयरों को
बेचना चाहेगा तो उन्हें खरीदने के लिए उन संस्थानिक निवेशकों और सोवरन वेल्थ फंडों से बातचीत जारी है, जो इसे खरीद सकते हैं। हालांकि इस घटना पर
नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि मिस्त्री परिवार अभी टाटा संस के शेयर बेचने के मूड में नहीं है।
बैंकरों का भरोसा है टाटा पर
टाटा समूह की कंपनियों का वित्तपोषण करने वाले बैंकरों का रतन टाटा पर भरोसा बरकरार है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बड़े बैंक के अधिकारी का कहना है कि
रतन टाटा पहले भी टाटा समूह को 21 वर्षों तक चला चुके हैं। इसलिए उनकी कंपनी के प्रति निष्ठा पर कोई सवाल नहीं है। सायरस मिस्त्री द्वारा 1,800 करोड़
डॉलर के नुकसान के सवाल पर भी बैंकरों का कहना है यह बढ़ा-चढ़ा कर दिया गया बयान लगता है।