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चीन ने रोका ब्रह्मपुत्र का पानी! बना रहा है सबसे महंगा प्रोजेक्ट
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 01 Oct 2016 02:57 PM IST
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ब्रह्मपुत्र
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चीन ने अपने सबसे महंगे हाइड्रो प्रोजेक्ट को ध्यान में रखते हुए तीब्बत के पास ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी को रोक दिया है। यह भारत के लिए चिंता का कारण बन सकता है और यह इस नदी के निचले तट पर स्थित देश के भागों में पानी के बहाव को प्रभावित कर सकता है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी के तिब्बती नाम 'यारलुंग जेंगबो' की सहायक नदी सिबकू नदी (Xiabuqu river) में अपना लाल्हो प्रोजेक्ट लगाया है। यह तिब्बत के जाइगस में स्थित है और सिक्किम के नजदीक पड़ता है। यहीं से ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश की ओर बहती है। इस पर करीब 740 मिलियन यूएस डॉलर का निविश किया है। चाइना की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने शनिवार को इस प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट हेड को कोट करते हुए यह जानकारी दी है।
इसे अपना सबसे महंगा प्रोजेक्ट बताते हुए चीन ने कहा है कि जून 2014 में शुरू हुआ इसका काम साल 2019 में पूरा करने का लक्ष्य है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पता नहीं चल पाया है कि पानी रोकने से भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में ब्रह्मपुत्र के बहाव पर क्या असर पड़ेगा?
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी के तिब्बती नाम 'यारलुंग जेंगबो' की सहायक नदी सिबकू नदी (Xiabuqu river) में अपना लाल्हो प्रोजेक्ट लगाया है। यह तिब्बत के जाइगस में स्थित है और सिक्किम के नजदीक पड़ता है। यहीं से ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश की ओर बहती है। इस पर करीब 740 मिलियन यूएस डॉलर का निविश किया है। चाइना की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने शनिवार को इस प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट हेड को कोट करते हुए यह जानकारी दी है।
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इसे अपना सबसे महंगा प्रोजेक्ट बताते हुए चीन ने कहा है कि जून 2014 में शुरू हुआ इसका काम साल 2019 में पूरा करने का लक्ष्य है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पता नहीं चल पाया है कि पानी रोकने से भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में ब्रह्मपुत्र के बहाव पर क्या असर पड़ेगा?
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पिछले साल भारत ने जताई थी चिंता
Chinab
बता दें कि पिछले साल चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र में डेढ़ बिलियन की लागत वाला सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट शुरू किया था। इस पर भारत ने चिंता जताई थी। इससे पहले चीन यह कहता रहा है कि उसे भारत की चिंताओं के बारे में पता है।
इस साल मार्च में केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर लाल जाट ने कहा था कि भारत ने बांधों की वजह से होने वाले असर को लेकर चीन के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। भारत और चीन के बीच कोई जल समझौता नहीं है। हालांकि, दोनों देशों ने सीमा के दोनों ओर बहने वाली नदियों को लेकर एक्सपर्ट लेवल मेकेनिजम बनाया है।
इस साल मार्च में केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर लाल जाट ने कहा था कि भारत ने बांधों की वजह से होने वाले असर को लेकर चीन के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। भारत और चीन के बीच कोई जल समझौता नहीं है। हालांकि, दोनों देशों ने सीमा के दोनों ओर बहने वाली नदियों को लेकर एक्सपर्ट लेवल मेकेनिजम बनाया है।