{"_id":"59b125384f1c1bfe7f8b4a9f","slug":"china-objection-to-army-chief-gen-bipin-rawat-statement","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सेना प्रमुख रावत के बयान पर तिलमिलाया चीन, कहा- ये दोनों देशों के रिश्तों के खिलाफ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सेना प्रमुख रावत के बयान पर तिलमिलाया चीन, कहा- ये दोनों देशों के रिश्तों के खिलाफ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Sep 2017 04:41 PM IST
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भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के उस बयान पर चीन ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है जिसमें उन्होंने कहा है कि चीन भारत के धैर्य की परीक्षा ले रहा है।
चीन का कहना है कि जनरल की यह टिप्पणी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने पर जताई गई सहमति के खिलाफ है। जनरल रावत ने नई दिल्ली में सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज के एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत को दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।
एक तरफ चीन आंखें दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ सुलह-समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है जिसकी सरकार और सेना भारत को दुश्मन मानते हैं।
उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि उन्होंने जनरल का बयान देखा है और यह भी जानते हैं कि भारतीय प्रेस ने भी इसकी आलोचना की है।
ढाई महीने तक चले डोकलाम गतिरोध के बाद चीन के शियामेन शहर में मोदी-जिनपिंग मुलाकात का जिक्र करते हुए गेंग ने जनरल रावत के बयान जारी करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या रावत का बयान भारत का आधिकारिक बयान है।
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गेंग ने कहा कि भारत और चीन महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और रिश्तों को लगातार मजबूती देना दोनों देशों के बुनियादी हितों के लिए जरूरी है। दो दिन पहले जिनपिंग ने मोदी से कहा है कि भारत के लिए चीन खतरा नहीं बल्कि अवसर है।
मोदी ने भी जिनपिंग से द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कही है। उम्मीद है कि जनरल रावत रिश्तों की इस रुझान को समझेंगे और दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में योगदान करेंगे।
पढ़ेंः ब्रिक्स में आतंकवाद पर लताड़ के बाद गुहार लगाने चीन जाएंगे पाकिस्तान के विदेश मंत्री
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चीन का कहना है कि जनरल की यह टिप्पणी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने पर जताई गई सहमति के खिलाफ है। जनरल रावत ने नई दिल्ली में सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज के एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत को दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।
एक तरफ चीन आंखें दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ सुलह-समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है जिसकी सरकार और सेना भारत को दुश्मन मानते हैं।
उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि उन्होंने जनरल का बयान देखा है और यह भी जानते हैं कि भारतीय प्रेस ने भी इसकी आलोचना की है।
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ढाई महीने तक चले डोकलाम गतिरोध के बाद चीन के शियामेन शहर में मोदी-जिनपिंग मुलाकात का जिक्र करते हुए गेंग ने जनरल रावत के बयान जारी करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या रावत का बयान भारत का आधिकारिक बयान है।
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गेंग ने कहा कि भारत और चीन महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और रिश्तों को लगातार मजबूती देना दोनों देशों के बुनियादी हितों के लिए जरूरी है। दो दिन पहले जिनपिंग ने मोदी से कहा है कि भारत के लिए चीन खतरा नहीं बल्कि अवसर है।
मोदी ने भी जिनपिंग से द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कही है। उम्मीद है कि जनरल रावत रिश्तों की इस रुझान को समझेंगे और दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में योगदान करेंगे।
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पाकिस्तान और चीन से एक साथ हो सकती है जंग
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में बीते बुधवार को कहा कि देश को दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि चीन ने ‘ताल ठोकना’ शुरू कर दिया है जबकि पाकिस्तान से सुलह की कोई उम्मीद ही नहीं है। पाकिस्तान की सेना और राजनीति भारत को अपने विरोधी के रूप में देखती है।
डोकलाम में 73 दिन तक लंबे गतिरोध का हवाला देते हुए सेना प्रमुख ने चेताया कि उत्तरी सीमा पर स्थिति धीरे-धीरे बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा इस बात की आशंका है कि संघर्ष समय और जगह के मामले में सीमित होगा या पूरे मोर्चे पर युद्ध के रूप में बढ़ जाएगा।
जनरल रावत ने कहा कि पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठा सकता है। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। इसलिए हमारे संदर्भ में युद्ध वास्तविकता के दायरे में निहित है।
उन्होंने कहा कि आर्मी तीनों सैन्य सेवाओं में सबसे सुप्रीम है और हमें बाहरी सुरक्षा खतरों से मुकाबला करने के लिए सफल तैयारी करनी होगी।
सेना प्रमुख का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान के बाद आया है जिसमें दोनों नेताओं डोकलाम गतिरोध को पीछे छोड़ते हुए भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए थे।
उन्होंने कहा कि चीन ने ‘ताल ठोकना’ शुरू कर दिया है जबकि पाकिस्तान से सुलह की कोई उम्मीद ही नहीं है। पाकिस्तान की सेना और राजनीति भारत को अपने विरोधी के रूप में देखती है।
डोकलाम में 73 दिन तक लंबे गतिरोध का हवाला देते हुए सेना प्रमुख ने चेताया कि उत्तरी सीमा पर स्थिति धीरे-धीरे बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा इस बात की आशंका है कि संघर्ष समय और जगह के मामले में सीमित होगा या पूरे मोर्चे पर युद्ध के रूप में बढ़ जाएगा।
जनरल रावत ने कहा कि पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठा सकता है। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। इसलिए हमारे संदर्भ में युद्ध वास्तविकता के दायरे में निहित है।
उन्होंने कहा कि आर्मी तीनों सैन्य सेवाओं में सबसे सुप्रीम है और हमें बाहरी सुरक्षा खतरों से मुकाबला करने के लिए सफल तैयारी करनी होगी।
सेना प्रमुख का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान के बाद आया है जिसमें दोनों नेताओं डोकलाम गतिरोध को पीछे छोड़ते हुए भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए थे।