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AMU में लड़के-लड़कियों के अलग बैठने पर UGC को आपत्ति, एक साथ पढ़ाई को सरकार से की सिफारिश

Sun, 19 Nov 2017 03:39 AM IST
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 19 Nov 2017 03:39 AM IST
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Boys and Girls Together Studies in Aligarh Muslim University UGC
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक समिति ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में ग्रेजुएशन प्रोग्राम में लड़के-लड़कियों के अलग-अलग कक्षाओं में बैठने पर आपत्ति जताई है। उसने कैंपस में तत्काल प्रभाव से को-एड व्यवस्था से पढ़ाई शुरू कराने की केंद्र सरकार से सिफारिश की है।
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यूजीसी की समिति ने केंद्र को सौंपी अपनी रिपोर्ट में तर्क दिया है कि अलग-अलग पढ़ाई करने की वजह से छात्र प्रोफेशनल कोर्स से लेकर नौकरी के दौरान अपनी झिझक कभी दूर नहीं कर पाते हैं और इसका नुकसान उठाना पड़ता है।
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उसने शिया और सुन्नी के अलग-अलग विभाग में पढ़ाई करवाने पर भी आपत्ति जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब शिया और सुन्नी दोनों एक ही धर्म पर आधारित पढ़ाई करवाते हैं तो फिर ये अलग-अलग क्यों है? ऐसे में इन दोनों विभागों को मर्ज कर दिया जाना चाहिए।
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दाखिला राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से हो
एएमयू के विभिन्न मामलों की जांच के लिए यूजीसी ने एक समिति गठित की थी। इसी समिति ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

उसने कहा है कि इंजीनियरिंग व मेडिकल के तर्ज पर अन्य डिग्री प्रोग्राम में दाखिले राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा से होने चाहिए। इसके लिए प्रश्नपत्र, परीक्षा व रिजल्ट आदि का सेटअप तैयार करें। इस प्रवेश परीक्षा की मेरिट अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी प्रयोग की जा सकती है।

पूर्व छात्रों का बेवजह दखल न हों

Boys and Girls Together Studies in Aligarh Muslim University UGC
समिति ने माना कि एएमयू में पूर्व छात्र (एल्यूमनाई) बेवजह दखल देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई पूर्व छात्र आर्थिक रूप से विश्वविद्यालय की मदद करते हैं। हालांकि पूर्व छात्रों के बेवजह का दखल रोकने के लिए एएमयू में अतिरिक्त फंड बढ़ाना होगा ताकि विश्वविद्यालय प्रबंधन यूजीसी नियमों के तहत फैसले ले सके।

रोजगारपरक शिक्षा दी जाए
शिक्षा सिर्फ डिग्री तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर लड़कों और लड़कियों को रोजगार से जोड़ने के लिए वोकेशनल कोर्स पर फोकस किया जाए। इसके लिए एएमयू को मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट से जोड़ना होगा। अच्छे पैकेज का प्रोत्साहन देने के साथ उन्हें ऐसे कोर्स में दाखिला दिलवाना चाहिए।
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